Home /News /nation /

ANALYSIS: क्‍यों NDA छोड़ने को दो बार सोच रहे हैं रामविलास पासवान

ANALYSIS: क्‍यों NDA छोड़ने को दो बार सोच रहे हैं रामविलास पासवान

रामविलास पासवान (फाइल)

रामविलास पासवान (फाइल)

ऐसे में रामविलास पासवान पुरानी घटनाओं पर गौर करते हुए एमपी समेत हिंदी भाषी क्षेत्रों में राजनीतिक उथल-पुथल पर नज़र बनाए हुए हैं, ताकि वे इसे बिहार गठबंधन नहीं छोड़ने का कारण बना सके.

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सब कुछ ठीक नहीं है. बिहार में सीट शेयरिंग को लेकर दोनों के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं. सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर कई दौर की मीटिंग हो चुकी है, लेकिन फॉर्मूला फिट नहीं बैठ रहा. यही वजह है कि रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने बीजेपी को कहा है कि वह गठबंधन के साथियों की चिंता का ध्यान रखें, नहीं तो नुकसान हो सकता है.

NDA में ही बने रहेंगे रामविलास पासवान, सीट शेयरिंग पर फॉर्मूला तैयार!

अब तक ये साफ नहीं है कि आखिर रामविलास पासवान की पार्टी और बीजेपी में पेंच कहां फंसा है. मगर अब जो बात सामने आई है, उसकी मानें तो एलजेपी और बीजेपी के बीच एक राज्यसभा की सीट को लेकर मामला फंसा है. दरअसल, एलजेपी चाहती है कि सितंबर में बीजेपी ने उसे जो असम से राज्यसभा की एक सीट का वादा किया था, उस पर वह कायम रहे. लेकिन बात कुछ बन नहीं पा रही.

बिहार में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला फिट नहीं बैठने के कारण ही पहले एनडीए से पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी निकले. फिर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के उपेंद्र कुशवाहा ने 'कमल' छोड़ महागठबंधन का दामन थाम लिया. लेकिन पासवान पशोपेश में हैं और गठबंधन में बने रहने की वजह ढूंढ़ रहे हैं.


पिता मेरे साथ हैं, तलाक लेने का फैसला अब भगवान भी नहीं बदल सकते: तेज प्रताप

वीपी सिंह सरकार ने जब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट), 1989 पास किया था, तब पासवान सामाजिक न्याय मंत्री थे. 30 साल बाद नरेंद्र मोदी सरकार में रामविलास पासवान ने एक बार फिर से जिम्मेदारी संभाली.

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के आदेश दिए थे और कहा था कि ऐसे केस में तुरंत गिरफ्तारी नहीं हो सकती. कोर्ट के इस फैसले को लेकर पासवान ने दलित नेताओं, सांसदों के साथ मीटिंग की और उनकी पार्टी ने शीर्ष अदालत में रिव्यू पिटीशन दायर किया.

आखिर में इसमें उन्हें कामयाबी भी मिली. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार द्वारा SC/ST एक्ट में संशोधन कर उसे मूल स्वरूप में बहाल किया गया. पासवान ने इस सफलता का क्रेडिट भी लिया. इस एक्ट को दोबारा मूल रूप में बहाल करने के खिलाफ हिंदी भाषी राज्यों खासकर मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि राज्यों में सवर्णों ने 'भारत बंद' और आंदोलन भी किया था.

NDA में पार्टी तोड़कर बर्बाद करने की हो रही थी कोशिश: उपेंद्र कुशवाहा

हाल में संपन्न हुए तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी को सवर्ण वोटर्स की नाराज़गी का खामियाजा भी भुगतना पड़ा. खासकर नॉर्थ मध्य प्रदेश में बीजेपी का अच्छा खासा वोट कट गया. ऐसे में रामविलास पासवान पूरानी घटनाओं पर गौर करते हुए एमपी समेत हिंदी भाषी क्षेत्रों में राजनीतिक उथल-पुथल पर नज़र बनाए हुए हैं. ताकि वह इसे बिहार गठबंधन नहीं छोड़ने का कारण बना सके.


एलजेपी के एक नेता कहते हैं, 'एक बार जब एससीएसटी एक्‍ट में संशोधन जैसा फैसला लेते हैं तो सरकार को कड़ा रूख अपनाना पड़ता है और साथ ही मजबूती से इस पर राय भी व्‍यक्‍त करनी होती है. नहीं तो इससे उम्‍मीद के अनुसार नतीजे नहीं मिलते. एक पुरानी कहावत है कि न माया मिली न राम.'

सीएम नीतीश और सुशील मोदी पर तेजस्वी का हमला, बोले- बिहार में है ‘थू-शासन’

चुनाव के बाद छोटी पार्टियां पाला बदल सकती हैं, लेकिन इसके लिए सबसे पहले पासवान को आम चुनावों में सीटें जीतनी होंगी.

Tags: Amit shah, Bihar election, Bihar NDA, BJP, Chirag Paswan, Ram vilas paswan

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर