राजस्थान संकट: बागी सचिन पायलट को मनाने के लिए सोनिया-राहुल ने अब तक क्यों नहीं की उनसे बात?

राजस्थान संकट: बागी सचिन पायलट को मनाने के लिए सोनिया-राहुल ने अब तक क्यों नहीं की उनसे बात?
सचिन पायलट की बीते 9 दिनों से सोनिया गांधी और राहुल गांधी से कोई बात नहीं हुई है. (PTI)

Rajasthan Political Crisis: 42 साल के सचिन पायलट (Sachin Pilot) बगावती तेवर दिखाने के बाद फिलहाल दिल्ली में हैं. 30 विधायक भी उनके साथ ही बताए जा रहे हैं. सचिन पायलट की बीते 9 दिनों से सोनिया गांधी और राहुल गांधी से कोई बात नहीं हुई है. जबकि, राहुल गांधी और सचिन पायलट बहुत करीबी दोस्त बताए जाते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 13, 2020, 10:32 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. मध्य प्रदेश की तर्ज पर अब राजस्थान (Rajasthan Political Crisis) में कांग्रेस (Congress) सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार के खिलाफ बागी तेवर अख्तियार कर लिए हैं. पायलट के सोमवार को अपने 30 समर्थक विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल होने की अटकलें भी तेज हैं. हालांकि, कांग्रेस ने सोमवार को अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी जरूर किया है, लेकिन अपनी सरकार पर आई इस संकट में भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी का सचिन पायलट से कोई बात या मुलाकात न करना हैरान करता है.

कांग्रेस की ओर से जारी व्हिप में प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे ने कहा है कि 109 विधायकों का समर्थन पत्र मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास पहुंच गया है और वे सोमवार सुबह मीटिंग में आएंगे. बाकी लोग अगर नहीं आते हैं तो उनकी सदस्यता चली जाएगी. इस पूरे मामले पर बोलते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि हम किसी व्यक्ति की बात नहीं कर रहे हैं, हमें नहीं लगता है कि कोई नहीं आएगा. उनका इशारा साफ तौर पर सचिन पायलट की तरफ माना जा रहा है.

ये भी पढ़ें:- Rajsthan: सचिन पायलट अपने 'जहाज' पर सवार, लड़खड़ाता दिखा कांग्रेस का रथ



42 साल के सचिन पायलट बगावती तेवर दिखाने के बाद फिलहाल दिल्ली में हैं. 30 विधायक भी उनके साथ ही बताए जा रहे हैं. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सचिन पायलट की बीते 9 दिनों से सोनिया गांधी और राहुल गांधी से कोई बात नहीं हुई है. जबकि, राहुल गांधी और सचिन पायलट बहुत करीबी दोस्त हैं.



रिपोर्ट के मुताबिक, सचिन पायलट से किसी भी बैठक से पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे और सांसद राहुल गांधी बातचीत का आधार तय कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने अपने भरोसेमंद दूत के माध्यम से सचिन को मनाने की कोशिश भी की, लेकिन इस बार सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी भी तरह के समझौते से साफ इनकार कर दिया है.


रिपोर्ट के मुताबिक, 9 दिन पहले गांधी परिवार ने सचिन पायलट से कथित तौर पर कहा था कि वह मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन इसमें समय लगेगा. क्योंकि वह अभी काफी युवा हैं. बता दें कि सचिन पायलट राजस्थान सरकार में डिप्टी सीएम के साथ ही कांग्रेस प्रमुख और पांच मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.


दरअसल, 2018 के दिसंबर में कांग्रेस राजस्थान की सत्ता में तो लौट आई, लेकिन तब तक पार्टी प्रदेश के अब तक के सबसे मजबूत खेमों में बंट चुकी थी. 4 दिन तक चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद खेमों में बटी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश मुखिया सचिन पायलट ने अशोक गहलोत को सत्ता की नैया पार कराने के लिए खेवनहार के रूप में स्वीकार तो किया, लेकिन पार्टी की पतवार अपने हाथ में रखने की शर्त के बाद. सरकार बनते ही सियासत के जादूगर अशोक गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हो गए. सचिन पायलट को पीसीसी चीफ के साथ डिप्टी सीएम के तौर पर दो प्रमुख मंत्रालयों का जिम्मा दे दिया गया. बाद में उनके हिस्से में तीन और विभाग जोड़े गए. लेकिन, गहलोत और पायलट के बीच टकराव बनी रही.

ये भी पढ़ें: Rajasthan Crisis: जल्द होगी नए PCC चीफ की घोषणा ! पूर्व मंत्री रघुवीर मीणा दौड़ में सबसे आगे

जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मार्च में मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार से बगावत कर कांग्रेस छोड़ दी और 22 विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए. आंतरिक सूत्रों की मानें तो कमलनाथ सरकार के गिरने के बाद से सचिन पायलट बीजेपी से बात कर रहे थे. सूत्रों का ये भी कहना है कि पायलट ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही कांग्रेस छोड़ना चाह रहे थे, लेकिन तब ये मुमकिन नहीं हो पाया. हालांकि, बताया जा रहा है कि कांग्रेस से बगावत करने के बाद पायलट लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया के संपर्क में बने हुए हैं.


सियासी गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी राजस्थान में पिछले महीने राज्यसभा चुनाव में सचिन पायलट के जरिए तीन सीटों को सेट करने की कोशिश में थी, तभी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर अपनी पार्टी के विधायकों को तख्तापलट के लिए खरीदने की कोशिश का आरोप लगाया था. हालांकि, तब सचिन पायलट ने खुले तौर पर बीजेपी के साथ इस तरह की बातचीत को खारिज कर दिया था.


इसके बाद अशोक गहलोत ने अपनी सरकार को गिराने की कथित कोशिशों को लेकर जांच का आदेश दे दिया. सचिन पायलट के लिए ब्रेकिंग पॉइंट तब था, जब उन्हें विशेष परिचालन समूह द्वारा पूछताछ के लिए बुलाया गया था. सचिन पायलट के करीबी सूत्रों के अनुसार गहलोत के पास एक समन भी गया, लेकिन इसे तवज्जो नहीं दिया गया.

रविवार को पार्टी में बागी तेवर दिखाते हुए सचिन पायलट ने कहा- 'कोई भी अपना घर नहीं छोड़ना चाहता. लेकिन इस तरह के अपमानजनक स्थिति में कोई रह भी तो नहीं सकता. मेरे समर्थक और विधायक बेहत आहत हुए हैं. मुझे उनकी बात सुननी होगी.' सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट के सख्त रूख के बाद कांग्रेस ने भी तेवर कड़े कर लिए हैं. लेकिन, किसी भी तरह के फैसले से पहले कांग्रेस आलाकमान सचिन पायलट से एक बाद बात करना चाहती है.



आखिर क्यों नाराज हैं सचिन पायलट?
सचिन पायलट विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले की जांच कर रही एसओजी का नोटिस मिलने के बाद से नाराज हैं. उन्हें कांग्रेस और कुछ निर्दलीय विधायकों का समर्थन है. दरअसल, राज्यसभा चुनाव के बाद अशोक गहलोत ने बीजेपी पर अपनी पार्टी के विधायकों को तख्तापलट के लिए खरीदने की कोशिश का आरोप लगाया था. अशोक गहलोत ने अपनी सरकार को गिराने की कथित कोशिशों को लेकर जांच का आदेश दे दिया. सचिन पायलट के लिए ब्रेकिंग पॉइंट तब था, जब उन्हें विशेष परिचालन समूह (एसओजी) द्वारा पूछताछ के लिए बुलाया गया था. सचिन पायलट के करीबी सूत्रों के अनुसार गहलोत के पास एक समन भी गया, लेकिन इसे तवज्जो नहीं दिया गया.

इस बीच, सीएम गहलोत ने रविवार रात 9 बजे विधायकों के साथ बैठक की. इसके बाद गहलोत समर्थक विधायक ने दावा किया कि हमारे जितने विधायक जाएंगे, उससे ज्यादा विधायक हम बीजेपी से ले आएंगे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज