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राज्यसभा में पूर्व विदेश मंत्री, सुषमा स्वराज को दी गई श्रद्धांजलि

राज्यसभा में पूर्व विदेश मंत्री, सुषमा स्वराज को दी गई श्रद्धांजलि

राज्यसभा में सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि दी गई

राज्यसभा में सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि दी गई

राज्यसभा में बुधवार को पूर्व विदेश मंत्री एवं उच्च सदन की पूर्व सदस्य सुषमा स्वराज के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी.

    राज्यसभा में बुधवार को पूर्व विदेश मंत्री एवं उच्च सदन की पूर्व सदस्य सुषमा स्वराज के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी और उनके द्वारा किये गये कार्यों को याद किया गया. इस दुखद समय में सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि सुषमा उन्हें हर साल राखी बांधने आती थीं किंतु इस बार वह रक्षाबंधन पर नहीं आ पाएंगी जिसका उन्हें अफसोस है.

    राज्यसभा की  बैठक शुरू होते ही सभापति नायडू ने सदन को स्वराज के निधन की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘नियति ने उन्हें हमारे बीच से उठा लिया.’’ नायडू ने बताया की वह तीन बार अप्रैल 1990 से अप्रैल 1996, अप्रैल 2000 से अप्रैल 2006 और उसके बाद अप्रैल 2006 से मई 2009 तक राज्यसभा की सदस्य रहीं. साथ ही वह चार बार लोकसभा की सदस्य भी रहीं.

    उन्होंने कहा कि सुषमा स्वराज 1977 में हरियाणा विधानसभा की सदस्य चुनी गयी थीं. बाद में वह केन्द्र में विदेश मंत्री, सूचना प्रसारण मंत्री और स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री रहीं. उनका राजनीतिक करियर हमेशा बेदाग रहा उसके बाद उन्होंने खुद को राजनीतिक जीवन से अलग कर लिया जिसकी सभी वर्गों ने सराहना की थी.

    नायडू ने कहा कि विदेश मंत्री के रूप में सुषमा ने विश्व के विभिन्न हिस्सों में संकट में फंसे भारतीयों को निकालने में सराहनीय भूमिका निभायी है. 25 वर्ष की उम्र में हरियाणा सरकार की पहली महिला कैबिनेट मंत्री बनीं. वह लोकसभा में पहली महिला प्रतिपक्ष बनीं. सुषमा पहली ऐसी महिला थीं जिन्हें असाधारण सांसद का खिताब मिला था. उन्हें वह 1998 में दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का भी गौरव प्राप्त है. वह नरेन्द्र मोदी सरकार में पहली बार देश की पूर्णकालिक महिला विदेश मंत्री बनीं.

    नायडू ने कहा कि उनका अंतिम सार्वजनिक संदेश था, ‘‘मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी.’’ यह संदेश जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 की अधिकतर धाराएं समाप्त करने के संदर्भ में था. इस संदेश से देश की एकता और संविधान के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता के बारे में पता चलता है.

    सुषमा का जन्म अंबाला में हुआ था. वह हिन्दी एवं अंग्रेजी की असाधारण वक्ता थीं जो श्रोताओं पर गहरा प्रभाव छोड़ती थीं. नायडू ने कहा कि वह ‘‘मेरी छोटी बहन’’ के समान थीं और उन्हें हमेशा  ‘‘अन्ना’’ कहकर बुलाती थीं. वह हर रक्षाबंधन पर उन्हें राखी बांधती थीं. नायडू ने कहा कि उपराष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने कहा था कि ‘‘इस बार आप मेरे घर पर राखी बंधवाने नहीं आइयेगा, क्योंकि यह ठीक नहीं होगा, मैं आपके घर राखी बांधने आऊंगी.’’

    नायडू ने कहा कि वह इस वर्ष रक्षाबंधन पर उनकी कमी बहुत महसूस होगी. विभिन्न भूमिकाओं में उल्लेखनीय योगदान के कारण सुषमा स्वराज हमारे लिए हमेशा प्रेरणा की स्रोत रहेंगी. अंत में सदस्यों ने सुषमा स्वराज के सम्मान में कुछ क्षणों का मौन धारण किया.

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    Tags: M Venkaiya Naidu, Rajya sabha, Sushma swaraj, Sushma swaraj death

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