रेप के मामले इतने अधिक आ रहे हैं कि लगता ही नहीं कोई सरकार भी है: रंजना कुमारी

निर्भया कांड से ज्यादा खरा​ब हो चुके हैं देश के हालात. 
प्रतीकात्मक तस्वीर.
निर्भया कांड से ज्यादा खरा​ब हो चुके हैं देश के हालात. प्रतीकात्मक तस्वीर.

महिला आयोग पॉलिटिकल पार्किंग लॉट है. यहां पर महिलाओं के प्रति कोई संजीदगी नहीं है. अगर होती तो आज पूरा महिला आयोग हाथरस में दिखना चाहिए था. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से उन्हें मिलना चाहिए था.

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नई दिल्ली. महिला अधिकार कार्यकर्ता और ‘सेंटर फॉर सोशल रिसर्च’ की निदेशक रंजना कुमारी का कहना है कि देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध खासकर बलात्कार के इतने मामले आ रहे हैं कि लगता ही नहीं कहीं कोई सरकार भी है. वह कहती हैं कि जब तक महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकारें और पुलिस पूरी संजीदगी से काम नहीं करेंगी, स्थितियां ज्यों की त्यों बनी रहेंगी.

रंजना कुमारी ने कहा, राज्य कोई भी हो और वहां शासन किसी का भी हो, जिस तरह की व्यवस्था शासन और प्रशासन की होनी चाहिए थी, वह देखने को नहीं मिल रही है. जिस तरह से सरकारों को सारी तैयारी रखनी चाहिए थी, खासकर कोविड-19 के दौरान, वह भी देखने को नहीं मिली. महिलाओं के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ ही रही है और खुद ताजा आंकड़े इसकी गवाही देते हैं. उन्होंने कहा, हाथरस का मामला ही देखिए. आठ दिन लग जाते हैं प्राथमिकी दर्ज करने में और उसके बाद जो घटना आगे घटती है वह सारे देश को पता है. लड़की की मौत हो जाती है. उसके बाद मां-बाप को उसका चेहरा भी देखने को नहीं मिलता है और उसकी लाश पुलिस जला देती है.

महिला के साथ अत्याचार हो और सरकार उसके साथ खड़ी हो, पुलिस उसका सहयोग करे तो संदेश जाता है कि महिलाओं पर अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. लेकिन यह हो नहीं रहा है. बल्कि अपराधियों को बचाने और मामले को ढंकने की कोशिश में सरकार लगी हुई है. चाहे किसी भी पार्टी का शासन हो, जब तक महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस पूरी संजीदगी से काम नहीं करेगी, जिस तरीके से सरकार को करना चाहिए वैसे नहीं करेगी तो यही स्थिति रहेगी. महिलाएं जो मंत्री हैं या तमाम अन्य पदों पर बैठी हैं या चाहे राष्ट्रीय महिला आयोग हो, उनका रुख देखिए जैसे देश में कुछ हो ही नहीं रहा है.

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देश में निर्भया से भी खराब हालत हो चुकी है
स्थिति बद से बदतर हो गई है अब तो. निर्भया से भी बुरा हाल है. रही बात निर्भया फंड का तो उसका दुरुपयोग ही हुआ है सदुपयोग नहीं. निर्भया फंड के सिलसिले में जब हम रेल मंत्री से मिलने गए थे तो तत्कालीन रेल मंत्री ने कहा था कि हमने निर्भया फंड से स्टेशन पर कैमरा लगा दिया है. हमारे पास उनका यह बयान रिकॉर्ड में है. बाद में भी उस फंड का दुरुपयोग ही हुआ है, कोई सदुपयोग नहीं हुआ. निर्भया फंड को बढ़ाने की जगह धीरे-धीरे उसको समाप्त किया जा रहा है. किसी तरह की सोच ही नहीं है. ये नहीं चाहते हैं कि महिलाएं सुरक्षित हों. अगर यह चाह रहे होते तो कोई ऐसा कारण नहीं है की स्थिति ना सुधरे.

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हाथरस में जो कुछ हुआ उसके बाद महिला आयोग कहां है
महिला आयोग का जब गठन हो रहा था तभी हम लोगों ने कहा था कि एक इलेक्टोरल कोलाज बनाया जाए. जो महिलाएं महिला आंदोलन से जुड़ी हैं या महिला अधिकारों के संघर्ष में रही हैं, उनको महिला आयोग में रखा जाना चाहिए. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. यह एक तरीके से सरकारी संरक्षण का अड्डा बन गया है. महिला आयोग पॉलिटिकल पार्किंग लॉट है. यहां पर महिलाओं के प्रति कोई संजीदगी नहीं है. अगर होती तो आज पूरा महिला आयोग हाथरस में दिखना चाहिए था. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से उन्हें मिलना चाहिए था. दलित बच्ची के साथ जो हुआ है और जिस तरीके से उसके बाद स्थिति बन रही है कौन उनके साथ खड़ा है? महिला आयोग को खड़ा होना चाहिए था.
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