OPINION: कोरोना के खिलाफ लड़ाई देश को एकजुटता की जरूरत- राज्यवर्धन सिंह राठौर

राज्यवर्धन सिंह राठौर लोकसभा सांसद हैं. वह खेल एवं युवा मामलों के कैबिनेट मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रह चुके हैं.

राज्यवर्धन सिंह राठौर लोकसभा सांसद हैं. वह खेल एवं युवा मामलों के कैबिनेट मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रह चुके हैं.

Coronavirus In India: कोरोना के खिलाफ देश की जंग में सबसे कारगर हथियार है वैक्सीनेशन यानी टीकाकरण. हम सबके लिए ये गर्व की बात है कि हमारे वैज्ञानिकों ने दिन-रात एक कर वैक्सीन बनाई.

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  • Last Updated: April 24, 2021, 12:04 PM IST
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राज्यवर्धन राठौर

पूरा देश एक होकर कोरोना से लड़ रहा है और युद्ध, आपदा जैसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए राष्ट्र को ऐसी ही एकजुटता की ज़रूरत होती है. ये ऐसा वक्त है, जब दलीय राजनीति, वैचारिक या संप्रदाय का मतभेद सबकुछ परे रखकर सबका साथ आना ज़रूरी है. ऐसी मिसाल एक बार नहीं, बल्कि कई बार देश के सामने आ चुकी है. 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में भारत और पाकिस्तान के बीच जब युद्ध हुआ था तो श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को सरकार के हर फैसले का पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की थी. ये दुर्भाग्य की बात है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे कांग्रेस के शीर्ष परिवार के नेता आपदा से निपटने में देश का साथ देने की बजाय राजनीतिक बयान दे रहे हैं.

कोरोना के खिलाफ देश की जंग में सबसे कारगर हथियार है वैक्सीनेशन यानी टीकाकरण. हम सबके लिए ये गर्व की बात है कि हमारे वैज्ञानिकों ने दिन-रात एक कर वैक्सीन बनाई. केंद्र और राज्यों की सरकारों ने, डॉक्टर्स ने, मीडिया ने, सामाजिक संगठनों ने और आम लोगों ने भी टीकाकरण को लेकर जनता में जागरुकता लाने में भूमिका निभाई है.


पीएम ने वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभाई
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वैक्सीन निर्माण के लिए प्रोत्साहन से लेकर वैक्सीनेशन जागरुकता अभियान में आगे बढ़कर भूमिका निभाई. संवेदना के साथ चरणबद्ध योजना के तहत पहले बुजुर्गों और बीमारों को, फिर 45 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों के टीकाकरण के लिए सबसे बड़ा अभियान चल रहा है. अब तो 18 साल से ज्यादा के लोगों को भी टीका देने की तैयारी है. 28 अप्रैल से इनका रजिस्ट्रेशन और 1 मई से टीका लगाने की शुरुआत होने वाली है.

राजधानी दिल्ली स्थित एम्स में कोवैक्सीन की दूसरी डोज़ लेते पीएम मोदी (फाइल)


कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जी ने भी वैक्सीन लगवाई थी, अगर वो देश से अपील करतीं कि कोरोना से बचाव के लिए हर कोई उसी तरह टीकाकरण ज़रूर कराए, जैसे उन्होंने कराया है तो इसका एक सकारात्मक संदेश जाता. राहुल गांधी जी कोरोना पॉजिटिव हैं, हम उनके स्वस्थ होने की कामना करते हैं, वो चुनाव प्रचार के सिलसिले में अलग-अलग राज्यों के दौरे पर भी गए थे, लेकिन कहीं भी उन्होंने वैक्सीन के लिए जनता को जागरुक नहीं किया. कांग्रेस के किसी भी नेता ने वैक्सीनेशन अभियान में किसी तरह का योगदान नहीं दिया, उल्टे इसका विरोध ही किया.



यह वक्त राजनीति करने का नहीं

ये वक्त किस राज्य ने क्या किया और किसने क्या नहीं किया, इस पर राजनीति करने का नहीं है, बल्कि हर प्रभावित राज्य के केंद्र के साथ बेहतर समन्वय से स्थिति में सुधार लाने की हरसंभव कोशिश का है. कुछ राज्यों में ऑक्सीज़न की कमी होने की रिपोर्ट के बाद मोदी जी ने मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की, स्थिति की समीक्षा की, आवश्यक निर्देश दिए. हमारी सरकारें संघीय ढांचे के तहत काम करती हैं, केंद्र और राज्यों के विषय निर्धारित हैं और सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए. राज्य में जिस दल की सरकार है, उसके शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है कि संकट का सामना करने की तैयारी पुख्ता हो, आपदा प्रबंधन बेहतर हो.

स्वास्थ्य राज्य सरकार का विषय है, इसलिए हर राज्य सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि वो अपने राज्य में चिकित्सा ढांचा खड़ा करे. विपक्ष की पार्टियां जैसे कांग्रेस पार्टी अपनी राज्य सरकारों पर दबाव बनाए ये तो समझ में आ सकता है, लेकिन टीकाकरण का विरोध करे ये देशहित में नहीं है. ऐसा हमने कहीं नहीं पढ़ा कि राहुल गांधी या कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कभी अपने राज्यों को कोई सुझाव दिया कि कोरोना आपदा से निपटने के लिए किस तरह के कदम उठाने ज़रूरी हैं. अपना दायित्व हर कोई जिम्मेदारी के साथ निभाएगा तभी तो हालात ज़ल्दी सुधर पाएंगे, सिर्फ आरोप की राजनीति करने से हम एक आपदा को कैसे हरा सकेंगे?


ये अपने आप में ही हैरान करने वाली बात है कि जब मोदी जी के साथ कोरोना प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की इन हाउस बैठक चल रही थी, आपदा के बेहतर प्रबंधन, समस्या का समाधान निकालने पर बात हो रही थी, तो एक मुख्यमंत्री इस बैठक का लाइव टेलीकास्ट कर रहे थे. इस लाइव टेलीकास्ट के जरिये वो जनता के सामने राजनीतिक संदेश दे रहे थे. आपदा के वक्त पर समाधान से ज्यादा राजनीति करने में उनकी दिलचस्पी खुद बता जाती है कि कुछ राज्य सरकारें किस तरह अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. ये वक्त राजनीति का है ही नहीं, ये सबको समझने की ज़रूरत है. ये वक्त है त्वरित चिकित्सा ढांचा तैयार करने की, ताकि जल्दी से जल्दी मरीजों को राहत मिल सके.

स्वास्थ्य ढांचा मजबूत करने की दिशा में आई तेज़ी 

देश का स्वास्थ्य ढांचा मजबूत करने की दिशा में 2014 के बाद से जो तेज़ी लाई गई है, कोरोना की पहली लहर के बाद उसकी रफ्तार और बढ़ी है. 2014 में सिर्फ 6 एम्स थे, मोदी सरकार ने 15 और एम्स को मंजूरी दी, जिनमें 6 कार्यरत हो चुके हैं. 75 सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर्स स्वीकृत हुए, जिनमें 38 ऑपरेशनल हैं. इन 38 में से 22 को कोविड सेंटर भी बनाया गया है. 2014 में देश में 380 मेडिकल कॉलेज थे, अब 565 हैं. मेडिकल कॉलेजों में अंडर ग्रेजुएट सीटों की संख्या 58 फीसदी और ग्रेजुएट सीटों की संख्या 80 फीसदी बढ़ चुकी है. एक साल के भीतर भारत ने चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर जो तेज़ प्रगति की, उसी का नतीजा है कि देश में पीपीई किट्स, वेंटिलेटर्स और मेक इन इंडिया वैक्सीन बनी. विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना की लहर बार-बार आ सकती है. आने वाले वक्त में इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए एक सक्षम मेडिकल तंत्र खड़ा हो सके, इसकी बुनियाद रखी जा चुकी है.

अभी जो स्थिति है, उसमें बीमारी से भी ज्यादा डर लोगों को सहमा रहा है. देश का जो तंत्र है उसमें जनता और मीडिया भी शामिल है, ये अलग नहीं हैं और अहम भूमिका निभाते हैं. जब हम जनता कर्फ्यू का सच्चाई से पालन करेंगे तो कोरोना अपने आप फैलने से रुक सकेगा और फिर अस्पतालों की बेड और ऑक्सीजन की मारामारी भी कम हो जाएगी. मीडिया हो या सोशल मीडिया, जनता को जागरुक करना महत्वपूर्ण है लेकिन पैनिक की स्थिति और जानकारी में अंतर समझना भी बहुत जरूरी है. ये समझना होगा कि पैनिक की स्थिति बनने से दवाइयों की ब्लैकमार्केटिंग और बढ़ सकती है.


कोरोना की मौजूदा स्थिति को जल्दी बदलने के लिए हर नागरिक को भी भूमिका निभानी है. हममें से जो सक्षम हैं वो अपनी और अपने आस-पास की जिम्मेदारी ले तो हम इस कोरोना की आपदा को हराने में मदद कर सकते हैं. सबको खुद भी संभलना है और दूसरों को भी संभालना है. शासन, प्रशासन, राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के साथ-साथ हर नागरिक जब आपदा के खिलाफ एक होकर लड़ेंगे तो निश्चित रूप से भारत विजेता बनकर संकट से उबरेगा.  राज्यवर्धन सिंह राठौर लोकसभा सांसद हैं. वह खेल एवं युवा मामलों के कैबिनेट मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रह चुके हैं. लेख में व्यक्त विचार उनके निजी है.
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