जेसिका लाल और प्रियदर्शिनी मट्टू के हत्यारों की नहीं होगी रिहाई

समीक्षा बोर्ड में जेल महानिदेशक, गृह सचिव, राज्य कानून सचिव, एक जिला जज और सरकार के मुख्य परिवीक्षा अधिकारी और दिल्ली पुलिस के एक संयुक्त रैंक के अधिकारी इसके अन्य सदस्य होते हैं.

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Updated: July 20, 2019, 4:25 AM IST
जेसिका लाल और प्रियदर्शिनी मट्टू के हत्यारों की नहीं होगी रिहाई
दोषी मनु शर्मा की फाइल फोटो
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Updated: July 20, 2019, 4:25 AM IST
मॉडल जेसिका लाल और छात्रा प्रियदर्शनी मट्टू के हत्यारों की रिहाई के अनुरोध को दिल्ली दंड समीक्षा बोर्ड ने ठुकरा दिया. समाचार एजेंसी PTI के अनुसार यह जानकारी सूत्रों ने दी है. सूत्रों ने कहा कि जेसिका हत्याकांड में दोषी मनु शर्मा और प्रियदर्शनी के हत्यारे संतोष सिंह उन 204 दोषियों में शामिल हैं जिन्होंने रिहाई के लिये बोर्ड के समक्ष अनुरोध किया था. दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन बोर्ड के अध्यक्ष हैं.

सूत्रों के अनुसार बोर्ड ने 59 दोषियों की रिहाई के अनुरोध को मंजूरी दे दी और ऐसे 145 अनुरोधों को ठुकरा दिया.

बता दें 30 अप्रैल, 1999 की रात को दक्षिणी दिल्ली के महरौली इलाके में कुतुब कोलोनाडे में सोशलाइट बीना रमानी के स्वामित्व वाली इमली कोर्ट के रेस्तरां में शराब परोसने से इनकार करने के बाद जेसिका लाल को शर्मा ने गोली मार दी थी.

शर्मा 21 साल से अधिक समय से जेल में हैं और इससे पहले अक्टूबर में बोर्ड द्वारा उनकी याचिका खारिज करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था.

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हाईकोर्ट ने दिया था विचार करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने जनवरी में AAP सरकार को शर्मा की समयपूर्व रिहाई के अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया था. पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा के बेटे शर्मा को दिसंबर, 2006 में हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
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ट्रायल कोर्ट ने उन्हें पहले ही बरी कर दिया था, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश को पलट दिया था और सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल, 2010 में उनके आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था. दूसरी तरफ, संतोष सिंह जनवरी 1996 में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा प्रियदर्शनी मट्टू के साथ बलात्कार और हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है.

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यह है पूरा मामला

दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून के छात्र रहे सिंह को 3 दिसंबर, 1999 को इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 अक्टूबर, 2006 को फैसले को पलट दिया था, जिसमें उसे बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया गया था और मौत की सजा दी गई थी.

एक पूर्व आईपीएस अधिकारी के बेटे सिंह ने हाईकोर्ट द्वारा दी गई उनकी सजा और मौत की सजा को चुनौती दी थी. अक्टूबर 2010 में, सुप्रीम कोर्ट ने सिंह को दोषी माना लेकिन मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया था.

समीक्षा बोर्ड में जेल महानिदेशक, गृह सचिव, राज्य कानून सचिव, एक जिला जज और सरकार के मुख्य परिवीक्षा अधिकारी और दिल्ली पुलिस के एक संयुक्त रैंक के अधिकारी इसके अन्य सदस्य होते हैं.

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First published: July 20, 2019, 4:22 AM IST
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