राजस्थान संकट: 100 से ज्यादा MLA जुटाकर गहलोत ने किया शक्ति प्रदर्शन, पढ़ें अभी तक के 10 अपडेट्स

राजस्थान संकट: 100 से ज्यादा MLA जुटाकर गहलोत ने किया शक्ति प्रदर्शन, पढ़ें अभी तक के 10 अपडेट्स
सचिन पायलट ने दावा किया कि उन्हें 30 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है और गहलोत सरकार अल्पमत में है (PTI)

Rajasthan Power Tussle: सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि सचिन पायलट बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के संपर्क में थे, लेकिन वह बीजेपी में नहीं जाएंगे. पायलट अपनी अलग पार्टी बना सकते हैं, जिसका नाम कांग्रेस प्रगतिशील पार्टी होगा. यहां पढ़ें राजस्थान में सियासी संकट पर अभी तक के 10 अपडेट्स:-

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जयपुर/नई दिल्ली. राजस्थान (Rajasthan Power Tussle) में सत्ता का घमासान जारी है. तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच सोमवार दोपहर तक बड़ी संख्या में विधायक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के निवास पर जुटे. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गहलोत ने अपना समर्थन जांचने के लिए बैठक बुलाई थी, जिसमें 102 विधायक पहुंचे थे. इनमें सचिन पायलट के कुछ समर्थक भी थे. हालांकि, डिप्टी सीएम सचिन पायलट इस मीटिंग में नहीं आए. वहीं, कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर लगे प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के पोस्टर कुछ लोगों ने हटा दिए. फिलहाल पार्टी की ओर से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है.

सचिन पायलट ने दावा किया कि उन्हें 30 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है और गहलोत सरकार अल्पमत में है. सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि सचिन पायलट बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के संपर्क में थे, लेकिन वह बीजेपी में नहीं जाएंगे. पायलट अपनी अलग पार्टी बना सकते हैं, जिसका नाम कांग्रेस प्रगतिशील पार्टी होगा.

यहां पढ़ें राजस्थान में सियासी संकट पर अभी तक के 10 अपडेट्स:-
107 में से 102 विधायक अशोक गहलोत के घर मीटिंग में पहुंचे. अभी भी 5 विधायक लापता बताए जा रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि डिप्टी सीएम सचिन पायलट के पक्ष में अब 10 से ज्यादा विधायक ही रह गए हैं. पहले 30 विधायकों के समर्थन का दावा किया जा रहा था.
सचिन पायलट विधायक दल की मीटिंग में तो नहीं पहुंचे, लेकिन चर्चा है कि वह अभी दिल्ली में ही हैं. शाम तक बीजेपी चीफ जेपी नड्डा से मुलाकात कर सकते हैं. हालांकि, अभी भी ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आखिरकार पायलट ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह ही चुनेंगे.
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पास 45 विधायकों का समर्थन है और उनकी पहली प्राथमिकता अब अशोक गहलोत सरकार को गिराने की है. नेताओं के एक वर्ग ने कहा कि सचिन पायलट ने कांग्रेस आलाकमान को संकेत दिया है कि वह बीजेपी में शामिल नहीं होंगे.
इस बीच कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अगर कोई मतभेद है तो सचिन पायलट समेत सभी विधायकों के लिए कांग्रेस पार्टी के दरवाजे सदैव खुले थे, हैं और रहेंगे. अपनी ही पार्टी की सरकार को कमजोर करना या बीजेपी को खरीद-फरोख्त का मौका देना अनुचित है.
राजस्थान में जारी सियासी उथलपुथल के बीच महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता संजय निरुपम ने पार्टी से सचिन पायलट को मनाने की अपील की है. निरुपम ने कहा कि एक के जाने से पार्टी खत्म नहीं होगी, लेकिन सब चले गए तो पार्टी में कौन बचेगा. सचिन पायलट को समझाए और रोके.
छत्तीसगढ़ के कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया ने न्यूज एजेंसी से कहा कि सचिन पायलट अब कांग्रेस में हैं. कांग्रेस को लेकर भाजपा का क्या रुख है, यह सबको पता है. बाद में ट्वीट किया कि मुझसे सिंधिया को लेकर सवाल किया गया था. सिंधिया की जगह पायलट का नाम निकल गया.
पायलट विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले की जांच कर रही एसओजी का नोटिस मिलने के बाद से नाराज हैं. उन्हें कांग्रेस और कुछ निर्दलीय विधायकों का समर्थन है. पायलट का दावा है कि उनके संपर्क में 30 से ज्यादा विधायक हैं.
सचिन पायलट बातचीत में बताया करते हैं कि अब राहुल गांधी उनसे बातचीत नहीं करते हैं. ऐसे में उनके पास न तो दिल्ली में सम्मानजनक जगह बची और न ही राजस्थान में. क्योंकि राजस्थान में उनके साथ सीएम गहलोत कैबिनेट मंत्री की तरह व्यवहार कर रहे हैं.
राजस्थान में स्थानीय निकाय के चुनाव होने हैं. पंचायत से लेकर शहरी चुनाव में टिकट बांटना है. ऐसे में अशोक गहलोत चाहते थे कि सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाया जाए, ताकि टिकट बंटवारे में उनका सिक्का चल सके.
पायलट ने इसे लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सोनिया गांधी के काफी करीबी माने जाने वाले अहमद पटेल से बातचीत की है. उन्होंने अशोक गहलोत के व्यवहार को लेकर शिकायत की थी. तब अहमद पटेल ने उनको आश्वासन दिया था कि अब सबकुछ ठीक हो जाएगा.
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