राष्ट्रपति ने राकेश सिन्हा, सोनल मानसिंह सहित इन चार को किया राज्यसभा के लिए मनोनीत

क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, फिल्म अभिनेत्री रेखा, सामाजिक कार्यकर्ता अनु आगा और के पारासन का कार्यकाल समाप्त होने से राज्‍यसभा की चार सीटें खाली हुई थीं.

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Updated: July 14, 2018, 3:56 PM IST
राष्ट्रपति ने राकेश सिन्हा, सोनल मानसिंह सहित इन चार को किया राज्यसभा के लिए मनोनीत
राकेश सिन्हा (फाइल)
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Updated: July 14, 2018, 3:56 PM IST
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्‍यसभा के चार मनोनीत सदस्‍यों के नाम का ऐलान कर दिया है. इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विचारक, लेखक और स्तंभकार राकेश सिन्हा और मशहूर क्लासिकल डांसर सोनल मानसिंह के अलावा किसान नेता राम सकल और प्रसिद्ध मूर्तिकार रघुनाथ महापात्रा शामिल हैं.

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बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति को राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार दिया गया है. ये सदस्य कला, विज्ञान, सामाजिक कार्य और खेल आदि से जुड़े होने चाहिए. इसी अधिकार के तहत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चार हस्तियों को संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है.

दरअसल क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, फिल्म अभिनेत्री रेखा, सामाजिक कार्यकर्ता अनु आगा और के पारासन का कार्यकाल समाप्त होने से राज्‍यसभा की चार सीटें खाली हुई थीं. राज्‍यसभा के मॉनसून सत्र से पहले राज्‍यसभा से खाली हुईं इन चार सीटों के लिए खेल, कला और सामाजिक वर्ग से कई नामों की चर्चा तेज थी. इसमें क्रिकेटर कपिल देव, एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित, नेताजी सुभाष चंद्र बोस  के परिवार से चंद्र कुमार बोस आदि के नामों की चर्चा हो रही थी.

हालांकि इन तमाम अटकलों को दरकिनार करते हुए किसान नेता राम शकल, लेखक और स्तंभकार राकेश सिन्हा, मूर्तिकार रघुनाथ महापात्रा और शास्त्रीय नृत्यांगना सोनल मानसिंह को राष्‍ट्रपति ने राज्‍यसभा के लिए मनोनीत किया है.

चारों हस्तियां चार अलग-अलग राज्यों से हैं और ये अपने-अपने क्षेत्र में काफी मशहूर हैं. राम शकल उत्तर प्रदेश से आते हैं. इन्होंने दलित समुदाय के लिए काफी काम किया है. वहीं संघ विचारक माने जाने वाले राकेश सिन्हा दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं. वह टीवी चैनलों पर बीजेपी और संघ का पक्ष रखते दिखते हैं. वहीं सोनल मानसिंह मशहूर डांसर हैं, जबकि ओडिशा से ताल्लुक रखने वाले रघुनाथ महापात्रा ने जगन्नाथ मंदिर से संबंधित महत्वपूर्ण काम किए हैं.

कौन हैं ये हस्तियां:-
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राम शकल: राम शकल उत्तर प्रदेश के जाने-माने किसान नेता और जन प्रतिनिधि हैं. इन्होंने अपना पूरा जीवन दलित समुदाय के उत्थान और भलाई के लिए समर्पित कर रखा है. राम शकल को खासतौर पर किसानों, मजदूरों और प्रवासियों के लिए किए गए कार्यों के लिए जाना जाता है. इस क्षेत्र में वह चार दशकों से तहसील, जिला और राज्य स्तर पर काम कर रहे हैं. इसके पहले वह यूपी के रॉबर्ट्सगंज से तीन बार सांसद भी रह चुके हैं. श्रमिक और कल्याण, ऊर्जा, कृषि, पेट्रोलियम और नैचुरल गैस से संबंधित संसद की समितियों के सदस्य भी रहे हैं.

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राकेश सिन्हा: ये दिल्ली यूनिवर्सिटी के मोतीलाल नेहरू सांध्य कॉलेज में प्रोफेसर हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) विचारक के तौर पर जाने जाते हैं. राकेश सिन्हा लेखक और स्तंभकार के रूप में भी लोकप्रिय हैं. वह दिल्ली बेस्ड थिंक-टैंक 'इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन' के फाउंडर भी हैं. मौजूदा वक्त में राकेश सिन्हा इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च के मेंबर हैं. वह पहले हिंदी सलाहकार समिति और फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलेट ट्राइब्यूनल के सदस्य भी रहे हैं. राकेश सिन्हा विभिन्न अखबारों के लिए वह कॉलम भी लिखते हैं और टीवी चैनलों पर बीजेपी और संघ का पक्ष रखते हैं.

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सोनल मानसिंह: ओडिसी डांस के प्रमुख प्रदर्शकों में से एक सोनल मानसिंह प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक, शोधकर्ता, वक्ता, कोरियोग्राफर और शिक्षिका हैं. सोनल मानसिंह ओडिसी के अलावा, भरतनाट्यम में भी माहिर हैं. उन्होंने कई भारतीय पौराणिक कथाओं के माध्यम से कई नृत्य कलाएं बनाई हैं. सोनल मानसिंह को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है. इनको 1992 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया और वह सबसे कम उम्र में पद्म भूषण पाने वाली महिला हैं.

क्लासिकल डांस की अनोखी साधक हैं सोनल मानसिंह

रघुनाथ महापात्रा: वास्तु और शिल्प के क्षेत्र में रघुनाथ महापात्रा बहुत बड़ा नाम हैं. पत्थरों को आकार देने की उनकी खूबी के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन्हें शिल्प गुरु कहा जाता है. प्राचीन मूर्तियों और स्मारकों के संरक्षण की दिशा में इन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किया है. पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर की सुंदरता में भी इन्होंने अहम भूमिका निभाई.

1959 से इस क्षेत्र में सक्रिय रघुनाथ अब तक 2000 से ज्यादा स्टूडेंट्स को प्रशिक्षित कर चुके हैं. रघुनाथ महापात्रा इस समय ओडिशा ललित कला अकादमी के अध्यक्ष हैं. इन्हें प्रसिद्ध कार्यों में ओसाका (जापान) का अशोकन पिलर, पेरिस में बुद्ध मंदिर भी है.

रघुनाथ महापात्रा पद्म विभूषण (2013), पद्म भूषण (2001), पद्म श्री (1975) से सम्मानित हो चुके हैं. 22 साल की उम्र में 1964 में उन्हें मूर्ति कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया था.
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