राज्यसभा के उप-सभापति चुनाव में नंबरों का गणित

राज्यसभा के उप-सभापति चुनाव में नंबरों का गणित
एनडीए से जुड़े सूत्रों की मानें तो बीजेपी सबको सरप्राइज कर सकती है.

हालांकि अधिकांश विशेषज्ञों का बहुत पहले मानना था कि राज्यसभा में अधिक संख्या होने की वजह से विपक्ष इस चुनाव को जीत सकता है, लेकिन एनडीए से जुड़े सूत्रों की मानें तो बीजेपी सबको सरप्राइज कर सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 9, 2018, 8:16 AM IST
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राज्यसभा के उप-सभापति के लिए 9 अगस्त को चुनाव होना है और इस वक्त कोई भी यह दावा करने में असमर्थ है कि कांग्रेस+ अथवा एनडीए+ में से कौन जीत दर्ज करेगा. हालांकि अधिकांश विशेषज्ञों का बहुत पहले मानना था कि राज्यसभा में अधिक संख्या होने की वजह से विपक्ष इस चुनाव को जीत सकता है, लेकिन एनडीए से जुड़े सूत्रों की मानें तो बीजेपी सबको सरप्राइज कर सकती है.

चुनाव की तारीख के औपचारिक ऐलान के बाद नीतीश कुमार के करीबी जेडीयू नेता हरिवंश का नाम उछाला जाने लगा. हरिवंश पूर्व पत्रकार हैं और बिहार और झारखण्ड के प्रमुख अखबार प्रभात खबर के एडिटर रह चुके हैं.

केरल के कांग्रेस नेता पीजे कुरियन के रिटायर होने के बाद खाली हुई राज्य सभा उप-सभापति की सीट पर हरिवंश के नामांकन से बीजेपी के कम से कम दो उद्देश्य पूरे हो जाएंगे. पहला जेडी(यू) उम्मीदवार कुछ बड़े क्षेत्रीय दलों जैसे कि बीजेडी और एआईएडीएमके जिन्होंने कि अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं के सामने अधिक स्वीकार्य हो सकता है. इसके साथ ही यह बीजेपी-जेडी(यू) गठबंधन के बीच विश्वास बढ़ाने वाला साबित होगा.



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यह चुनाव विपक्ष के लिए भी आत्मविश्वास बढ़ाने वाला होगा. विपक्ष इस मंच को अपने मतभेदों को खत्म करके एकसाथ आने के लिए उपयोग में ला सकता है. और इस प्रसंग में यह पिछले महीने बीजेपी की पूर्व सहयोगी पार्टी टीडीपी द्वारा संसद में लाए गए सांकेतिक अविश्वास प्रस्ताव का अनुकरण करेगा.

राज्यसभा में बीजेपी एवं उसके सहयोगियों और विपक्ष की स्थिति क्या है यह समझने के लिए एक नजर नंबर पर डालते हैं. राज्य सभा 245 सदस्यों वाला सदन है. इस वक्त एक सीट रिक्त है. कुल सीटों का आधा 122 होता है.

राज्य सभा में इस वक्त एनडीए के 90 सांसद हैं. यानी आधे से 32 कम- बीजेपी (73), बोडोलेण्ड पीपल्स फ्रंट (1), जेडी(यू) 6,  नामांकित (4), नागा पीपल्स फ्रंट (1), रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) (1), शिरोमणी अकाली दल (3) और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (1).

राज्यसभा में संयुक्त विपक्ष के 112 सांसद हैं, यानी जीत के लिए जरीरी सिटों से से 10 सीटें कम- आम आदमी पार्टी (3), तृणमूल कांग्रेस (13), बहुजन समाज पार्टी (4), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (2), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (एम) (5), द्रविड मुनेत्र कजगम (4), कांग्रेस (50), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (1), जेडी(एस) (1), केरल कांग्रेस (एम) (1), नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (4), राष्ट्रीय जनता दल (5), समाजवादी पार्टी (13), तेलगु देशम पार्टी (6).



राज्यसभा में 42 सांसद ऐसे हैं जो दोनों खेमों में नहीं है. ये पार्टिया हैं- ऑल इंडिया द्रविड मुनेत्र कजगम (13), बीजू जनता दल (9), इंडियन नेशनल लोक दल (1), पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (2), शिवसेना (3), तेलंगाना राष्ट्रीय समीति (6), युवाजन श्रमिक रैतु कांग्रेस पार्टी (2) और निर्दलीय (6). ये किसी भी तरफ वोट कर सकते हैं.

अपनी पसंद के उम्मीदवार को जिताने के लिए बीजेपी के लिए एआईएडीएमके और बीजेडी का समर्थन महत्वपूर्ण है. एआईएडीएमके ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन इस बात की काफी संभावना है कि वह जेडी(यू) उम्मीदवार को वोट डाल सकती है.

बीजेडी ने जैसे कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान किसी का भी पक्ष नहीं लिया था वह ऐसा ही उप-सभापति के चुनाव के दौरान भी कर सकती है.

लेकिन अगर बीजेपी इन दो पार्टियों के साथ आधे निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन हासिल करने में कामयाब हो जाती है तो वह जरूरी वोटों में महज चार वोट कम पर रहेगी. यहां महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना उसकी मदद कर सकती है, जिसने बार-बार अपना एंटी-बीजेपी स्टेंड साफ किया है. टीआरएस के 6 सांसद भी बीजेपी को जिताने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं.

वहीं कांग्रेस+ टीआरएस, आईएनएलडी और तीन स्वतंत्र उम्मीदवारों की मदद से अपने उम्मीदवार को जिता सकती है. हालांकि वह बीजेडी को भी लुभाने की कोशिश करेंगे अगर बीजेपी का साथ मिल गया तो उसे अन्य दलों के सहयोग की जरूरत नहीं होगी.

यह इस बात पर निर्भर करता है कि विपक्ष का उम्मीदवार कौन होगा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले कई दशकों से उप-सभापति की कुर्सी रखने वाली कांग्रेस इस पद को किसी गैर-कांग्रेसी को देने के लिए सहमत हो गई है.

चुनाव काफी कांटेदार होने की संभावना है जहां किसी भी पक्ष के लिए जीत का मार्जिन महत्वपूर्ण नहीं होगा.
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