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भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: गौतम नवलखा को 15 अक्‍टूबर तक गिरफ्तारी से राहत

News18Hindi
Updated: October 4, 2019, 3:44 PM IST
भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: गौतम नवलखा को 15 अक्‍टूबर तक गिरफ्तारी से राहत
बॉम्‍बे हाईकोर्ट में नवलखा ने कहा था कि मेरा किसी भी प्रतिबंधित संगठन से कोई संबंध नहीं है. मैं केवल नागरिक अधिकारों के लिए आवाज उठाता हूं.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा (Gautam Navlakha) को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण (Interim Protection) देते हुए महाराष्‍ट्र पुलिस (Maharashtra Police) को मामले से जुड़े दस्‍तावेज पेश करने का आदेश दिया.

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  • Last Updated: October 4, 2019, 3:44 PM IST
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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले (Bhima-Koregaon Case) में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा (Gautam Navlakha) को 15 अक्‍टूबर तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत (Interim Relief) दे दी है. साथ ही महाराष्‍ट्र पुलिस (Maharashtra Police) को मामले से जुड़े दस्‍तावेज कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है. बता दें कि 31 दिसंबर, 2017 को यलगार परिषद (Elgar Parishad) के कार्यक्रम के अगले दिन यानी 1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़क गई थी. इसके बाद पुणे पुलिस (Pune Police) ने नवलखा, अरुण फरेरा, वरनॉन गोंजाल्विस और सुधा भारद्वाज के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की थी.

महाराष्‍ट्र पुलिस ने माओवादियों से संबंधों का भी लगाया था आरोप
महाराष्‍ट्र पुलिस ने आरोप लगाया था कि नवलखा और अन्‍य के माओवादियों से संबंध (Maoist links) हैं. ये सभी आरोपी सरकार को अस्थिर करने के लिए माओवादियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. सभी आरोपियों के खिलाफ गरै-कानूनी गतिविधि निषेध कानून (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्‍न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. कोर्ट में नवलखा ने कहा था कि मेरा किसी भी प्रतिबंधित संगठन (Banned Organisation) से कोई संबंध नहीं है. मैं केवल नागरिक अधिकारों (Civil Rights) के लिए आवाज उठाता हूं. ये पूरा मामला दस्‍तावेजों और सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर बनाया गया है.

हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी एफआईआर रद करने की याचिका

महाराष्‍ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने इस मामले में फैसला सुनाए जाने से पहले उसका पक्ष भी सुने जानी की याचिका दायर (Caveat) की है. गौतम नवलखा ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर खारिज करने के लिए बॉम्‍बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में याचिका दायर की थी. नवलखा की इस याचिका को हाईकोर्ट ने 13 सितंबर को खारिज कर दिया था. हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्‍तृत जांच की जरूरत है. इसके बाद हाईकोर्ट ने नवलखा की गिरफ्तारी पर तीन सप्‍ताह की रोक लगा दी थी ताकि वह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उसके फैसले को चुनौती दे सकें.

सुप्रीम कोर्ट के पांच जज खुद को सुनवाई से कर चुके हैं अलग
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस. रविंद्र भट ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. उनसे पहले सुप्रीम कोर्ट के चार और जज नवलखा की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर चुके थे. मुख्‍य न्‍यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई ने 30 सितंबर को मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया था. इसके बाद 1 अक्‍टूबर को जस्टिस एनवी रमन, आर. सुभाष रेड्डी और बीआर गवई ने भी इस मामले की सुनवाई कर रही बेंच से खुद को अलग कर लिया था. हालांकि, किसी ने भी इस मामले की सुनवाई से अलग होने का कारण नहीं बताया है.
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First published: October 4, 2019, 3:38 PM IST
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