महाराष्ट्र: 10 लाख का पुरस्कार जीतने वाले शिक्षक बच्चों को सिखा रहे कैसे सहेजें पानी

मिशन पानी कार्यक्रम में रंजीत सिंह का सम्‍मान किया गया. दिन भर चले कार्यक्रम मिशन पानी वाटरथन का आयोजन News18 और हार्पिक इंडिया ने किया था.

महाराष्ट्र के एक स्कूल शिक्षक रंजीत सिंह दिसाले पिछले साल दिसंबर में सुर्खियों में छाए हुए थे, उन्‍हें दस लाख अमेरिकी डॉलर वाले वार्षिक वैश्विक शिक्षक पुरस्कार 2020 से नवाजा गया था. उन्‍हें मिशन पानी वाटरथन के दौरान सम्‍मानित किया गया.

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    भारत के 72 वें गणतंत्र दिवस पर आयोजित मिशन पानी कार्यक्रम में जल योद्धाओं, राजनेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और तमाम दिग्‍गज मशहूर हस्तियों ने एक साथ मिलकर नेटवर्क 18 पर आए और उन्‍होंने जल संरक्षण संकल्‍प लिया. इनमें रंजीत सिंह दिसाले भी शामिल थे. वे महाराष्‍ट्र के एक स्‍कूल टीचर हैं जिन्‍हें दस लाख अमेरिकी डॉलर वाले प्रतिष्ठित वार्षिक वैश्विक शिक्षक पुरस्कार 2020 से नवाजा गया था. इस खबर के कारण दिसंबर में रंजीत सोशल मीडिया में वायरल हुए थे.

    एक बड़ी राशि के पुरस्‍कार और बहुत बड़े सम्‍मान के कारण रंजीत लोकप्रिय बन गए हैं, इस मिशन पानी कार्यक्रम में  उनका सम्‍मान किया गया. दिन भर चले कार्यक्रम मिशन पानी वाटरथन का आयोजन News18 और हार्पिक इंडिया ने किया था. इस पहल का उद्देश्‍य है कि आम लोगों के बीच जल संरक्षण पर चर्चा हो, इसके लिए जल योद्धाओं और रंजीत सिंह जैसे पर्यावरणविदों को सम्‍मानित किया जाए.

    रंजीत सिंह दिसाले को एक टीचर के रूप में सभी जानते हैं, लेकिन वे हृदय से एक पर्यावरणविद् हैं. वे महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पारितेवादी गांव के रहने वाले हैं. उन्‍होंने जल संरक्षण के लिए अपने स्‍टूडेंट्स को तकनीक सिखाई हैं. कोरोना वायरस के लॉकडाउन के दौरान भी वे रेनवाटर हारवेस्टिंग तकनीक की शिक्षा देते रहे हैं.

    रंजीत सिंह दिसाले ने News18 से कहा कि कोरोना महामारी के दौर में हर स्‍टूडेंट को कहा गया कि वह अपने घरों में रहते हुए अपने द्वारा खर्च किए जाने वाले पानी और बिजली की खपत की मात्रा की निगरानी करे. इससे तैयार हुए डाटा के बाद स्‍टूडेंट्स ने कार्य योजना बनाई कि वे गांव में उपलब्‍ध पानी का उपयोग कितने समय तक कर सकेंगे? स्‍टूडेंट्स ने प्‍लान बी भी बनाया जिससे कम वर्षा होने पर प्रयोग में लाया जा सके. अब स्‍टूडेंट्स पानी का समझदारी से उपयोग कर रहे हैं.

    देश के एक प्राइमरी स्कूल में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और किताबों में क्यूआर कोड शुरू करने की पहल वाली तकनीक की कोशिशों के कारण उन्‍हें ग्लोबल टीचर प्राइज (Global Teacher Prize) मिला था. इसके तहत 10 लाख डॉलर (लगभग 7 करोड़ 38 लाख रुपए) का पुरस्कार मिला था. रंजीत सिंह मानते हैं कि दुनिया में टीचर ही असली चेंजमेकर हैं. इस लिए उन्‍होंने घोषणा की है कि वे ईमान की राशि का आधा हिस्‍सा फाइनल तक पहुंचे अपने साथियों को दे देंगे.

    दिसाले और अन्‍य चेंजमेकर्स जिनमें वाटर वारियर अमला रूइया, डॉ फौजिया तरन्‍नुम, बाल पर्यावरणविद् लीसीप्रिया कांजुगम, अभिनेता अक्षय कुमार साथ आए और जल संरक्षण के लिए अपना सहयोग दिया.
    जलवायु परिवर्तन और जल संरक्षण की जब बात होती है तो युवाओं की भागीदारी अहम हो जाती है, ऐसे में रंजीत सिंह जैसे शिक्षकों का होना इस पहल को जमीनी स्‍तर पर विस्‍तार के आयाम देता है.

    हारपिक इंडिया और सीएनएन न्‍यूज18 की पहल मिशन पानी, भारत के बहुमूल्‍य जल स्रोतों को बचाने और स्‍वच्‍छता में जीवन की एक मुहिम का नेतृत्व कर रहा है. आप भी जल प्रतिज्ञा लेकर इसमें योगदान दे सकते हैं, कृपया www.news18.com/mission-paani पर विजिट कीजिए.

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