राज्यसभा स्थगित होने के साथ ही रद्द हुए तीन तलाक और सिटिजनशिप बिल, अब आगे क्या ?

लोकसभा की प्रक्रिया के अनुसार लोकसभा में पेश किया गया कोई भी बिल अगर किसी भी सदन में लंबित है तो वह सरकार के कार्यकाल के साथ ही समाप्त हो जाता है.

Ankit Francis | News18Hindi
Updated: February 13, 2019, 2:08 PM IST
राज्यसभा स्थगित होने के साथ ही रद्द हुए तीन तलाक और सिटिजनशिप बिल, अब आगे क्या ?
पीएम नरेंद्र मोदी (File Photo)
Ankit Francis | News18Hindi
Updated: February 13, 2019, 2:08 PM IST
मोदी सरकार के लिए राज्यसभा का आखिरी सत्र समाप्त हो गया है. इसके साथ ही लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र महत्वपूर्ण माने जा रहे ट्रिपल तलाक़ और सिटिजनशिप बिल-2016 भी रद्द हो गए हैं. ये दोनों ही बिल लोकसभा में पास हो चुके थे लेकिन 13 जनवरी को सत्र के आखिरी दिन भी इन्हें राज्यसभा में पेश नहीं किया गया. हालांकि राफेल मुद्दे पर राज्यसभा में आज कैग रिपोर्ट पेश हो गई है. सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार की राफेल डील यूपीए सरकार में प्रस्तावित डील से सस्ती है. सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक राफेल डील यूपीए से 2.86 फीसदी सस्ते में हुई है. कैग रिपोर्ट में कहा गया है, 'साल 2016 में मोदी सरकार की तरफ से साइन की गई राफेल फाइटर जेट डील 2007 में यूपीए सरकार की तरफ से प्रस्तावित डील की तुलना में 2.86 प्रतिशत सस्ती है.'

क्यों हुए रद्द ?
लोकसभा की प्रक्रिया के अनुसार लोकसभा में पेश किया गया कोई भी बिल अगर किसी भी सदन में लंबित है तो वह सरकार के कार्यकाल के साथ ही समाप्त हो जाता है. अगर कोई बिल राज्यसभा में पेश हुआ है और पास भी हुआ है लेकिन लोकसभा में लंबित है तो वो भी रद्द हो जाता है. अब अगर ट्रिपल तलाक़ और सिटिजनशिप बिल को लेकर नया कानून बनाना है तो अगली सरकार के आने के बाद इन्हें दोबारा लोकसभा और राज्यसभा में पास कराना होगा.

क्या रास्ता बचा है ?

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट विवेक तनखा के मुताबिक ये दोनों ही बिल रद्द हो चुके हैं और ट्रिपल तलाक के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग ही अब आखिरी दिशा-निर्देश हैं. तनखा ने आगे कहा कि सरकार के पास दूसरा रास्ता ऑर्डिनेंस लाकर कानून बनाने का होता है लेकिन लोकसभा चुनावों को देखते हुए उसे ये साबित करना होगा कि ये बिल देश के लिए बेहद ज़रूरी हैं और इमरजेंसी के हालत हैं. हालांकि जल्दी ही आचार संहिता लागू हो जाएगी और इसकी संभावना न के बराबर है.

बड़े पैमाने पर हो रहा था विरोध
बता दें कि नागरिकता विधेयक का नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा था. इस विधेयक पर चर्चा के लिए तीन घंटे आवंटित किए गए थे लेकिन इसे पेश ही नहीं किया जा सका. सरकार को तीन तलाक मुद्दे पर विपक्षी दलों के उग्र प्रतिरोध का सामना करना पड़ा रहा है. हालांकि पीएम नरेंद्र मोदी इन दोनों बिलों को लेकर काफी गंभीर थे और उन्होंने पहले ही साफ़ कर दिया था कि वो राज्यसभा में इन्हें पास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
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क्या है सिटीजनशिप बिल-2016
नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 के माध्यम से सरकार अवैध घुसपैठियों की परिभाषा की फिर से व्याख्या करना चाहती है. इसके जरिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. हालांकि इस विधेयक में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न का शिकार मुस्लिम अल्पसंख्यकों (शिया और अहमदिया) को नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है. इसके आलावा, इस विधेयक में 11 साल तक लगातार भारत में रहने की शर्त को कम करते हुए 6 साल करने का भी प्रावधान है. इसके उलट नागरिकता अधिनियम, 1955 के मुताबिक वैध पासपोर्ट के बिना या फर्जी दस्तावेज के जरिए भारत में घुसने वाले लोग अवैध घुसपैठिए की श्रेणी में आते हैं.

क्यों हो रहा था विरोध
गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता देने की बात करता है जबकि NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) इसके ठीक उलट काम को अंजाम दे रहा है. NRC के तहत 24, मार्च 1971 से भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी धर्म के लोगों को सामने लाकर उन्हें वापस उनके देश भेजना है. अब नागरिकता संशोधन विधेयक पास होता है तो मुसलमानों को छोड़ दें तो किसी और धर्म के लिए NRC का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा. इसके बाद देशों से भारत में रह रहे सभी गैर-मुस्लिम नागरिकता के लिए योग्य हो जाएंगे और उन्हें वापस नहीं भेजा जा सकेगा.

पूर्वोत्तर में एनडीए के सहयोगी इस विधेयक का विरोध इस लिए कर रहे हैं क्योंकि वे इसे अपनी सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषाई पहचान के साथ खिलवाड़ समझते हैं. जिसके लिए ये दल निरंतर संघर्ष करते आए हैं. इन दलों की दूसरी बड़ी चिंता यह भी है कि नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 लागू होने से NRC के तहत चिन्हित अवैध शरणार्थी या घुसपैठिओ संबंधी अपडेट कोई मायने नहीं रखेंगे. तीसरा बड़ा मुद्दा यहा है कि यह विधेयक धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करने की बात करता है. जबकि NRC में एक निश्चित समय सीमा के बाद से भारत में अवैध तौर पर रह रहे सभी अवैध घुसपैठियों की पहचान कर वापस भेजने की बात है.

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