लोकल को ग्लोबल बनाने के मोदी मंत्र से मिलेगी RSS के स्वदेशी आंदोलन को धार!

लोकल को ग्लोबल बनाने के मोदी मंत्र से मिलेगी RSS के स्वदेशी आंदोलन को धार!
पीएम मोदी के आह्ववान के बाद तेज हो सकता है स्वदेशी जागरण मंच का आंदोलन (File Photo)

चीन से आयात होने वाले सामान के खिलाफ आक्रामक रहा है संघ का स्वदेशी जागरण मंच, पीएम मोदी के आह्वान पर अब और तेज हो सकता है आंदोलन

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra modi) के ‘लोकल के लिए वोकल’ (vocal about local) बनने वाले मंत्र से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वदेशी आंदोलन को धार मिल सकती है. संघ से जुड़ा स्वदेशी जागरण मंच विदेशी, खासतौर पर चीन निर्मित सामानों का लंबे समय से विरोध करता रहा है. कोरोना लाकडाउन के दौरान भी उसने स्वदेशी संकल्प दिवस मनाया. उसने प्रधानमंत्री की इस पहल का स्वागत किया है. लेकिन, बड़ा सवाल ये है कि क्या स्वदेशी सामान चीन सहित दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता खत्म कर पाएगा? क्या स्वदेशी से भारत की जरूरतें पूरी हो सकती हैं.

देश के नाम संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, ‘हमें न सिर्फ लोकल प्रोडक्ट्स खरीदने हैं, बल्कि उनका गर्व से प्रचार भी करना है. मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा देश ऐसा कर सकता है. लोकल से ग्लोबल बनने का यह बड़ा अवसर है, इसलिए लोकल के लिए वोकल रहें.’

स्वदेशी जागरण मंच (Swadeshi Jagran Manch) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख दीपक शर्मा का कहना है कि पीएम मोदी की अपील के बाद स्वदेशी आंदोलन और तेज होगा. 28 अक्टूबर 2018 को हमने चीनी सामान के विरोध (Boycott Chinese products) में एक अभियान चलाया, जिसमें 1 करोड़ 10 लाख लोगों ने हस्ताक्षर किया. कोरोना की वजह से जनता का विदेशी सामानों के प्रति मोहभंग हो रहा है. हम स्वदेशी से ही आत्मनिर्भर बनेंगे. बीते 25 अप्रैल को हमने स्वदेशी संकल्प दिवस मनाया. अब इस आंदोलन को और तेज करके हमें आत्मनिर्भता की ओर बढ़ना होगा.



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चीनी सामान के खिलाफ काफी आक्रामक रहा है स्वदेशी जागरण मंच

हालांकि, वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु मिश्र कहते हैं कि बीजेपी की वाजपेयी सरकार में तो स्वदेशी के बिल्कुल विपरीत विनिवेश मंत्रालय बनाया गया. तब संघ और सरकार में टकराव खुलकर था. मोदी के पहले कार्यकाल में स्वदेशी के नाम पर सिर्फ ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम था, हालांकि, धरातल पर कुछ नहीं हुआ. लेकिन दूसरे कार्यकाल में कोरोना वायरस ने स्वदेशी का तड़का लगाने का मौका दे दिया है. इस अवसर को सरकार ने लपक लिया. इससे संघ भी खुश हो गया और देश के लोग भी. यह परिस्थिति के अनुरूप चला गया सियासी दांव है.

मिश्र कहते हैं कि कोरोना की वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चौपट हुई पड़ी है. कोई भी देश ऐसी चीजों के आयात से बचेगा जो बहुत जरूरी न हो. ऐसे में पूरी दुनिया स्वदेशी-स्वदेशी खेलेगी. भारत में स्वदेशी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए. यहां लालफीताशाही है. उसे कैसे खत्म किया जाएगा. क्या आसानी से यहां पर कोई भी व्यक्ति कारोबार शुरू कर पाता है. साल-साल भर लोगों को  लोन नहीं मिलता. हालांकि, यह बात सत्य है कि कोरोना काल में चीन के सामान को लेकर लोगों का मोहभंग हुआ है. अब पीएम मोदी के संबोधन के बाद स्वदेशी जागरण मंच के आंदोलन को ऊर्जा तो मिलेगी ही.

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पीएम मोदी ने किया है स्वदेशी का आह्ववान


दूसरी ओर, वरिष्ठ पत्रकार आलोक भदौरिया कहते हैं कि स्वदेशी की बात करना और अच्छे गुणवत्ता के सामान की खपत करना दोनों में अंतर होता है. क्या स्वदेशी सामान की गुणवत्ता बहुराष्ट्रीय कंपनी (multinational companies) के समकक्ष है? यह बड़ा सवाल है. सिर्फ उत्पादन करना बड़ी बात नहीं है. मांग कैसे पैदा करेंगे इस पर फोकस करना होगा. गांवों में लोगों के पास पैसा नहीं है. क्रय शक्ति बढ़ानी है तो ग्रामीणों की जेब में पैसा डालना होगा.

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