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कृषि कानून: राकेश टिकैत का ट्वीट, 'सरकार मानने वाली नहीं, इलाज करना पड़ेगा'

राजधानी दिल्ली से लगी सीमा पर किसानों के प्रदर्शन को 200 से ज्यादा दिन हो गए हैं. फाइल फोटो

राजधानी दिल्ली से लगी सीमा पर किसानों के प्रदर्शन को 200 से ज्यादा दिन हो गए हैं. फाइल फोटो

Farmers protest over Farm law: कोरोना संकट के बीच राजधानी दिल्ली से लगी सीमा पर किसानों के प्रदर्शन को 200 से ज्यादा दिन हो गए हैं.

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    नई दिल्ली. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने ट्वीट कर किसान आंदोलन को तेज करने की बात कही है. टिकैत ने रविवार को ट्विटर पर लिखा, "सरकार मानने वाली नहीं है. इलाज तो करना पड़ेगा. ट्रैक्टरों के साथ अपनी तैयारी रखो. जमीन बचाने के लिए आंदोलन तेज करना होगा." इससे एक दिन पहले भी राकेत टिकैत ने कहा था कि केंद्र सरकार यह गलतफहमी अपने दिमाग से निकाल दे कि किसान वापस जाएगा. उन्होंने कहा कि किसान तभी वापस जाएगा, जब मांगें पूरी हो जाएंगी. हमारी मांग है कि तीनों कृषि कानून रद्द हों और एमएमसी पर कानून बने. बता दें कि कोरोना संकट के बीच दिल्ली बॉर्डर पर केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है. राजधानी दिल्ली से लगी सीमा पर किसानों के प्रदर्शन को 200 से ज्यादा दिन हो गए हैं.

    इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को ‘‘बदनाम’’ कर रही है और अगर सरकार उम्मीद कर रही कि आंदोलन खत्म हो जाएगा तो ऐसा नहीं होने वाला. संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 40 किसान संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं. एसकेएम ने दावा किया कि कई राज्य सरकारें आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी हैं तथा आंदोलन से जुड़ने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन स्थल पर और किसान पहुंच गए हैं.

    संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा, ‘‘प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने का कोई भी मौका छोड़ा नहीं जा रहा. हालांकि, उनकी नीति इस बार भी नाकाम होगी.’’ बयान में कहा गया, ‘‘किसान जो मांग रहे हैं, वह यह है कि उनके आजीविका के मौलिक अधिकार की रक्षा की जाए. लोकतंत्र में यह अपेक्षा की जाती है कि सरकार उनकी जायज मांगों को मान लेगी. इसके बजाय, भाजपा नेतृत्व वाली सरकार अनावश्यक रूप से आंदोलन को लंबा खींच रही है, इसे बदनाम कर रही है और उम्मीद कर रही है कि यह ऐसे ही खत्म हो जाएगा. यह नहीं होने वाला है.’’

    संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया कि भाजपा के कई नेता केंद्र सरकार से किसानों के मुद्दे का समाधान करने के लिए कह रहे हैं. बयान में कहा गया, ‘‘तमिलनाडु के मुख्यमंत्री (एम के स्टालिन) ने हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन में तीनों कृषि कानूनों को रद्द किए जाने का मुद्दा उठाया. महाराष्ट्र भी किसानों पर केंद्रीय कानूनों के बुरे प्रभावों को बेअसर करने के लिए अपने कानून में संशोधन करने की प्रक्रिया में है.

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री (ममता बनर्जी) भी लगातार कहती रही हैं कि आंदोलनकारी किसानों की मांगें पूरी होनी चाहिए. कुछ अन्य राज्यों में अन्य दलों की सरकारें भी किसानों के आंदोलन के साथ खड़ी हैं.’’ संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया कि उत्तराखंड के जसपुर से सैकड़ों किसान बृहस्पतिवार को गाजीपुर सीमा पर पहुंचे और भाकियू (टिकैत) के नेतृत्व में बड़ा काफिला पांच दिनों तक पैदल चलने के बाद शुक्रवार को गाजीपुर सीमा पहुंचा.

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