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काबुल से भारत लौटी महिलाओं के चेहरे पर दिखा सुकून, कहा- अब सुरक्षित महसूस हो रहा है

काबुल से भारत लौटी महिलाओं के चेहरे पर दिखा सुकून, कहा- अब सुरक्षित महसूस हो रहा है

अफगानिस्तान से भारत लौटने पर महिलाओं ने खुशी जाहिर की है.

अफगानिस्तान से भारत लौटने पर महिलाओं ने खुशी जाहिर की है.

रंजीत कौर ने कहा कि वो भारत आने पर बहुत खुश है, और उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है. इखनूर सिंह नहीं जानता कि उसके परिवार को देश छोड़ कर क्यों जाना पड़ा, वो बस अपनी मां के चेहरे को देखे जा रहा था. इखनूर सिंह के भारत आने के लिए भारत सरकार ने पासपोर्ट की अनिवार्यता से छूट दे दी.

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    नई दिल्ली. चेहरे पर सुकून और गोद में एक साल की बच्ची लिए यह अफ़ग़ान महिला आज हिंडन एयरबेस पर अपने परिवार के साथ पहुंची. बच्ची के माथे पर काले टीके से साफ है कि वो उसे बुरी नज़र से बचाने की कामना करती है. कल रात काबुल से निकलते वक्त इसी महिला के चेहरे पर चिंता और घबराहट के भाव थे. वो जल्द से जल्द अपना देश छोड़ किसी सुरक्षित जगह पर अपने परिवार के साथ जाना चाहती थी. उनकी यह फरियाद रविवार के दिन पूरी हुई, और हिंडन पहुंचने पर वो, और उनकी बेटी, दोनों ही बहुत खुश नज़र आए. मां-बेटी की यह तस्वीर अपने आप में एक कहानी बयान करती है. तालिबान के ज़ुल्मों-सितम से दूर वो अपनी बच्ची के बेहतर भविष्य की कामना करती है.

    हिंडन एयरबेस पर रविवार सुबह काबुल से C17 ग्लोबमास्टर 168 यात्रियों को लेकर भारत पहुंचा. और लैंडिंग के बाद ऐसे कई चेहरे दिखे जिनपर अब शिकन नहीं थी. 4 महीने का इखनूर सिंह अपनी मां रंजीत कौर की गोद में अटखेलियां करता नज़र आया. रंजीत कौर ने कहा कि वो भारत आने पर बहुत खुश है, और उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है. इखनूर सिंह नहीं जानता कि उसके परिवार को देश छोड़ कर क्यों जाना पड़ा, वो बस अपनी मां के चेहरे को देखे जा रहा था. इखनूर सिंह के भारत आने के लिए भारत सरकार ने पासपोर्ट की अनिवार्यता से छूट दे दी.

    रंजीत कौर की दूसरी 3 साल की बेटी से जब मैंने पूछा कि ‘बेटे आप काबुल से आये हो?’ तो वो बस मुस्कुरा दी, आंखों में खुशी और चमक लिए वो अपनी मां से लिपट गयी.

    वहीं काबुल से भारत आए पूर्व सांसद नरिंदर सिंह खालसा का भावुक वीडियो आज दिनभर टीवी स्क्रीन पर दिखाई दिया. नरिंदर सिंह के लिए भारत आना भले ही राहत की बात हो, लेकिन अपने देश को छोड़ना उनके लिए आसान नहीं था. वो पिछले 20 सालों को याद करते हुए कहते हैं जो कुछ भी इन सालों में पाया वो सब बर्बाद हो गया.

    नरिंदर सिंह अपने पिता को 2018 में अफ़ग़ानिस्तान के जलालाबाद आत्मघाती हमले में खो चुके हैं, लेकिन उनका दर्द आज भी कम नहीं हुआ.

    रविवार को काबुल से भारत आए 168 यात्रियों में 107 भारतीय नागरिक और 24 अफ़ग़ान सिख शामिल हैं. पीएम मोदी कह चुके हैं कि अफ़ग़ानिस्तान से न सिर्फ सभी भारतीयों को सुरक्षित निकाला जाना चाहिए, साथ ही अफ़ग़ान अल्पसंख्यक समुदाय और अफ़ग़ान नागरिकों की भी मदद की जानी चाहिए.

    Tags: Afghanistan, Afghanistan news, Afghanistan-Taliban

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