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जानें, 'टॉप कॉप' राकेश मारिया क्यों हैं दूसरों से अलग?

News18India.com
Updated: September 9, 2015, 12:26 PM IST
जानें, 'टॉप कॉप' राकेश मारिया क्यों हैं दूसरों से अलग?
अब जब 'टॉप कॉप' राकेश मारिया को मुंबई के पुलिस आयुक्त पद से हटाए जाने की खबर मीडिया में छाई हुई है। आइए जानें, चर्चा में रहने वाले राकेश मारिया हैं कौन?

अब जब 'टॉप कॉप' राकेश मारिया को मुंबई के पुलिस आयुक्त पद से हटाए जाने की खबर मीडिया में छाई हुई है। आइए जानें, चर्चा में रहने वाले राकेश मारिया हैं कौन?

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नई दिल्ली। 1981 बैच के IPS अफसर राकेश मारिया सिर्फ मुंबई के 'टॉप कॉप' होने की वजह से ही नहीं जाने जाते, बल्कि उनमें कई ऐसी खासियतें  हैं जो उन्हें दूसरों से काफी आगे खड़ा करती हैं। अब जब 'टॉप कॉप' राकेश मारिया को मुंबई के पुलिस आयुक्त पद से हटाए जाने की खबर मीडिया में छाई हुई है। आइए जानें, चर्चा में रहने वाले राकेश मारिया हैं कौन?

-1993 में डेप्युटी पुलिस कमिश्नर (ट्रैफिक) बनकर मुंबई आए थे। उसी साल हुए मुंबई बम धमाकों की जांच की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी। मारिया के कुशल नेतृत्व में जांच तेजी से आगे बढ़ी और एक-एक कर साजिश की परतें खुलती गईं। बाद में उन्हें मुंबई पुलिस में डीसीपी (क्राइम) बना दिया गया और इसके बाद जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम)।

- मारिया ने 2003 के गेटवे ऑफ इंडिया और जावेरी बाजार में हुए दोहरे बम धमाके के केस को सुलझाया। टैक्सियों में बम प्लांट करने के लिए इस केस में 6 लोग गिरफ्तार हुए,  जिसमें एक दंपती भी शामिल था।



- अशरत अंसारी, हनीफ सैय्यद और उसकी पत्नी फहीमा को अगस्त 2009 में मुंबई की पोटा कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। इस फैसले ने मारिया की जांच की सफलता की पुष्टि कर दी। बाद में, फरवरी 2012 में हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।



- मारिया को मुंबई 26/11 हमलों के जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। मारिया ने हमले में एकमात्र जिंदा पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब से पूछताछ की। मारिया ने इस केस को भी कामयाबी के साथ सुलझाया। कसाब को 2012 में फांसी दी गई।

- मारिया मुंबई हमले के दौरान ज्वाइंट कमिश्नर क्राइम थे। 26/11 हमले में शहीद आईपीएस ऑफिसर अशोक काम्टे की पत्नी विनीता काम्टे ने मुंबई पुलिस कमिश्नर के तौर पर मारिया की नियुक्ति का विरोध किया। काम्टे की पत्नी विनीता ने अपनी किताब 'द लास्ट बुलेट' में सवाल उठाया कि मुंबई हमले के दौरान पुलिस कंट्रोल रूम की कमान संभालने वाले मारिया ने इसकी जानकारी होने से क्यों इनकार किया कि काम्टे कामा अस्पताल कैसे पहुंच गए?

- विनीता को आरटीआई के तहत हमले वाले दिन मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम से हुई बातचीत की जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक मारिया ने ही काम्टे को कामा अस्पताल के पास फायरिंग होने की जानकारी देते हुए उन्हें तत्काल वहां पहुंचने को कहा था।

- ताजा घटनाक्रम में याकूब मेमन की फांसी और उससे पहले भी मारिया पूरी तरह सक्रिय रहे। याकूब का शव परिजन को सौंपने की बात आई तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मेमन परिवार से बात करने की जिम्मेदारी भी मारिया को सौंपी। मारिया ने परिवार को इस बात के लिए मनाया कि याकूब को मुंबई लाकर जल्द से जल्द दफना दिया जाए। याकूब का शव जब नागुपर से मुंबई लाया गया तो माहिम में पुलिस अधिकारियों के बीच राकेश मारिया भी नजर आए।

थर्ड डिग्री इंटेरोगेशन पर
एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में मारिया ने थर्ड डिग्री इंटेरोगेशन को लेकर छाई गलतफहमी दूर करने की कोशिश की। मारिया ने उस इंटरव्यू में फिल्म इंडस्ट्री की फिल्मों का आभार जताते हुए कहा, 'बड़े पैमाने पर सब यही सोचते हैं कि क्रिमिनल्स से सच उगलवाने के लिए थर्ड डिग्री ही एकमात्र रास्ता है। यह सच से पूरी तरह दूर है।'

मारिया ने कहा कि सिर्फ पिटाई या टॉर्चर से ही सच सामने नहीं आ पाता। आज के दौर के आतंकवादियों पर यह बात लागू नहीं हो सकती। किसी को भी उनकी साइकॉलजी को समझना चाहिए, उनको दिमाग पर हमला करके जानकारी निकालनी होती है।

इसके अलावा, वकील, कोर्ट, एनजीओ, कड़े कानून हैं। आम धारणा यही है कि एक क्रिमिनल पिटाई के बाद ही सच उगलता है लेकिन पूछताछ में हमें बहुत से दिमागी खेल आजमाने पड़ते हैं। अजमल कसाब के साथ सबसे पहले मैंने ही 27 नवंबर को सुबह 4 या 5 बजे पूछताछ की थी।

बहुत कम लोगों को पता है कि मारिया का ताल्लूक फिल्मी दुनिया से जुड़े परिवार से है। उनके पिता प्रॉड्यूसर थे और कला निकेतन प्रोडक्शन हाउस भी मारिया परिवार का ही है।

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First published: September 9, 2015, 9:30 AM IST
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