तो सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इस कारण टाल दिया जस्टिस जोसेफ के नाम पर फैसला

Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: May 2, 2018, 11:42 PM IST
तो सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इस कारण टाल दिया जस्टिस जोसेफ के नाम पर फैसला
जस्टिस जोसेफ जुलाई 2014 से उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं (फाइल)

जस्टिस जोसेफ इस साल जून में साठ साल के हो जाएंगे. वह जुलाई 2014 से उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं. वह उत्तराखंड हाईकोर्ट की उस बेंच के प्रमुख थे, जिसने 2016 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया था.

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ को शीर्ष अदालत का जज बनाने की अपनी सिफारिश दोबारा भेजने का फैसला फिलहाल टाल दिया है. सूत्रों के मुताबिक, कॉलेजियम के इस कदम के पीछे प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को लिखी गई केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद की दूसरी चिट्ठी अहम वजह रही है.

दरअसल जस्टिस केएम जोसेफ के मामले पर कानून मंत्री ने CJI को पहली चिट्ठी 26 अप्रैल और फिर 30 अप्रैल को दूसरी चिट्ठी लिखी थी. सुप्रीम कोर्ट से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि पहली चिट्ठी की भाषा को कुछ जजों ने 'टकराव' वाला माना था, वहीं इस दूसरी चिट्ठी की भाषा पहले के मुकाबले काफी 'हल्के-फुल्के स्वभाव' की थी.

इस दूसरी चिट्ठी में सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को यह बताने की कोशिश की गई थी कि वह न्यायपालिका की स्वतंत्रता का पूरा सम्मान करती है, लेकिन कुछ वैध कारणों की वजह से वह जस्टिस जोसेफ का नाम पुनर्विचार के लिए वापस भेज रही है. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बुधवार को अहम बैठक हुई.

कॉलेजियम प्रस्ताव में कहा गया कि बैठक के एजेंडे में उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ के मामले पर दोबारा विचार करने और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व की अवधारणा के मद्देनजर शीर्ष अदालत में तरक्की के लिए कलकत्ता, राजस्थान और आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना हाईकोर्ट के जजों के नामों पर विचार करना शामिल था.

एक अधिकारी ने बताया कि कॉलेजियम की बैठक में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के दोनों पत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई. इस दौरान जस्टिस जोसेफ का मामला भी उठा, हालांकि प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जज के लिए प्रस्तावित दूसरे जजों के नाम पर फैसला हो जाए. उसके बाद ये सारे नाम एक साथ भेज दिए जाएंगे. वहीं जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ भी इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा पर राजी हो गए और इस तरह यह बैठक स्थगित कर दी गई.

सूत्रों के मुताबिक, अब अगले हफ्ते कॉलेजियम की फिर बैठक होगी. वहीं इस बैठक में शामिल जजों ने कहा कि वे एजेंडा में शामिल विषयों पर और ज्यादा इनपुट्स के साथ वापस आएंगे.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने इस साल दस जनवरी को जस्टिस जोसेफ और वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की शिफारिश की थी. हालांकि सरकार ने इंदु मल्होत्रा के नाम पर तो मंजूरी दे दी, लेकिन जोसेफ के नाम पर फिर से विचार करने को कहा था. केंद्र ने उनकी वरिष्ठता पर भी सवाल उठाया था और कहा, 'वह अखिल भारतीय आधार पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संयुक्त वरिष्ठता में 42 वें स्थान पर आते हैं.'
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बता दें कि जस्टिस जोसेफ इस साल जून में साठ साल के हो जाएंगे. वह जुलाई 2014 से उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं. वह उत्तराखंड हाईकोर्ट की उस बेंच के प्रमुख थे, जिसने 2016 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया था.

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First published: May 2, 2018, 11:42 PM IST
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