पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को मिला डोमिसाइल सर्टिफिकेट, खत्म हुआ दशकों का संघर्ष

पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को मिला डोमिसाइल सर्टिफिकेट, खत्म हुआ दशकों का संघर्ष
PAK से आए शरणार्थियों को मिला डोमिसाइल सर्टिफिकेट (फाइल फोटो)

मंडलीय स्तर के एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिमी पाकिस्तान (Pakistan) से आए 1,900 से अधिक लोगों को अधिवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate) दिए जा चुके हैं और उन सभी को नागरिकता प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया जारी है.

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कश्मीर. गारो राम (64) की आंखें उस समय नम हो गईं जब उन्हें जम्मू-कश्मीर का 'मूल निवासी' घोषित करने वाला अधिवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate) थमाया गया. कागज के इस टुकड़े से उन्हें इस केन्द्र शासित प्रदेश में मतदान करने, संपत्ति खरीदने और सरकारी नौकरी का अधिकार हासिल हो गया. मंडलीय स्तर के एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिमी पाकिस्तान (Pakistan) से आए 1,900 से अधिक लोगों को अधिवास प्रमाण पत्र दिए जा चुके हैं और उन सभी को नागरिकता प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया जारी है.

अधिकारी ने कहा, 'हम सुनिश्चित करेंगे कि पश्चिमी पाकिस्तान से आया कोई भी शरणार्थी न छूटे. हम उन सभी को अधिवास प्रमाण पत्र देंगे.' राम, सीमावर्ती आर एस पुरा के नजदीक रंगपुर सिदरिया में पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों से संबंधित बस्ती में गारे से बने मकान में रहते हैं. उन्होंने कहा कि हिंदुओं को देश में न्याय हासिल करने में 72 साल लग गए और कागज का यह टुकड़ा इस समुयदाय में नयी उम्मीद जगाता है. उन्होंने कहा, 'यह मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन है. इससे हमारी युवा पीढ़ी की किस्मत बदल जाएगी. अब वे हमारी तरह अवांछित नागरिक के तौर पर नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर के सम्मानित निवासी के तौर पर जीवन गुजार सकेंगे. हमने तो ऐसे ही 72 साल काट लिए.'

विहीन लोगों की तरह जीवन जी रहे 1.5 लाख शरणार्थी



जम्मू-कश्मीर में पश्चिमी पाकिस्तान से आए लगभग 1.5 लाख शरणार्थी भारत में बीते 70 से अधिक वर्षों से राज्य विहीन लोगों की तरह जीवन जी रहे हैं. न तो उन्हें सरकारी नौकरियां मिलीं, न छात्रवृत्ति, न कॉलेजों में दाखिला, न कल्याणाकारी योजनाओं का लाभ और नहीं अपनी संपत्ति खरीदने का अधिकार. शरणार्थियों के युवा अधिकतर अशिक्षित हैं. आर एस पुरा, सांबा, हीरानगर और जम्मू के सीमावर्ती इलाकों में खेतों में मजदूरी करके गुजर-बसर कर रहे हैं जबकि बुजुर्ग लोग घरेलू सहायक के तौर पर काम करते हैं और कुछ मामलों में बच्चे भीख मांगते पाए गए हैं.
अरनिया के गणेश चंदर ने कहा, 'अब हमारे बच्चे संपत्ति खरीद सकते हैं, शिक्षा हासिल कर सकते हैं और मतदान भी कर सकते हैं. वे आरक्षण सुविधाओं के जरिये पेशेवर कॉलेजों में दाखिला भी ले सकते हैं. हमने जो सहा है वे वह सबकुछ नहीं सहेंगे.' उन्होंने कहा, 'हमें इस बात की बेहद खुशी है कि हमें आखिरकार जम्मू-कश्मीर का मूल निवासी मान लिया गया है. हमारे युवाओं के बीच इससे नयी उम्मीद जगी है, जो अब अधिकारी बन पाएंगे और नौकरियां हासिल कर सकेंगे.'

शरणार्थियों ने अनुच्छेद 370 हटाकर न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उपराज्यपाल जी सी मुर्मू को धन्यवाद दिया. वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी एक्शन कमेटी (डब्ल्यूपीआरएसी) के अध्यक्ष लाभा राम गांधी ने कहा, 'हमारे लोगों ने पांच अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की तरह जश्न मनाने का फैसला लिया है. हमें आजादी के 73 साल बाद असली स्वतंत्रता मिली है. यह हमारी दीपावली है.' गांधी ने कहा, 'हमें बुनियादी जरूरतों और भारत में रहने का अधिकार पाने के लिये संघर्ष करना पड़ा.'

जम्मू-कश्मीर से खत्म किया था अनुच्छेद 370

उन्होंने कहा, 'अगर पश्चिमी पाकिस्तान से आकर दिल्ली में बसे आई के गुजराल प्रधानमंत्री बन सकते हैं, तो जम्मू-कश्मीर में पश्चिमी पाकिस्तान शरणार्थियों को कम से कम यहां रहने, शिक्षा और रोजगार हासिल करने, जमीन खरीदने और मतदान करने का अधिकार तो मिलना चाहिये.' शरणार्थियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उपराज्यपाल जी सी मुर्मू को अनुच्छेद 370 को खत्म करके न्याय सुनिश्चित करने के लिए धन्यवाद दिया.
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