चीन सीमा के पास सेना के जवानों के साथ दशहरा मनाएंगे राजनाथ सिंह, करेंगे शस्त्र पूजा

राजनाथ सिंह के साथ इस दौरे पर सेना प्रमुख नरवणे भी मौजूद हैं. (फाइल फोटो)
राजनाथ सिंह के साथ इस दौरे पर सेना प्रमुख नरवणे भी मौजूद हैं. (फाइल फोटो)

Rajnath Singh Shastra Puja: दशहरा समारोह में राजनाथ सिंह सिक्किम के नाथुला दर्रे के पास शेरथांग में 'शस्त्र पूजा' भी करेंगे. यह जगह चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से महज 2 किलोमीटर दूर है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2020, 8:03 AM IST
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दार्जिलिंग. पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद (India-China Border issue) के बीच केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath singh) सिक्किम में भारतीय सेना (Indian Army) के साथ दशहरा मनाएंगे. दशहरा (Dussehra) समारोह में राजनाथ सिंह सिक्किम के नाथुला दर्रे के पास शेरथांग में 'शस्त्र पूजा' भी करेंगे. यह जगह चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से महज 2 किलोमीटर दूर है. राजनाथ सिंह दो दिन के सिक्किम और पश्चिम बंगाल दौरे पर हैं. राजनाथ सिंह ने शनिवार को दार्जिलिंग के सुकना स्थित 33वीं कॉर्प्स मुख्यालय पर भारतीय सेना के जवानों से मुलाकात की और तैयारियों की समीक्षा की. इस दौरान राजनाथ सिंह ने जवानों का मनोबल बढ़ाने केलिए उन्हें संबोधित भी किया.

दार्जिलिंग में 33वीं कॉर्प्स के जवानों को संबोधित करते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने हमेशा अपने सभी पड़ोसियों के साथ अच्छा संबंध चाहा. उन्होंने कहा कि भारत की तरफ से हमेशा इसको लेकर प्रयास किए गए लेकिन भारतीय जवानों ने सीमाओं, अखंडता और सार्वभौमिकता की रक्षा की खातिर समय-समय पर कुर्बानी दी.

राजनाथ सिंह के साथ सेना प्रमुख भी हैं मौजूद
राजनाथ सिंह के साथ इस दौरे पर सेना प्रमुख नरवणे भी मौजूद हैं. अधिकारियों ने बताया कि 33वीं कोर के शीर्ष कमांडरों ने सिक्किम सेक्टर में एलएसी के पास स्थिति के साथ-साथ सैनिकों और हथियारों की तैनाती के बारे में भी रक्षा मंत्री और जनरल नरवणे को विस्तृत जानकारी दी. सेना के जवानों के एक समूह के साथ बातचीत में, रक्षा मंत्री ने विजयदशमी के अवसर पर उन्हें अपनी शुभकामनाएं दी और देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए उनके समर्पण की सराहना की.
इस दौरान रक्षा मंत्री ने त्रिशक्ति वाहिनी के समृद्ध इतिहास के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा, त्रिशक्ति कोर का एक महान स्वर्णिम इतिहास है. विशेष रूप से 1962, 1967, 1971 और 1975 में, इस कोर ने वीरता के उदाहरणों का प्रदर्शन किया. यह उत्कृष्ट रही है.





गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच लगभग पांच महीने से सीमा पर गतिरोध चल रहा है जिससे उसके संबंधों में तनाव आया है. दोनों पक्षों ने गतिरोध को दूर करने के लिए राजनयिक और सैन्य स्तर पर कई दौर की वार्ता की है. हालांकि, गतिरोध को समाप्त करने में कोई सफलता नहीं मिली है.
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