कोविड-19: भारत में रेमडेसिवीर बनाने की अनुमति जल्द, फिर भी इस महीने नहीं होगी उपलब्ध

कोविड-19: भारत में रेमडेसिवीर बनाने की अनुमति जल्द, फिर भी इस महीने नहीं होगी उपलब्ध
रेमडेसिवीर कोविड-19 के इलाज के लिये सबसे उपयुक्त दवाओं में से एक बनकर उभरी है

अधिकारियों ने कहा है कि टेस्ट रिपोर्ट्स के नतीजों और स्टेबिलिटी डेटा (Stability Data) के आधार पर, भारतीय निर्माताओं को इसके तेज नियंत्रित आपातकालीन प्रयोग की अनुमति तेज जवाबी प्रक्रिया के आधार पर दी जाएगी, जिस तरह से यह गिलीड साइंसेज (Gilead Sciences) को दी गई थी.

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नई दिल्ली. कोविड-19 (Covid-19) के इलाज की संभावित दवा रेमडेसिवीर (Remdesivir) के उत्पादन के लिए अनुमति दिये जाने में तेजी लाई जाएगी. लेकिन कोरोना वायरस (Coronavirus) के तेजी से बढ़ते मामलों के बावजूद इस एंटीवायरल दवा (Antiviral Drug) का भारतीय बाजार में इस महीने उपलब्ध होना संभव नहीं है.

स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) के सूत्रों के मुताबिक, हेटेरो लैब्स लिमिटेड (Hetero Labs Limited) अपने टेस्ट रिपोर्ट्स के नतीजों और स्टेबिलिटी डेटा (Stability Data) को जून के आखिरी हफ्ते में सौंपेगी. हेटेरो लैब्स, उन चार कंपनियों में से एक है, जिन्होंने अमेरिकी कंपनी गिलीड साइंसेस (Gilead Sciences) के साथ रेमडेसिवीर का जेनेरिक वर्जन बनाने और इसकी भारत में सप्लाई करने के लिए एक लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं.

गिलीड साइंसेज को दवा के बाजार में प्रयोग की पहले ही मिली अनुमति
अधिकारियों ने कहा है कि टेस्ट रिपोर्ट्स के नतीजों और स्टेबिलिटी डेटा के आधार पर, भारतीय निर्माताओं को इसके तेज नियंत्रित आपातकालीन प्रयोग की अनुमति तेज जवाबी प्रक्रिया के आधार पर दी जाएगी, जिस तरह से यह गिलीड साइंसेज को दी गई थी. उन्होंने कहा है कि यह डाटा, उत्पादों की गुणवत्ता जांचने के लिए जरूरी है.
द सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने गिलीड साइंसेस को उनकी खोजी दवा को बाजार में प्रयोग की शर्त आधारित अनुमति एक त्वरित समीक्षा प्रक्रिया के आधार पर दे दी थी, लेकिन भारतीय कंपनियों को अब भी इसका इंतजार है.



सरकार की मंजूरी लेकिन नियामक मंजूरी के बिना अस्पतालों को नहीं मिली
सरकार ने 2 जून को कोविड-19 रोगियों के इलाज में आपातकालीन उपयोग के लिए रेमेडिसविर को मंजूरी दे दी थी, लेकिन स्थानीय निर्माताओं के लिए नियामक मंजूरी के अभाव के कारण अस्पताल इसे खरीद नहीं पाए हैं.

हेटेरो के अलावा, जुबिलेंट लाइफ साइंसेज लिमिटेड, सिप्ला लिमिटेड और माइलान एनवी ने भी देश में रेमेडिसवियर की आपूर्ति का विस्तार करने के लिए गिलीड के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

दवा कंपनियों के प्रस्ताव पर फास्ट-ट्रैक आधार पर हो रहा विचार
मई के तीसरे सप्ताह में नॉन-एक्सक्लूसिव समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, अधिकारियों ने कहा कि इन फर्मों ने बड़ी संख्या में ड्रग्स और इंजेक्शन बैचों का उत्पादन शुरू किया. साथ ही अनुमति के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) में आवेदन किया.

उन्होंने कहा, 'उनके प्रस्ताव पर विषय-विशेषज्ञ समिति की ओर से फास्ट-ट्रैक आधार पर विचार किया जा रहा था. बड़ी संख्या में ड्रग और इंजेक्शन निर्माण का निरीक्षण भी किया गया है.'

अन्य कंपनियों को रिपोर्ट सौंपने के लिये नहीं दी गई है समयसीमा
एक अधिकारी ने कहा, "प्रक्रिया का अगला चरण एंटीवायरल दवा के बैचों का उत्पादन करना, CDSCO लैब में परीक्षण किए गए नमूने प्राप्त करना और स्टैबिलिटी स्टडी के आंकड़े जमा करना होगा."

जबकि हेटेरो को इस महीने के आखिरी सप्ताह तक अपनी परीक्षण रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है, अधिकारियों ने अन्य कंपनियों के लिए कोई समयसीमा नहीं दी है. उन्होंने कहा कि सरकार रोज के हिसाब से दवा निर्माताओं के साथ संपर्क में है.

फिलहाल दवा के मूल्य निर्धारण को लेकर चर्चा नहीं
औपचारिक चिकित्सा परीक्षणों में COVID-19 रोगियों में सुधार दिखाने वाली रेमेडिसविर पहली दवा है. इसे पिछले महीने यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा आपातकालीन उपयोग का अधिकार दिया गया था और जापानी स्वास्थ्य नियामकों की ओर से भी इसे मंजूरी मिल गई है.

भारत में, गिलीड ने एक वैकल्पिक दवा मिलने तक रॉयल्टी-मुक्त व्यवस्था के तहत चार कंपनियों को रीमेडिसविर के उत्पादन के लिए स्वैच्छिक लाइसेंस दिया है. रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि फर्मों ने अभी तक उस दवा (जिसका उपयोग अस्पताल में भर्ती मरीजों पर किया जाएगा) के मूल्य निर्धारण पर चर्चा करने के लिए औपचारिक रूप से राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल मूल्य निर्धारण नियामक (NPPA) से संपर्क नहीं किया है.

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