Birthday Ras Bihari Bose: वो बोस जिसने सुभाष को बनाकर दी आजाद हिंद फौज

रासबिहारी बोस (फाइल फोटो)

रासबिहारी बोस (फाइल फोटो)

रासबिहारी ऐसे क्रांतिकारी थे, जिनकी जिंदगी बहादुरी और साहस की घटनाओं से भरी हुई थी. वो अंग्रेजों से बचने के लिए जापान चले गए. वहां उन्होंने आजाद हिंद फौज बनाई, जिसका इस्तेमाल बाद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के खिलाफ किया.

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स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल से अपनी जिंदगी दांव पर लगाने वाले कई क्रांतिकारी हुए हैं. इनमें सूर्यसेन से लेकर प्रीतिलता वाडेदार, चितरंजन दास, खुदीराम बोस, सुभाष चंद बोस सहित अनेकों क्रांतिकारियों के नाम हैं. लेकिन इन सभी में रास बिहारी बोस ऐसा नाम हैं जिनकी जिंदगी किसी एक्शन रोमांचक फिल्म से कम नहीं है.

ब्रिटिश शासन के खिलाफ आज़ाद हिंद फौज की नींव रखने वाले रास बिहारी बोस ही थे. उनके जन्मदिवस पर पढ़िए उन किस्सों के बारे में जो आपको हैरान कर देंगे.


जापान में उनके नाम डिश का पेटेंट
आज़ादी की लड़ाई में बड़ा योगदान देने वाले रास बिहारी पर वायसरॉय लॉर्ड हार्डिंग के ऊपर बम फेंकने की साजिश में शामिल होने जैसे कई गंभीर आरोप थे. ब्रिटिश शासन से बचने के लिए वो साल 1915 में जापान चले गए थे. जापान में रहते हुए उन्होंने एक भारतीय व्यंजन को पेटेंट कराया था. जो आज भी वहां के मशहूर रेस्टोरेंट्स में परोसा जाता है. जापान में सुभाष चंद बोस के साथ रास बिहारी बोस एक ऐसा नाम है, जो खासा लोकप्रिय है.

वायसराय पर हमले की साजिश में शामिल

1886 में बंगाल के एक गांव में जन्मे रास बिहारी बचपन से ही तुनकमिज़ाज़ थे. 10वीं करने के बाद उन्होंने आर्मी में शामिल होने की ठानी. लेकिन उनके विचारों के कारण उन्हें नौकरी नहीं मिली. इसके बाद रास बिहारी को हिमाचल के कसौली में एक क्लर्क की नौकरी मिली. इसके बाद वो देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट (FRI) में शिफ्ट हो गए. बोस नौकरी भले ही ब्रिटिश शासन के अंतर्गत करते थे लेकिन उनके विचार तब भी क्रांतिकारी थे.



नौकरी के दौरान वो ब्रिटिश औपनिवेशवाद के खिलाफ सोच रखने वाले पंजाब और बंगाल में मौजूद दोस्तों के संपर्क में थे. देहरादून FRI में रहते हुए उन्होंने केमिकल पदार्थों के बारे में जबरदस्त जानकारी जुटाते हुए बम बनाना सीखा. दिल्ली में साल 1912 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर क्रांतिकारी बसंत कुमार बिस्वास ने बम फेंका था. बोस ने ही उस बम को बनाया था.

नौकरी के साथ जारी था क्रांति

वायसराय पर हमले के बाद उसी शाम रास बिहारी ट्रेन पकड़कर देहरादून चले गए. वहां FRI जाकर नौकरी करने लगे. कई महीनों तक बिना की ख़बर के वो वहां नौकरी करते रहे.

हैरानी की बात है कि हमले के कुछ महीनों बाद वायसराय लॉर्ड हार्डिंग मेहमान के तौर पर देहरादून के FRI आए. उनके सम्मान में रास बिहारी ने एक शानदार रिसेप्शन भी रखवाया था. इन तमाम बातों के किसी को भनक नहीं थी कि वायसराय पर हुए हमले के पीछे इसी शख्स का हाथ था.

साथियों की गिरफ्तारी के बाद हुए अंडरग्राउंड

रास बिहारी के कुछ क्रांतिकारी साथियों को ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद शक की सुई उन पर भी घूमी. गिरफ्तारी से बचने के लिए रास बिहारी वहां से चंदननगर चले गए. इसके बाद वो करीब एक साल अंडरग्राउंड रहे.

माना जाता है कि वो इस दौरान अपने घर और बनारस के बीच कहीं छिपे रहे थे. ब्रिटिश सरकार से बचने के लिए वो आखिरकार मई 1915 में जापान के लिए उड़ गए. साल 1916 में उन्हें जापान की नागरिकता भी मिल गई.

जापानी महिला से रचा ली शादी

रासबिहारी बोस जब जापान में रह रहे थे तो उन्होंने अपने इस प्रवास में एक जापानी महिला तोशिको सोमा से शादी कर ली. दरअसल जब वो जापान गए तो सोमा के ही मकान में रहना शुरू किया. जहां दोनों के बीच प्रेम हो गया. इस विवाह के कारण जापान में उन्हें एक अलग स्वीकार्यता भी मिली. उन्होंने फिर जापान की नागरिकता भी ले ली.

उन्होंने सोमा को बंगाली सिखाई. वो अक्सर समारोहों में बंगाली साड़ी पहने हुए दिख जातीं थीं. लेकिन बाद में बीमारी के कारण उनका निधन हो गया. इसके बाद रासबिहारी ने कोई शादी नहीं की. सोमा ने उन्हें एक बेटा और एक बेटी हुई. उनके बेटे ने जापान की ओर दूसरे विश्व युद्ध में हिस्सा लिया, जिसमें वो शहीद हो गया. बेटी अब भी जापान में रहती है.

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