Home /News /nation /

कोरोना वायरस के नए वेरिएंट से फिर संक्रमण का खतरा! कारण और इलाज को लेकर डॉक्टर्स ने दिए ये 6 अहम सुझाव

कोरोना वायरस के नए वेरिएंट से फिर संक्रमण का खतरा! कारण और इलाज को लेकर डॉक्टर्स ने दिए ये 6 अहम सुझाव

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

Re-Infected With Coronavirus: कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ने लोगों को फिर से संक्रमित किया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती जांच में यह पता चला है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट से दोबारा संक्रमित होने का खतरा रहता है, खासकर वे लोग जिन्हें पहले कोविड हुआ था वे आसानी से पुनः संक्रमण का शिकार हो सकते हैं. हालांकि इस बारे में बहुत सीमित जानकारी है. इस बारे में हेल्थ एक्सपर्ट्स और मेडिकल विशेषज्ञ ने अहम सुझाव दिए हैं.

अधिक पढ़ें ...

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) के ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) ने दुनियाभर में लोगों को तेजी से संक्रमित किया. इस वेरिएंट ने उन लोगों को भी अपना शिकार बनाया जिन्हें पहले कोविड (Covid) हो चुका था या वे वैक्सीन (Vaccine) लगवा चुके थे. इस तथ्य के सामने आने के बाद अब इस बात की आशंका बढ़ गई है कि कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वेरिएंट या भविष्य में आने वाले अन्य वेरिएंट लोगों को पुनः संक्रमित कर सकते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती जांच में यह पता चला है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट से दोबारा संक्रमित होने का खतरा रहता है, खासकर वे लोग जिन्हें पहले कोविड हुआ था वे आसानी से पुनः संक्रमण का शिकार हो सकते हैं. हालांकि इस बारे में बहुत सीमित जानकारी है.

कोविड रिइंफेक्शन क्या है?

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के अनुसार, चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ मनोज गोयल का कहना है कि, कोविड से पुनः संक्रमित होने को इस तरह से परिभाषित किया जा सकता है जब कोरोना से पूर्व में संक्रमित हुआ व्यक्ति दोबारा संक्रमण का शिकार हो जाए. हालांकि हल्के लक्षण होने के कारण पुनः संक्रमण के मामलों को पहचानना मुश्किल होता है क्योंकि वह व्यक्ति कोविड टेस्ट नहीं कराता है.

हालांकि कोरोना की तीसरी लहर में पुनः संक्रमण के कई मामले देखने को मिले हैं.

कितने वक्त में होते हैं लोग पुनः संक्रमण के शिकार?

कोरोनावायरस की शुरुआत के बाद से अलग-अलग शोधकर्ता अलग-अलग डेटा लेकर आए हैं. अक्टूबर 2021 के एक अध्ययन से पता चलता है कि जो लोग COVID-19 से ठीक हो जाते हैं उनमें इम्युनिटी लगभग 3 महीने से 5 साल तक रह सकती है. वहीं एक अन्य स्टडी में पता चला है कि इम्युनिटी 8 महीने तक बरकरार रह सकती है. यानि की इस अवधि के गुजर जाने के बाद कोरोना वायरस से पुनः संक्रमित होने की संभावना रहती है.

Coronavirus: इस देश में कोरोना संक्रमित दोबारा हो रहे कोविड का शिकार, जानें क्या हैं बीमारी के लक्षण

नेचुरल इम्युनिटी का असर कब तक बरकरार रहता है?

वे लोग जो COVID-19 संक्रमण से संक्रमित होने के बाद स्वस्थ हो गए हैं. उनमें SARs-COV-2 वायरस के खिलाफ एक निश्चित स्तर इम्युनिटी की उम्मीद की जा सकती है. जिसका मतलब है कि वे बार-बार होने वाले संक्रमण से सुरक्षित हैं. हालांकि फिर भी हेल्थ एक्सपर्ट्स और डॉक्टर जरूरी उपायों को अपनाने की अपील करते हैं.

इम्युनिटी लेवल कम होने का क्या कारण है?

फिलहाल, दुनियाभर में वैज्ञानिक और मेडिक एक्सपर्ट्स यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि नेचुरल इंफेक्शन या वैक्सीन से मिलने वाली इम्युनिटी कितने समय तक प्रभावी रहती है. जबकि नेचुरल इम्युनिटी की अवधि निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है. डॉ गोयल का सुझाव है कि यह 3 से 12 महीने तक चल सकती है.

डॉ गोयल का मत है कि प्रोटेक्टिव एंटीबॉडी और टी कोशिकाओं के स्तर में गिरावट के कारण इम्युनिटी धीरे-धीरे समय के साथ कम हो जाती है.

किसी व्यक्ति को COVID पुन: संक्रमण का सबसे अधिक खतरा कब होता है?

कोरोना वायरस से पुनः संक्रमित होने से बचने के लिए कोविड अनुरुप व्यवहार का पालन करना जरूरी है. डॉ गोयल के अनुसार, वह व्यक्ति जो कोविड सुरक्षात्मक व्यवहार का पालन नहीं कर रहा है, जिन्होंने समय पर टीकाकरण नहीं कराया है. वृद्धावस्था, मधुमेह के रोगियों, हृदय, फेफड़ों की बीमारी और कैंसर से पीड़ित लोगों में कोरोना वायरस के पुन: संक्रमण का खतरा अधिक रहता है. इसलिए जरूरी है कि कोरोना संबंधी नियमों का पालन और समय पर वैक्सीनेशन कराया जाए.

Tags: Coronavirus, Omicron

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर