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राजनाथ सिंह: कभी कल्याण सिंह ने कहा था, 'जिस सीट से आप दोबारा चुनाव लड़ेंगे, हार जाएंगे'

News18Hindi
Updated: May 30, 2019, 7:39 PM IST

बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह को 2019 की नई मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. 2014 की मोदी सरकार में राजनाथ सिंह देश के गृह मंत्री थे.

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बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह को 2019 की नई मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. 2014 की मोदी सरकार में राजनाथ सिंह देश के गृह मंत्री थे. 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने लखनऊ से ही दोबारा चुनाव लड़ा और बड़े अंतर से जीत हासिल की है.

राजनाथ सिंह बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. यूं तो उनके जीवन से जुड़े कई रोचक किस्से हैं. लेकिन एक किस्सा ऐसा भी है, जिसके बारे में शायद कम ही लोग जानते हैं. ये किस्सा किसी और ने नहीं, बल्कि 2019 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद कृष्णन ने ही सुनाया है.

मोद कृष्णन ने बताया, 'एक बार कल्याण सिंह मेरे आश्रम में आए थे. तब मैंने पूछा कि राजनाथ अगर गाजियाबाद से दोबारा चुनाव लड़ते, तो वहां से भी जीत जाते फिर लखनऊ से लड़ने की क्या जरूरत थी? तो उन्होंने बताया कि उनके ज्योतिषी ने कहा है कि जहां से वो दोबारा लड़ेंगे हार जाएंगे. इस बार लखनऊ से दोबारा लड़कर राजनाथ सिंह ये गलती कर रहे हैं.'


विद्यार्थी जीवन से ही आरएसएस से जुड़े

यूपी के एक किसान परिवार में पैदा हुए राजनाथ सिंह विद्यार्थी जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए थे. छात्र जीवन में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े रहे. इसके बाद उन्होंने एक डिग्री कॉलेज में पढ़ाने का काम भी शुरू किया. संघ, एबीवीपी, जनसंघ और भाजपा में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए वह मोदी सरकार में गृहमंत्री रहे. 2014 में उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने के दौरान ही भाजपा ने पहली बार केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई.

1969 में बने थे एबीवीपी के संगठन सचिव
राजनाथ सिंह 1969 में गोरखपुर में एबीवीपी से जुड़ गए. उन्होंने एबीवीपी के संगठन सचिव से राजनीतिक करियर की शुरुआत की. इसके बाद 1974 में वह जनसंघ की मिर्जापुर इकाई के सचिव बन गए. इसके बाद राजनाथ आपातकाल विरोधी जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में शामिल हुए और जेल गए.1977 में बने पहली बार विधायक
पहली बार 1977 में वह उत्तर प्रदेश से विधायक बने. 1977 में ही वह भाजपा के राज्य सचिव बने. 1986 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए. इसके बाद 1988 में उन्हें युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. 1988 में वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य चुने गए. कल्याण सिंह सरकार में वह शिक्षामंत्री बनाए गए.

1994 में राज्यसभा पहुंचे
उत्तर प्रदेश की सियासत में लंबी पारी खेलने के बाद राजनाथ सिंह पहली बार 1994 में राज्यसभा पहुंचे. ऊपरी सदन में उन्हें भाजपा का मुख्य सचेतक भी बनाया गया. 1997 में जब यूपी राजनीतिक संकट का सामना कर रहा था, एक बार फिर से उन्होंने राज्य पार्टी अध्यक्ष की बागडोर संभाली और इस पद पर 1999 तक रहे. इसके बाद केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार में भूतल परिवहन मंत्री बने.

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बने
राजनाथ सिंह 28 अक्टूबर 2000 को वह रामप्रकाश गुप्ता की जगह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. 2002 तक वह राज्य के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन तब तक राज्य में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी बढ़त बना चुकी थीं.

भाजपा ने बसपा प्रमुख मायावती को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के तौर पर समर्थन देने का फैसला किया, लेकिन राजनाथ सिंह ने इस कदम पर ऐतराज जाहिर किया था. इसके बाद एक बार फिर से वह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए.

 मृदुभाषी और बेलाग
किसान परिवार से आने वाले सिंह ने 2003 में वाजपेयी मंत्रिमंडल में कृषि मंत्री के तौर पर वापसी की. भाजपा में राजनाथ सिंह के आगे बढ़ने की यात्रा जारी रही. 31 दिसंबर 2005 को वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए. राजनीतिक हलकों में उन्हें काफी मृदुभाषी और बेलाग बोलने वालों में माना जाता है. इससे पहले भी वह इस भूमिका को अंजाम दे चुके हैं.

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First published: May 30, 2019, 1:22 PM IST
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