Home /News /nation /

‘सरकारी तालिबानी’ बोलना गलत था, हमें खालिस्तानी या पाकिस्तानी ना बोलें: राकेश टिकैत

‘सरकारी तालिबानी’ बोलना गलत था, हमें खालिस्तानी या पाकिस्तानी ना बोलें: राकेश टिकैत

किसान महापंचायत में पहुंचे राकेश टिकैत (File Photo)

किसान महापंचायत में पहुंचे राकेश टिकैत (File Photo)

Kisaan Mahapanchayat: राकेश टिकैत ने कहा कि हम हरियाणा जाते हैं तो वहां हमें बाहरी कहा जाता है. टिकैत ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश में बाहरी नहीं हैं तो हम दूसरे राज्यों में बाहरी कैसे हो गए.

  • News18Hindi
  • Last Updated :

    करनाल. हरियाणा के करनाल में मंगलवार को हुई किसान महापंचायत (Kisan Mahapanchayat) में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने पहले दिए हुए अपने ‘सरकारी तालिबानी’ बयान पर सफाई दी. टिकैत ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि ऐसे शब्द जिन पर प्रतिबंध है उनका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. टिकैत ने कहा कि हमने जब सरकारी तालिबानी कहा तो इन्हें दर्द हुआ कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार को भी हमारे लिए खालिस्तानी-पाकिस्तानी जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

    राकेश टिकैत ने प्रशासन की पाबंदी को लेकर सवाल किया कि क्या इंटरनेट बंद होने से लोग नहीं जा पाएंगे. उन्होंने कहा कि हम अधिकारियों से बातचीत कर मामले सुलझाएंगे. राकेश टिकैत ने कहा कि हम हरियाणा जाते हैं तो वहां हमें बाहरी कहा जाता है. टिकैत ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश में बाहरी नहीं हैं तो हम दूसरे राज्यों में बाहरी कैसे हो गए.

    ये भी पढ़ें- ‘पाक मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे प्रदर्शनकारी, तालिबान ने बरसाई गोलियां

    मुजफ्फरनगर महापंचायत में टिकैत ने कही थीं ये बातें
    इससे पहले केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में रविवार सुबह मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में भी किसान महापंचायत हुई जिसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए. इस रैली में राकेश टिकैत ने कहा, “आज संयुक्त किसान मोर्चा ने जो फैसले लिए हैं उसके तहत हमें पूरे देश में बड़ी-बड़ी सभाएं करनी पड़ेंगी. अब यह मिशन केवल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का मिशन नहीं, अब यह मिशन संयुक्त मोर्चे का देश बचाने का मिशन होगा. यह देश बचेगा तो यह संविधान बचेगा. लड़ाई उस मुकाम पर आ गई है और जो बेरोजगार हुए हैं यह लड़ाई उनके कंधों पर हैं.”

    उन्होंने कहा, “हमें फसलों पर एमएसपी की गारंटी चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा था कि 2022 में किसानों की आय दोगुनी होगी और पहली जनवरी से हम दोगुनी रेट पर फसल बेचेंगे. हम जाएंगे देश की जनता के बीच में और पूरे देश में संयुक्त किसान मोर्चा आंदोलन करेगा.”

    गौरतलब है कि तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन को नौ महीने से अधिक समय हो गया है. किसान उन कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. उन्हें डर है कि वे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली को खत्म कर देंगे. सरकार, जो प्रमुख कृषि सुधारों के रूप में कानूनों को पेश कर रही है, उसके साथ 10 दौर से अधिक की बातचीत, दोनों पक्षों के बीच गतिरोध को तोड़ने में विफल रही है.

    Tags: Mahapanchayat, Muzaffarnagar Kisan Mahapanchayat, Rakesh Tikait, Taliban

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर