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दिल्ली में LG को पावर वाला बिल राज्यसभा से भी पास, केजरीवाल ने बताया दुखद दिन

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2021 राज्यसभा में पारित

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2021 राज्यसभा में पारित

लोकसभा में यह विधेयक 22 मार्च को पारित हो गया था. विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों के अनुसार, इस विधेयक में दिल्ली विधानसभा में पारित विधान के परिप्रेक्ष्य में ‘सरकार’ का आशय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के उपराज्यपाल से होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 11:05 PM IST
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नई दिल्ली. राज्यसभा (Rajyasabha) में बुधवार को दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2021 (Government of National Capital Territory of Delhi (Amendment) Bill, 2021) बहुमत से पारित हो गया. इसमें दिल्ली के उपराज्यपाल की कुछ भूमिका और अधिकारों को परिभाषित करने का प्रस्ताव किया गया है. लोकसभा में यह विधेयक 22 मार्च को पारित हो गया था. राज्यसभा में ये विधेयक बुधवार को पेश किया गया. इसके विरोध में विपक्षी दलों से सदन से वॉकआउट कर दिया. इस विधेयक का विरोध करते हुए बीजेडी के सांसद प्रसन्न आचार्य ने कहा कि मेरी पार्टी ने यह तय किया है कि वह इस बिल को पास कराने वाली पार्टी नहीं बनेगी. यह प्रशासन और चुनी हुई सरकार की शक्तियों को कम करता है. सदन की गरिमा को नीचा न करते हुए हम शांतिपूर्वक सदन से वॉकआउट करना चाहते हैं.

केजरीवाल, सिसोदिया ने बताया दुखद दिन

विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए दुखद दिन बताया. केजरीवाल ने लिखा, "राज्यसभा में जीएनसीटीडी बिल पास हो गया. ये भारतीय लोकतंत्र के लिए दुखद दिन है. हम लोगों को सत्ता वापस दिलाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे. जो भी बाधाएं आएं, हम अच्छा काम करते रहेंगे. काम न तो रुकेगा और न ही धीमा होगा." दिल्ली के मुख्यमंत्री के अलावा उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट किया, उन्होंने लिखा, "आज का दिन लोकतंत्र के लिए काला दिन है. दिल्ली की जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के अधिकारों को छीनकर एलजी के हाथ में सौंप दिया गया. विडंबना देखिए कि लोकतंत्र की हत्या के लिए संसद को चुना गया, जो हमारे लोकतंत्र का मंदिर है. दिल्ली की जनता इस तानाशाही के खिलाफ लड़ेगी."



विपक्ष का वॉकआउट
इससे पहले वाईएसआरसीपी ने भी राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया. वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद विशंभर प्रसाद निशाद ने कहा हम चाहते हैं कि इस बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए. यह लोकतंत्र और संविधान विरोधी बिल है. हम इसका विरोध कर सदन से वॉकआउट करते हैं. वहीं केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि हम कांग्रेस द्वारा 1991 में लाए गए विधेयक में संशोधन कर रहे हैं. यह नए नहीं हैं. दिल्ली सरकार सुचारू रूप से चल सके इसलिए हम ये बदलाव कर रहे हैं.

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आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि मैं दिल्ली के 2 करोड़ लोगों के लिए, 130 करोड़ भारतीयों के लिए, संविधान को बचाने के लिए सभी सदस्यों से न्याय मांगता हूं। मैं सभी सदस्यों से कहता हूं - हम यहां केवल तभी होंगे जब संविधान होगा. वहीं विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने भी बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग उठाई थी.

क्या हुए हैं बदलाव
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों के अनुसार, इस विधेयक में दिल्ली विधानसभा में पारित विधान के परिप्रेक्ष्य में ‘सरकार’ का आशय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के उपराज्यपाल से होगा. इसमें दिल्ली की स्थिति संघराज्य क्षेत्र की होगी जिससे विधायी उपबंधों के निर्वाचन में अस्पष्टताओं पर ध्यान दिया जा सके. इस संबंध में धारा 21 में एक उपधारा जोड़ी जाएगी.

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इसमें कहा गया है कि विधेयक में यह भी सुनिश्चित करने का प्रस्ताव किया गया है कि उपराज्यपाल को आवश्यक रूप से संविधान के अनुचछेद 239क के खंड 4 के अधीन सौंपी गई शक्ति का उपयोग करने का अवसर मामलों में चयनित प्रवर्ग में दिया जा सके.

विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि उक्त विधेयक विधान मंडल और कार्यपालिका के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों का संवर्द्धन करेगा तथा निर्वाचित सरकार एवं राज्यपालों के उत्तरदायित्वों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के शासन की संवैधानिक योजना के अनुरूप परिभाषित करेगा.
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