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अयोध्या मामला: मुस्लिम पक्षकारों ने मध्यस्थता पैनल पर लगाया रिपोर्ट लीक करने का आरोप

News18Hindi
Updated: October 18, 2019, 12:31 PM IST
अयोध्या मामला: मुस्लिम पक्षकारों ने मध्यस्थता पैनल पर लगाया रिपोर्ट लीक करने का आरोप
चीफ जस्टिस गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं, ऐसे में फैसला इस तारीख से पहले आएगा.

मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि अयोध्या भूमि विवाद (Ayodhya Land Dispute) का मामला सिविल है ना कि आपराधिक, इसलिए फैसले की घोषणा होने से पहले कभी भी समझौता किया जा सकता है.

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  • Last Updated: October 18, 2019, 12:31 PM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या भूमि विवाद ( Ram Janmabhoomi-Babri Masjid dispute) मामले में मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा गठित मध्यस्थता पैनल (mediation panel ) पर कार्यवाही को लीक करने के लिए का आरोप लगाया है. मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि अब 'निपटारे' का कोई सवाल ही नहीं है. छह मुस्लिम पक्षों ने पैनल के सदस्य और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू को 'सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारुकी के साथ बातचीत में शामिल होने' का दोषी ठहराया.

मुस्लिम पक्षकारों ने कहा कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद एक प्रतिनिधि मुकदमा है, सुन्नी वक्फ बोर्ड अकेले निपटारे पर कोई निर्णय नहीं ले सकता. उन्होंने यह भी बताया कि मध्यस्थता प्रक्रिया गोपनीय बनी हुई थी और बोर्ड की पेशकश के लीक होने की निंदा की.

ऐसा समझा जाता है कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मध्यस्थता समिति ने बुधवार को न्यायालय में सीलबंद लिफाफे में एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सूत्रों के अनुसार हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के बीच 'एक तरह का समझौता' है.

आपसी सहमति से सुलझाने के समर्थन में हैं पक्षकार

मध्यस्थता समिति से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्वाणी अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा, राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति और कुछ अन्य हिंदू पक्षकार भूमि विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के समर्थन में हैं.

मध्यस्थता समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला कर रहे हैं और इसमें आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर तथा वरिष्ठ अधिवक्ता और प्रख्यात मध्यस्थ श्रीराम पंचू शामिल हैं.

सूत्रों ने बताया कि पक्षकारों ने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के प्रावधानों के तहत समझौता करने की मांग की है जिसमें कहा गया है कि मंदिरों के विध्वंस के बाद बनी और 1947 की तरह अब मौजूद मस्जिद या अन्य धार्मिक स्थानों के संबंध में कोई विवाद नहीं है.
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First published: October 18, 2019, 12:06 PM IST
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