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भीमा-कोरेगांव केस: 6 सितंबर तक नज़रबंद रहेंगे वामपंथी विचारक, जानें 11 बड़ी बातें

भीमा-कोरेगांव केस: 6 सितंबर तक नज़रबंद रहेंगे वामपंथी विचारक, जानें 11 बड़ी बातें

देश में एससी/एसटी आबादी 25.2 फीसदी है (image credit: PTI)

देश में एससी/एसटी आबादी 25.2 फीसदी है (image credit: PTI)

भीमा-कोरेगांव मामले में पांच वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच में बुधवार को सुनवाई हुई. कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा, वरवर राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा और वरनोन गोंजालवेस की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है.

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    भीमा-कोरेगांव मामले में पांच वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच में बुधवार को सुनवाई हुई. कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा और वरनोन गोंजालवेस की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है. कोर्ट ने पांचों वामपंथी विचारकों को 6 सितंबर तक हाउस अरेस्ट में रखने के आदेश दिए हैं. इस मामले में अगली सुनवाई 6 सितंबर को होगी.

    जानें, पूरे मामले की 11 बड़ी बातें:-

    1## हाउस अरेस्ट पर हैं ये प्रबुद्ध वामपंथी विचारक

    महाराष्ट्र पुलिस ने मंगलवार को कई राज्यों में छापेमारी कर माओवादियों से संबंध के संदेह में पांच प्रबुद्ध वामपंथी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं में रांची से फादर स्टेन स्वामी, हैदराबाद से वामपंथी विचारक और कवि वरवरा राव, फरीदाबाद से सुधा भारद्धाज, मुंबई से अरुण फरेरा और दिल्ली से सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलाख को गिरफ्तार किया गया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अब हाउस अरेस्ट पर रखा जाएगा.

    2## कहां-कहां से महाराष्ट्र पुलिस ने की गिरफ्तारियां?

    भीमा-कोरेगांव मामले में पुणे पुलिस की ओर से अब तक कुल 5 गिरफ्तारियां की गई हैं. दिल्ली, हरियाणा और हैदराबाद से 1-1 गिरफ्तारी की गई, जबकि मुंबई से 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

    3## किस आधार पर पुलिस ने की ये गिरफ्तारियां?

    पुलिस ने भीमा-कोरेगांव से जुड़ी गिरफ्तारियों पर कहा है कि नक्सलियों से संपर्क और जून में गिरफ्तार पांच लोगों से संबंध रखने वालों के घरों पर छापे मारे गए. संदिग्धों के वित्तीय लेनदेन और संचार के तरीकों की छानबीन भी की जा रही है. सभी आरोपियों पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून यानी यूएपीए के तहत मामला दर्ज़ किया गया है. पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार हुए पांच लोगों पर नज़र रखी जा रही थी और एक हफ्ते से उनकी हर एक हरकत पर निगरानी थी.

    4## गृह मंत्रालय का बयान

    वामपंथी विचारकों को गिरफ्तार करने के लिए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र पुलिस का समर्थन किया है. गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गिरफ्तार आरोपी नक्सलियों की सहायता कर रहे थे, ये दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं. गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सीएनएन न्यूज 18 को बताया, 'महाराष्ट्र पुलिस के पास इस बात के सबूत हैं कि इन लोगों ने ऐसे संगठनों के साथ गठजोड़ करना शुरू कर दिया है. जिनका वामपंथी विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है. दोनों के बीच केवल इतनी समानता है कि दोनों का दुश्मन एक ही है.'

    5## एनएचआरसी की महाराष्ट्र सरकार और राज्य पुलिस प्रमुख को नोटिस

    इस बीच एनएचआरसी ने महाराष्ट्र सरकार और राज्य के पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी किया. आयोग ने कहा कि ऐसा लगता है कि पांच कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का ठीक तरीके से पालन नहीं किया गया और ये उनके मानवाधिकारों को उल्लंघन हो सकता है. महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को चार हफ्ते के भीतर मामले में एक तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है.

    6## तेलुगू कवि वरवर राव इस मामले में संलिप्त पाए गए?

    इस साल अप्रैल में पुणे पुलिस ने माओवादी नेता की ओर से लिखे गए एक कथित पत्र को जब्त किया था जिसमें देश में विभिन्न नक्सल गतिविधियों के लिए प्रतिष्ठित तेलुगू कवि वरवर राव के कथित मार्गदर्शन के लिए उनकी तारीफ की थी. राव उन पांच लोगों में शामिल हैं जिन्हें माओवादियों के साथ संदिग्ध जुड़ाव के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. महाराष्ट्र पुलिस ने कई राज्यों में प्रतिष्ठित वामपंथी कार्यकर्ताओं के घरों पर छापेमारी के बाद ये गिरफ्तारियां की हैं. कॉमरेड मिलिंद की ओर से हिन्दी में लिखे पत्र में राव की तारीफ करते हुए उन्हें वरिष्ठ कॉमरेड बताया गया है. पत्र में कहा गया, 'पिछले कुछ महीनों के दौरान वरिष्ठ कॉमरेड वरवर राव और हमारे कानूनी सलाहकार कॉमरेड वकील सुरेंद्र गाडलिंग की विभिन्न गतिविधियों में मार्गदर्शन की वजह से हमें राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रचार मिला है.'

    7्## जून में पांच लोग गिरफ्तार किए गए थे

    भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच के दौरान पुणे पुलिस ने इसी साल जून में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था. इन पर प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से संबंध रखने का आरोप है. तब सुधीर धवले, वकील सुरेंद्र गाडलिंग, कार्यकर्ता महेश राउत, शोमा सेन और रोना विल्सन को मुंबई, नागपुर एवं दिल्ली से गिरफ्तार किया था.

    8## सरकार पर लग रहे आरोप

    माओवादियों से संपर्क रखने के संदेह में गिरफ्तार ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज ने कहा है कि मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ बोलने वाले और दलितों और आदिवासियों के लिए लड़ने वाले लोगों को 'मौजूदा सरकार' निशाना बना रही है. वहीं, प्रसिद्ध लेखक और विचारक वरवर राव के परिवार ने उनकी पुणे पुलिस की ओर से की गई गिरफ्तारी को अवैध कार्रवाई करार दिया है. सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा ने अपनी गिरफ्तारी को सरकार की राजनीतिक चाल बताया है.

     

     

     

    9## हाउस अरेस्ट पर ट्विंकल खन्ना की प्रतिक्रिया

    वामपंथी विचारकों के हाउस अरेस्ट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. जानी-मानी बॉलीवुड एक्ट्रेस ट्विंकल खन्ना ने भी अपनी बात रखी है. अपने सेंस ऑफ ह्यूमर के लिए जानी जाने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस ट्विंकल खन्ना ने वामपंथी विचारकों के हाउस अरेस्ट पर ट्वीट किया , 'आज़ादी एक साथ कभी नहीं छीनी जाती है. ये एक-एक कर छीनी जाती है, एक समय पर केवल एक, एक सामाजिक कार्यकर्ता, एक वकील, एक लेखक और फिर एक-एक कर हम सब.'

    10## रोमिला थापर और चार अन्य पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

    पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में इतिहासकार रोमिला थापर और चार अन्य कार्यकर्ताओं ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की. रोमिला के अलावा याचिका करने वालों में प्रभात पटनायक, देवकी जैन, सतीश देशपांडे और माजा दारुवाला शामिल हैं. न्यायालय में दायर याचिका में इन कार्यकर्ताओं की रिहाई का अनुरोध किया गया है. साथ ही मामले की स्वतंत्र जांच कराने का भी अनुरोध याचिका में किया गया है.

    11## क्या है पूरा मामला

    साल 2018 में भीमा-कोरेगांव युद्ध का 200वां साल था. ऐसे में इस बार यहां भारी संख्या में दलित समुदाय के लोग जमा हुए थे. जश्न के दौरान दलित और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस दौरान इस घटना में एक शख्स की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हो गए थे. इस बार यहां दलित और बहुजन समुदाय के लोगों ने एल्गार परिषद के नाम से शनिवार वाड़ा में कई जनसभाएं की. शनिवार वाड़ा 1818 तक पेशवा की सीट रही है. जनसभा में मुद्दे हिन्दुत्व राजनीति के खिलाफ थे. इस मौके पर कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण भी दिए थे और इसी दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी.

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