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राजीव गांधी: जिनके कार्यकाल में BSNL और कंप्यूटर आया, पंचायती राज का बना प्रस्ताव

News18Hindi
Updated: May 21, 2020, 12:02 PM IST
राजीव गांधी: जिनके कार्यकाल में BSNL और कंप्यूटर आया, पंचायती राज का बना प्रस्ताव
राजीव गांधी (फाइल फोटो)

21 मई, 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती बम विस्फोट में राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की हत्या कर दी गयी थी.

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नई दिल्ली. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की 29वीं पुण्यतिथि पर राष्ट्र उन्हें नमन कर रहा है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये. इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर अपने पिता को याद किया. राहुल ने लिखा- 'एक सच्चे देशभक्त,उदार और परोपकारी पिता के पुत्र होने पर मुझे गर्व है.प्रधानमंत्री के रूप में राजीव जी ने देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर किया.अपनी दूरंदेशी से देश के सशक्तीकरण के लिए उन्होंने ज़रूरी कदम उठाए.आज उनकी पुण्यतिथि पर मैं स्नेह और कृतज्ञता से उन्हें सादर नमन करता हूँ.'

बता दें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश में पंचायती राज से जुड़ी संस्थाओं को शक्ति देने और उन्हें मजबूत  करने के लिए बड़े कदम उठाए. राजीव के निधन के एक साल बाद उनका यह सपना साकार हुआ और साल 1992 में संविधान के 73वें और 74वें संशोधन के माध्यम पंचायती राज व्यवस्था ने अपना पहला कदम रखा. उन्हीं के कार्यकाल में इस व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार हुआ था.

IT का इतिहास लिखेंगे तो आएगा पूर्व प्रधानमंत्री का नाम
जब भी आईटी का इतिहास लिखा जाएगा, तो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम लिया जाएगा.  राजीव में भारत को सूचना प्रौद्योगिकी, इंटरनेट की दुनिया से जोड़ने का जुनून था.  उन्होंने ही देश के आम जन तक कंप्यूटर पहुंचाने का फैसला किया जिसका असर आज के भारत में देखा जा सकता है. उन्होंने साइंस और टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए सरकारी बजट में इसका इंतजाम किया था.



राजीव गांधी के कार्यकाल में BSNL और MTNL समेत (C-DOT)  की स्थापना हुई जिससे दूरसंचार की दुनिया में भारत ने क्रांति के नये आयाम तय किये. राजीव गांधी ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के लिए एक नया दरवाजा खोला जिसका नाम है नवोदय विद्यालय. ये फैसला साल 1986 में शिक्षा नीति के तहत लिया गया था। आज लगभग देश के हर जिले में एक नवोदय विद्यालय है.



पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यकाल में ही  वोट देने की उम्र में बदलाव किया गया. वोट देने का अधिकार पहले 21 साल की उम्र में था. फिर राजीव गांधी ने इसे घटाकर 18 साल कर दिया.जिस समय यह फैसला लिया गया, उस समय 5 करोड़ नए युवाओं को वोट देने का अधिकार मिला.

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First published: May 21, 2020, 11:50 AM IST
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