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कश्मीरी पंडितों की सरकार से मांग- दूसरों को निवास प्रमाणपत्र जारी करने से पहले हमें घाटी में बसाएं

कश्मीरी पंडितों की सरकार से मांग- दूसरों को निवास प्रमाणपत्र जारी करने से पहले हमें घाटी में बसाएं

कश्मीरी पंडितों के संगठन ने उनके पुनर्वास का मुद्दा फिर से उठाया है (सांकेतिक फोटो, AP)

कश्मीरी पंडितों के संगठन ने उनके पुनर्वास का मुद्दा फिर से उठाया है (सांकेतिक फोटो, AP)

संगठन ने कहा कि कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) को बसाने से पहले बाहरियों को निवासी होने का प्रमाण पत्र जारी किया जाना लोकतांत्रिक (Democratic), संवैधानिक और मानव अधिकारों (Human Rights) का उल्लंघन करता है.

    श्रीनगर. प्रवासी कश्मीरी पंडितों (Migrant Kashmiri Pandits) ने रविवार को बाहरी लोगों को जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) का निवासी होने का प्रमाणपत्र (domicile certificates) जारी किए जाने से पहले अपनी मातृभूमि (homeland) पर वापसी और फिर से कश्मीर में बसाए जाने की मांग की है. सतीश महलदार के नेतृत्व वाले प्रवासी कश्मीरी पंडितों के एक संगठन ने रविवार को समाधान, वापसी और प्रवासियों के पुनर्वास (Rehabilitation) की मांग की. उन्होंने एक बयान में कहा, हम कश्मीरी पंडितों को घाटी (Valley) में पुनर्वास मिलने तक निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाने पर रोक लगाने की मांग करते हैं.

    उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि भारत सरकार (Indian Government), कश्मीरी पंडितों की कीमत पर गैर-निवासियों और शरणार्थियों (refugees) को खुश करने में व्यस्त है. वर्तमान सरकार ने कहा था कि प्रवासी और विस्थापित कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) को घाटी के दस जिलों में बसाया जायेगा. लेकिन अभी तक इस बारे में कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है."

    "कश्मीरी पंडितों को बसाने से पहले अन्य को निवास प्रमाण पत्र देना अधिकारों का उल्लंघन"
    एक जारी बयान में कहा गया, "हम मांग करते हैं कि भारत सरकार तुरंत कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की नीति के साथ सामने आए. किसी भी व्यक्ति को निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाने से पहले इसकी घोषणा की जानी चाहिए. निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाना चाहिए."

    संगठन ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को बसाने से पहले बाहरियों को निवासी होने का प्रमाण पत्र जारी किया जाना लोकतांत्रिक, संवैधानिक और मानवीय अधिकारों का उल्लंघन करता है.

    "पिछले 31 सालों से नकारे जा रहे हैं कश्मीरी पंडितों के मौलिक-संवैधानिक अधिकार"
    जारी किए गए बयान में कहा गया, "हमारे मौलिक और संवैधानिक अधिकार पिछले 31 सालों से नकारे गए हैं. और हमें वापस भेजने से पहले निवास प्रमाण पत्र जारी करना सभी मूलभूत संवैधानिक और मानव अधिकारों का उल्लंघन है."

    "मानव अधिकारों का उल्लंघन शरणार्थियों के वहां से जाने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा और स्वैच्छिक वापसी घर में बाधा उत्पन्न करने वाला एक प्रमुख कारक है. इसलिए उनके मूल स्थानों पर उनके मानव अधिकारों की रक्षा करना समस्याओं की रोकथाम और उनके समाधान के लिए महत्वपूर्ण है."

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    बयान में यह भी कहा गया है, "वे (सरकारें) उस राज्य की स्वायत्तता की रक्षा करने में भी विफल रहे, जो विलय के समय दिया गया था. कश्मीर पूरी तरह से खराब स्थिति में है और हर कश्मीरी का पहला कर्तव्य किसी भी घुसपैठिए के खिलाफ अपनी मातृभूमि की रक्षा करना है.

    Tags: Human rights, Indian Government, Jammu and kashmir, Kashmir Valley, Kashmiri Pandits

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