रामगोपाल यादव 6 साल के लिए समाजवादी पार्टी से बर्खास्त, शिवपाल बोले- भाजपा के एजेंट हैं प्रोफेसर

समाजवादी पार्टी में मचे सियासी घमासान के बीच मुलायम सिंह यादव ने रामगोपाल यादव को छह साल के पार्टी से बाहर निकाल दिया है. माना जा रहा है अखिलेश कैबिनेट से शिवपाल यादव की बर्खास्तगी के बाद यह कड़ा फैसला लिया.

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Updated: October 23, 2016, 8:05 PM IST
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समाजवादी पार्टी में मचे सियासी घमासान के बीच मुलायम सिंह यादव ने रामगोपाल यादव को छह साल के लिए पार्टी से बाहर निकाल दिया है. माना जा रहा है अखिलेश कैबिनेट से शिवपाल यादव की बर्खास्तगी के बाद मुलामय खेमे से यह कड़ा फैसला लिया गया है.

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सपा के उत्‍तर प्रदेश के अध्‍यक्ष शिवपाल यादव ने प्रेस कांफ्रेंस में रामगोपाल यादव पर सीधे निशाना साधा. कहा कि रामगोपाल यादव तीन बार पार्टी विरोधी काम कर रहे थे. वे भाजपा के एक बड़े नेता से तीन बार मिल चुके हैं. रामगोपाल भाजपा के एजेंट हैं. उन्‍होंने आरोप लगाया कि रामगोपाल के बेटे अक्षय और उनकी बहू का नाम यादव सिंह की ओर से किए गए घोटाले में हैं. रामगोपाल बेटे और बहू को सीबीआई से बचाने के लिए भाजपा से मिल गए हैं. खासकर प्रोफेसर रामगोपाल यादव भाजपा के एजेंट हैं.

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शिवपाल यादव ने रामगोपाल पर यह भी आरोप लगाया कि वे उनके खिलाफ भी लगातार षड्यंत्र कर रहेे थे. तंज कसतेे हुए शिवपाल यादव ने कहा कि अगर प्रोफेसर साहब अपनेे ज्ञान का इस्‍तेमाल पार्टी को बढ़ाने के लिए करते तो पार्टी को काफी फायदा होता, लेकिन उन्‍होंने पूरी तरीके से पार्टी के खिलाफ काम किया. शिवपाल यादव ने यह भी कहा कि मुख्‍यमंत्री (अखिलेश) समझ नहीं पा रहे हैं कि उनके कौन सगे हैं और कौन पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

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Uttar Pradesh Samajwadi Party Akhilesh Yadav versus Shivpal Yadav assembly seats

अखिलेश ने शिवपाल को मंत्री पद से हटाया

इससे पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया. अखिलेश ने शिवपाल और अमर सिंह के करीबियों पर भी कार्रवाई की थी.

बर्खास्त होने के बाद शिवपाल ने सभी सरकारी सुविधाएं लौटा दी. मुलायम सिंह यादव के आवास से शिवपाल की सुरक्षा दस्ता भी लौट आया है. शिवपाल सिंह यादव अब मुलायम सिंह से मिलने पहुंचे हैं.

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अखिलेश ने नारद राय, शादाब फातिमा और ओमप्रकाश को भी कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इन मंत्रियों की बर्खास्तगी से संबंधित चिट्ठी गर्वनर राम नाइक को भेज दी गई है. इतना बड़ा कदम उठाने के बाद अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की. बाद में शिवपाल ने भी मुलायम सिंह यादव से मुलाकात कर अपना पक्ष सामने रखा.

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आजम खान ने बिना नाम लिए अमर सिंह पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि यह दिन आना ही था, लेकिन हां एक शख्स से नुकसान जरूर हुआ. यह मुख्यमंत्री का अधिकार है किसे रखें न रखें. पार्टी के दूरदर्शी लोग को पता था यही होगा ही.

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इससे पहले समाजवादी पार्टी में संभावित दो फाड़ के बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को जो विधायकों की बैठक बुलाई, उनमें शिवपाल के समर्थक विधायकों को आने का न्यौता नहीं मिला.

गायत्री प्रसाद प्रजापति भी मीटिंग में शामिल थे, लेकिन उन्हें आने का न्यौता नहीं मिला था. बर्खास्त मंत्री राज किशोर सिंह और मनोज पांडे सीएम मीटिंग में शामिल नहीं थे.

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समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता रामगोपाल यादव के लेटर बम के बाद यूपी का सियासी पारा गरमा गया. माना जा रहा है कि रामगोपाल यादव को इसका नतीजा भुगतना पड़ सकता है.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने इस मसले पर यूपी प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव से फोन पर बात की है. दोनों नेताओं के बीच मौजूदा सियासी हालात पर चर्चा हुई. इसकी पुरजोर संभावना है कि रामगोपाल यादव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है.

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इससे पहले रामगोपाल ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को लिखी चिट्ठी में बताया- 'वक्त आ गया है कि कार्यकर्ता अखिलेश के साथ रहें. अखिलेश को हराने की साजिश हो रही है. मध्यस्थता करने वाले ही पार्टी को दिगभ्रमित कर रहे हैं. विरोधियों की सोच नकारात्मक है.'

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रामगोपाल ने पत्र में लिखा है- 'आगे बढ़ो हम सब अखिलेश के साथ हैं. अब जरूरत है कि हमलोग मिलकर अखिलेश यादव की विकास रथ यात्रा को सफल बनाएं. यदि सभी कार्यकर्ता एकजुट हो जाएं तो आगामी विधानसभा चुनाव में अखिलेश की अगुवाई में पार्टी की जीत तय है.'

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First published: October 23, 2016, 10:38 AM IST
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