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विजयदशमी पर भारत को मिलने वाला राफेल विमान है बेहद खास, हुए हैं ये 6 बदलाव

News18Hindi
Updated: October 8, 2019, 11:58 AM IST

आज विजया दशमी (दशहरा) के दिन राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) फ्रांसीसी पोर्ट बोर्डेक्स पर राफेल विमान (Rafale Jet) की शस्त्र पूजा करेंगे. इसके बाद इस विमान में उड़ान भरेंगे. वायुसेना को राफेल विमान तो आज मिल जाएगा, लेकिन ये विमान भारत में मई 2020 तक पहुंचेगा. इस दौरान भारतीय वायुसेना के जवान वहां पर ट्रेनिंग में हिस्सा लेंगे.

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  • Last Updated: October 8, 2019, 11:58 AM IST
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नई दिल्ली. तमाम विवादों के बाद भारत को आज दशहरे के दिन फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान (Rafale Fighter Jet) मिलने जा रहा है. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) 8 अक्टूबर को एक आधिकारिक कार्यक्रम में फ्रांस से राफेल विमान रिसीव करेंगे. पहली किस्त के तहत भारत को फ्रांस से चार राफेल विमान मिल रहे हैं. वायुसेना को राफेल विमान तो आज मिल जाएगा, लेकिन ये विमान भारत में मई 2020 तक पहुंचेगा. इस दौरान भारतीय वायुसेना के जवान वहां पर ट्रेनिंग में हिस्सा लेंगे. इस पूरे सौदे में भारत को कुल 36 राफेल लड़ाकू विमान मिलेंगे.

अधिकारियों के मुताबिक, आज विजया दशमी (दशहरा) के दिन राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) फ्रांसीसी पोर्ट बोर्डेक्स पर राफेल विमान (Rafale Jet) की शस्त्र पूजा करेंगे. इसके बाद इस विमान में उड़ान भरेंगे. बता दें कि दशहरा के दिन देश के विभिन्न हिस्सों में शस्त्र पूजा की जाती है. राजनाथ सिंह कई साल से विजय दशमी के दिन शस्त्र पूजा करते आ रहे हैं.

राफेल विमान क्या है?
राफेल एक फ्रांसीसी कंपनी डैसॉल्ट एविएशन निर्मित दो इंजन वाला मध्यम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) है. राफेल लड़ाकू विमानों को 'ओमनिरोल' विमानों के रूप में रखा गया है, जो कि युद्ध में अहम रोल निभाने में सक्षम हैं. ये बखूबी ये सारे काम कर सकती है- वायु वर्चस्व, हवाई हमला, जमीनी समर्थन, भारी हमला और परमाणु प्रतिरोध.

भारत को मिलने वाले राफेल में हैं ये बदलाव
भारत को मिलने वाले राफेल लड़ाकू विमानों में कुछ खास बदलाव किए गए हैं:-

>>भारत के लिए राफेल विमानों में इजरायल के हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले लगवाए गए हैं.
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>>इनमें रेडार वॉर्निंग रिसीवर्स भी लगे हैं.

>>फ्लाइट का डेटा मेंटन करने के लिए राफेल में डेटा रिकॉर्डिंग सिस्टम भी लगाए गए हैं, जिससे 10 घंटे का डेटा रिकॉर्ड हो सकता है.

>>इसके अलावा, भारत को मिलने वाले राफेल जेट में लो बैंड के जैमर्स लगाए गए हैं.

>>वहीं, इसके ट्रैकिंग सिस्टम और इंफ्रा रेड सर्च को भी मोडिफाई किया गया है.

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अक्टूबर 2022 तक भारत को कुल 36 विमान मिलने हैं.


क्या है राफेल विमान की खासियतें?
>>राफेल विमान एक मिनट में 60 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है. इसकी ईंधन क्षमता करीब 17 हजार किलोग्राम है.
>>राफेल की मारक क्षमता 3700 किलोमीटर तक है. स्काल्प की रेंज 300 किलोमीटर है.
>>राफेल विमान एक बार में 24,500 किलो तक का वजन ले जा सकता है.
>> ये विमान 60 घंटे की अतिरिक्त उड़ान भी भर सकता है.
>>राफेल लड़ाकू विमानों की गति 2,223 किलोमीटर प्रति घंटा है.
>>राफेल विमान 300 किलोमीटर की रेंज से हवा से जमीन पर हमला करने में सक्षम है.
>>राफेल विमान 14 हार्ड पॉइंट के जरिए भारी हथियार भी गिराने की क्षमता रखता है.
>>राफेल लड़ाकू विमान हर तरह के मौसम में एक साथ कई काम करने में सक्षम है. इसे मल्टिरोल फाइटर एयरक्राफ्ट के नाम से भी जाना जाता है.
>>मल्टी टास्कर होने की वजह से राफेल एक ऐसा विमान है, जिसे किसी भी तरह के मिशन पर भेजा जा सकता है. भारतीय वायुसेना को इसकी काफी वक्त से जरूरत थी.
>>यह ऐंटी शिप अटैक से लेकर परमाणु अटैक, क्लोज एयर सपॉर्ट और लेजर डायरेक्ट लॉन्ग रेंज मिसाइल अटैक में भी अव्वल है।

भारत ने राफेल को क्यों चुना है?
राफेल भारत का एकमात्र विकल्प नहीं था. कई अंतरराष्ट्रीय विमान निर्माताओं ने भारतीय वायुसेना से पेशकश की थी. बाद में छह बड़ी विमान कंपनियों को छांटा गया. इसमें लॉकहेड मार्टिन का एफ -16, बोइंग एफ / ए -18 एस, यूरोफाइटर टाइफून, रूस का मिग -35, स्वीडन की साब की ग्रिपेन और रफाले शामिल थे.

सभी विमानों के परीक्षण और उनकी कीमत के आधार पर भारतीय वायुसेना ने यूरोफाइटर और राफेल को शॉर्टलिस्ट किया. डलास ने 126 लड़ाकू विमानों को उपलब्ध कराने के लिए अनुबंध हासिल किया, क्योंकि ये सबसे सस्ता मिल रहा था. कहा गया कि इसका रखरखाव भी आसान है.

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राजनाथ सिंह ने हाल ही में तेजस विमान में उड़ान भरी थी.


भारत और फ्रांस दोनों के लिए सौदा कितना अहम?
फिलहाल फ्रांस, मिस्र और कतर राफेल जेट विमानों का उपयोग कर रहे हैं. हालांकि डेसॉल्ट कंपनी की माली हालत ठीक नहीं है. कंपनी को उम्मीद थी कि भारत से सौदे के बाद कंपनी अपने राजस्व लक्ष्यों को पूरा कर पाएगी. भारत ने रूस के मिग की बजाय डेसाल्ट को चुना. भारत ने अमेरिका के लॉकहीड को भी नजरअंदाज कर दिया था.

कितने राफेल खरीद रहे हैं और लागत क्या है?
इस सौदे की शुरुआत 10.2 अरब डॉलर (5,4000 करोड़ रुपये) से होनी अपेक्षित थी. 126 विमानों में 18 विमानों को तुरंत लेने और बाकि की तकनीक भारत को सौंपे जाने की बात थी. लेकिन बाद में इस सौदे में अड़चन आ गई.

पूरी डिलिवरी कब तक होगी?
2016 में भारत और फ्रांस के बीच हुए सौदे के अनुसार, अक्टूबर 2022 तक कुल 36 विमान मिलने हैं. वायुसेना इन विमानों को अंबाला एयरबेस पर तैनात करने की योजना बना रही है, ताकि पाकिस्तान की ओर से किसी भी खतरे से निपटा जा सके

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First published: October 8, 2019, 8:01 AM IST
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