राजस्‍थान हाईकोर्ट: जब बनियान में मामले की पैरवी के लिए पहुंचे वकील साहब और फिर...  

राजस्‍थान हाईकोर्ट: जब बनियान में मामले की पैरवी के लिए पहुंचे वकील साहब और फिर...  
केस को खारिज करने मन बना चुके जस्टिस शर्मा ने सरकारी वकील के अनुरोध पर अगली तारीख दे दी है.

इसी माह, 7 अप्रेल को जस्टिस एसपी शर्मा की कोर्ट में एक वकील इसी तरह बनियान में पैरवी करने के लिए हाजिर हो गए थे.

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जयपुर. लॉकडाउन (Lockdown) में जहां पक्षकार को राहत देने के लिए हाईकोर्ट (High Court) जरूरी मामलों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (video conferencing) से सुनवाई कर रहा है. वहीं दूसरी तरफ, कुछ वकील (lawyer) अदालत की गरिमा का भी ख्याल नहीं रख रहे है. आज एक बार फिर, एक वकील साहब बनियान में ही पैरवी करने के लिए कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हाज़िर हो गए. वकील साहब के इस रुख पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है.

अदालत ने मामलें में जताई नाराजगी
शुक्रवार को जस्टिस एसपी शर्मा की अदालत क्रिमिनल मामलों की सुनवाई कर रही थी. जमानत से जुड़े एक मामले में जब कोर्ट से याचिकाकर्ता के वकील को वीडियो कॉल किया गया तो वकील साहब बनियान में थे और उसी अवस्था मे पैरवी के लिए तैयार भी हो गए. यह देखकर डायस पर बैठे न्यायाधीश शर्मा बेहद नाराज हो गए. उन्होंने तुरंत कॉल कटवाया और याचिका को खारिज करने लगे. लेकिन, सरकारी अधिवक्तता की प्रार्थना पर उन्होंने केस में आगे की तारीख दे दी.

जस्टिस शर्मा की अदालत में हुआ दूसरा वाकया 
इससे पहले भी इसी माह 7 अप्रेल को जस्टिस शर्मा की ही कोर्ट में एक वकील इसी तरह बनियान में पैरवी करने के लिए हाजिर हो गए थे. उस समय भी उन्होंने नाराजगी जताते हुए बार पदाधिकारियों को बुलाकर हिदायत दी थी कि वे वकीलों से कोर्ट की गरिमा का ख्याल रखने के लिए कहें. लेकिन आज फिर इस तरह की घटना घट गई. इस पर आज अपने आदेश में जस्टिस शर्मा ने लिखा कि एडवोकेट एक्ट कहता है कि वकील जब अपने क्लाइंट से भी मिले तो उसे यूनिफार्म में होना चाहिए.



इन्होंने कायम की मिसाल
इस पूरे मामले को लेकर हाई कोर्ट बार के महासचिव अंशुमान सक्सेना ने वकीलों से अनुरोध किया है कि वे कोर्ट की गरिमा का ख्याल रखे. वहीं कोर्ट के समक्ष जब भी पैरवी के लिए उपस्थित हो पूरी यूनिफॉर्म में रहे. उन्होंने बताया कि दूसरी और हाई कोर्ट में ही एक अन्य मामले में  एक ग्रामीण परिवेश के अधिवक्ता जब कोर्ट में पैरवी के लिए उपस्थित हुए तो उनके पास एडवोकेट बैंड नहीं था तो उन्होंने अपनी रुमाल को ही बैंड की तरह बनाकर लगा लिया. जिसकी कोर्ट ने भी प्रशंसा की थी.

 
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