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राकेश टिकैत: पुलिस की नौकरी छोड़कर बुलंद की किसानों की आवाज़, 44 बार जा चुके हैं जेल

राकेश टिकैत के समर्थन में किसानों के दिल्ली की तरफ बढ़ते कदम को रोकने के लिए सतर्क हुई यूपी पुलिस.
राकेश टिकैत के समर्थन में किसानों के दिल्ली की तरफ बढ़ते कदम को रोकने के लिए सतर्क हुई यूपी पुलिस.

Who is Rakesh Tikait: पिता की मौत के बाद राकेश टिकैत के बड़े भाई नरेश को यूनियन की गद्दी मिली. आज भले ही राकेश प्रवक्ता की भूमिका में हों, लेकिन सभी बड़े फैसले उनके हिसाब से ही लिए जाते हैं. वहीं, किसान आंदोलन में भी राकेश की बात को ही माना गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 9:14 PM IST
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नई दिल्ली. नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) का विरोध कर रहे किसानों की आवाज बनकर आंदोलन के साथ खड़े राकेश टिकैत ने एक बार फिर हवा का रुख बदल दिया है. दिल्ली हिंसा में जिम्मेदार माने जा रहे टिकैत गुरुवार को मीडिया के सामने रो पड़े, जिसके बाद एक बार फिर सिमटता हुआ आंदोलन मजबूत होता नजर आ रहा है. उनके इस वीडियो के बाद लोगों ने गाजीपुर बॉर्डर (Ghazipur Border) पहुंचना शुरू कर दिया है. खास बात यह है कि किसान राजनीति से टिकैत का पुराना नाता है. उन्हें यह विरासत में मिली है.

फिलहाल गिरफ्तारी की आशंकाओं से घिरे राकेश टिकैत कभी दिल्ली पुलिस में सिपाही हुआ करते थे. हिंसा के आरोप में पुलिस ने भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत के गाजीपुर स्थित तंबू पर नोटिस लगा दिया है. साथ ही किसान नेता को प्रतिक्रिया देने के लिए तीन दिन का वक्त दिया गया है. हालांकि, टिकैत ने साफ कर दिया है कि वो आंदोलन छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं.





कौन हैं राकेश टिकैत 
राकेश टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत 1987 में बनी भारतीय किसान यूनियन (Bhartiya Kisan Union) के अध्यक्ष थे. उन्हें किसानों का मसीहा कहा जाता था. उनकी मौत के बाद यूनियन की गद्दी पर राकेश के बड़े भाई नरेश टिकैत बैठे. इसके बाद से ही राकेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. 4 जून 1969 को जन्मे राकेश ने एलएलबी की है. मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि किसान आंदोलनों के चलते वो 44 बार जेल भी जा चुके हैं.

ऐसे पकड़ी राजनीति की राह
राकेश टिकैत 1985 में दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल के तौर पर भर्ती हुए थे. हालांकि, प्रमोशन के बाद उन्होंने सब इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी संभाली. 90 के दशक का समय था और लाल किले पर किसान आंदोलन जारी था. यह आंदोलन राकेश के पिता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में चल रहा था. कहा जा रहा है कि इस आंदोलन से परेशान सरकार ने राकेश पर अपने पिता के आंदोलन को खत्म करने का दबाव बनाया था. इसके चलते उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर किसानों का साथ दिया.

जो राकेश कहते हैं वही होता है
पिता की मौत के बाद राकेश के बड़े भाई नरेश को यूनियन की गद्दी मिली. आज भले ही राकेश प्रवक्ता की भूमिका में हों, लेकिन सभी बड़े फैसले उनके हिसाब से ही लिए जाते हैं. वहीं, किसान आंदोलन में भी राकेश की बात को ही माना गया.

खैर इससे पहले टिकैत सक्रिय राजनीति में आने की कोशिश कर चुके हैं. पहली बार 2007 में खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और दूसरी बार 2014 में अमरोहा जनपद से राष्ट्रीय लोक दल पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा. हालांकि, दोनों बार उन्हें असफलता ही हाथ लगी.
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