OPINION: शिवसेना के लिए जनाधार और बीजेपी के लिए सम्मान की लड़ाई है महाराष्ट्र निकाय चुनाव

एनसीपी चीफ शरद पवार के साथ उद्धव ठाकरे (PTI)

एनसीपी चीफ शरद पवार के साथ उद्धव ठाकरे (PTI)

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार (MVA) और बीजेपी दोनों के लिए ये निकाय चुनाव (Maharashtra Municipal Corporation Elections) बहुत मायने रखते हैं. एवीए और बीजेपी दोनों का इन चुनावों में बहुत कुछ दांव पर है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2021, 12:35 PM IST
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(धवल कुलकर्णी)

महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महा विकास अघाडी (MVA) इस साल होने वाले नगर निगम चुनावों (Maharashtra Municipal Corporation Elections) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ रणनीतिक रूप से मुकाबला करने की तैयारी कर रहा है. शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) स्थानीय निकाय चुनाव एकसाथ मिलकर लड़ने का ऐलान कर चुकी है, जबकि कांग्रेस जल्द ही इस बारे में फैसला लेगी कि वह इस गठबंधन के हिस्से के रूप में चुनाव लड़ना चाहती है या नहीं.

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले महाविकास अघाड़ी सरकार और बीजेपी दोनों के लिए ये निकाय चुनाव बहुत मायने रखते हैं. एवीए और बीजेपी दोनों का इन चुनावों में बहुत कुछ दांव पर है.

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इस साल पांच नगर निगमों, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, वसई-विरार, कोल्हापुर और औरंगाबाद में चुनाव होने वाले हैं. इनमें से तीन शहर मुंबई के दायरे में आते हैं और इसके विस्तारित उपनगरों का हिस्सा हैं. ये चुनाव 27 नगर निगमों में से 18 के लिए सेमीफाइनल और 26 जिला परिषदों (जिला बोर्डों) में होने वाले चुनाव होंगे, जो मिनी विधानसभा चुनाव की तर्ज पर लड़े जाएंगे.

इन 18 नगर निगमों में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) शामिल है, जो एशिया में सबसे अमीर मानी है. इनमें मुंबई, ठाणे, पुणे, पिंपरी-चिंचवाड़, नासिक, नागपुर, पनवेल, मीरा-भायंदर और शिवसेना के नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण मालेगांव शामिल है.


शिवसेना और बीजेपी जो 2019 में कड़वे मनमुटाव से गुजरी थी, दोबारा सत्ता में आने के लिए एनसीपी और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के लिए भी राजी हो गई है. इन नगर निकायों को नियंत्रित करने के लिए सभी पार्टियां अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ रही हैं. खासकर मुंबई और ठाणे में.



इसलिए इस साल के स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम की व्याख्या एमवीए शासन पर एक लोकप्रिय जनमत संग्रह के रूप में की जाएगी, जिसका नेतृत्व शिवसेना अध्यक्ष और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कर रहे हैं. ये निकाय चुनाव बीजेपी के दावों का भी परीक्षण करेंगे कि राज्य सरकार अपने स्वयं के विरोधाभासों के वजन में ढह जाएगी.

बीजेपी भी एक कठिन परीक्षा का सामना कर रही है. यह लंबे समय से प्रचारित किया गया है कि बीजेपी की चुनावी सफलता मोटे तौर पर एक 'आउटसोर्सिंग मॉडल' के माध्यम से संचालित होती है, जिसमें शक्तिशाली नेताओं को शामिल करना शामिल है. 2014 में केंद्र और महाराष्ट्र में सत्ता में आने के बाद मोदी की लहर में बड़े पैमाने पर धीरे-धीरे शक्तिशाली क्षेत्रीय क्षत्रपों को अपने पाले में कर लिया. इसमें तत्कालीन विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल, सतारा शाही परिवार के नेता उदयनराजे भोसले, पूर्व मंत्री गणेश नाइक, मधुकरराव पिचाड और अन्य शामिल थे.

बीजेपी खेमे में खासतौर पर वफादारों से सवाल है कि अगर हालिया होने वाले चुनावों के नतीजों में बीजेपी को सफलता न मिली, तो विधानसभा में सबसे बड़ी होने के बावजूद उसे विपक्षी बेंच पर बैठना होगा.


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हालांकि, एमवीए ने स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से विधान परिषद के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है. इन चुनावों में एक सीमित चुनावी कॉलेज था. इसी तरह, सभी राजनीतिक दलों ने इस साल के शुरू में हुए ग्राम पंचायत (ग्राम परिषद) चुनावों में अधिकतम सीटें जीतने के दावे किए हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि ये चुनाव पार्टी के प्रतीकों पर आयोजित नहीं किए जाते हैं.

मंगलवार को सांगली नगर निगम में मेयर पद के चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी भी बीजेपी को टक्कर देने में कामयाब रहे, लेकिन नगर निगम के चुनाव एमवीए और बीजेपी के जनादेश की मांग करने वाले लोगों के लिए पहली बार हैं.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. अंग्रेजी में पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
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