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राजस्थान: गौशालाओंं में दम तोड़ रहीं गायों को है गौरक्षकों का इंतजार

Bhawani Singh
Updated: July 27, 2018, 7:06 PM IST
राजस्थान: गौशालाओंं में दम तोड़ रहीं गायों को है गौरक्षकों का इंतजार
गौ तस्करी के आरोप में लोगों की हत्या

राजस्थान में गाय कितनी सुरक्षित हैं, कैसे उनकी सेवा हो रही है, इसकी हकीकत सामने लाने के लिए हम पहुंचे राजस्थान की कुछ चुनिंदा गौशालाओं में, जहां कई गाय रोजाना दम तोड़ रही हैं. कोई कीचड़ में फंसकर तो कोई भूख व इलाज नहीं मिलने से

  • Last Updated: July 27, 2018, 7:06 PM IST
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गायों की तस्करी के आरोप में गौरक्षकों ने रकबर खान की 21 जुलाई को पीट-पीट कर अलवर में हत्या कर दी गई. क्या हकीकत में गौरक्षक गायों की इतनी चिंता करते हैं, क्या राजस्थान में गायों की सुरक्षा को लेकर गौरक्षक दल इतने सक्रिय है कि गायों की हिफाजत किसी भी कीमत पर करना चाहते हैं. गौ तस्करी के आरोप में लोगों की हत्या के बाद ऐसे सवाल उठना तय है.

राजस्थान में गाय कितनी सुरक्षित हैं, कैसे उनकी सेवा हो रही है, इसकी हकीकत सामने लाने के लिए हम पहुंचे राजस्थान की कुछ चुनिंदा गौशालाओं में, जहां कई गाय रोजाना दम तोड़ रही हैं. कोई कीचड़ में फंसकर तो कोई भूख व इलाज नहीं मिलने से. इन गौशालाओं के सामने दम तोड़ चुकीं गाय हकीकत बयां कर रही हैं कि गौरक्षक कितने बड़े गौसेवक हैं.

इन गौशालाओं में गायों के बाड़े में पैर रखने की भी जगह नहीं. चिपक कर खड़ी इन गायों के बीच इतनी जगह भी नहीं है कि वो बैठ सकें. पैरों के नीचे जमें कीचड़ में अगर गाय बैठ गई तो उठना भी मुश्किल हो जाता है. कीचड़ में बैठी गाय को कई लोग मिलकर बाहर निकाल पाते हैं. यह नजारा कोटा की धर्मपुरा सरकारी गौशाला की. यहां पिछले एक सप्ताह से कीचड़ में धंसकर और भूख से रोजाना करीब आठ से दस गायें दम तोड़ रही हैं और अब तक करीब तीस गायों की मौत हो चुकी है. गौशाला में 2500 गायें हैं.

सीकर के गोडिवास गांव की श्रीकृष्ण गौशाला को शायद गोरक्षकों की सबसे ज्यादा जरूरत है. गौशाला के बाहर बड़ी तादाद मृत गायों का ढेर लगा हुआ है. जगह-जगह गौशाला में कीचड़ और बारिश के पानी से बने गड्ढे के कीचड़ में धंसकर या भूख से गायों की मौत रही है. यहां से गाय के शव तक नहीं उठाए जा रहे हैं.

जब गौशाला में लोगों से पूछा गया कि इतनी गायें क्यों मर रही है. उनके शव क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं, तो बताया गया कि शहरों से कमजोर गायें और बछड़े गौशाला में लाकर यहां छोड़ा जा रहा है इसलिए वे मर रही हैं. हैरानी की बात है कि गौशाला में गायों के बीमार होने पर उपचार के लिए पशु चिकित्सक तक नहीं है.

गौशाला में काम करने वाली महिला कर्मचारी का कहना है कि न तो यहां गायों को खिलाने के लिए कुछ है और न ही बीमार गायों के लिए डॉक्टर की व्यवस्था है. गौशाला के मैनेजर ने कहा कि बाजार से गायें लाकर यहां छोड़ी जा रही हैं. वहीं एक कर्मचारी ने यह भी बताया कि गाय प्लास्टिक खाकर मर रही हैं ऐसे में हम इनके इलाज के लिए क्या करें.

राजस्थान की ज्यादातर सरकारी गौशालाओं और कांजी हाउस का नजारा ऐसा ही है. जहां गाय बारिश में कीचड़ में फसंकर दम तोड़ रही हैं या फिर भूख से. इन्हें बचाने के लिए गौरक्षक कहीं नजर नहीं आ रहे हैं.  गौशालाओं में गायों के चारे-पानी के इंतजाम के लिए मिलने वाला सरकारी अनुदान भी करीब छह महीने से नहीं मिला. इससे गौशालाओं की हालत और बिगड़ गई और वे गायों की सुरक्षा के इतंजाम नहीं कर पा रहे हैं.
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राजस्थान सरकार ने शराब और स्टांप ड्यूटी पर 20 फीसदी सरचार्ज थोप कर गायों के चारे-पानी और सुरक्षा के लिए अनुदान मुहैया कराने का दावा किया गया था लेकिन गौशालाएं सरकार की मेहबारनी का इंतजार कर रही हैं.

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First published: July 27, 2018, 6:02 PM IST
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