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प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल लैंसेट ने सराहा, कहा-भारत में डेल्टा प्रकोप के दौरान प्रभावी रही कोविशील्‍ड वैक्‍सीन

प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल लैंसेट ने सराहा, कहा-भारत में डेल्टा प्रकोप के दौरान प्रभावी रही कोविशील्‍ड वैक्‍सीन

सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा विकसित कोविशील्ड वैक्सीन. (फाइल फोटो)

सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा विकसित कोविशील्ड वैक्सीन. (फाइल फोटो)

दुनिया के सबसे पुराने और सबसे प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल में से एक द लैंसेट (the Lancet) ने कहा है कि जब भारत में कोरोना वायरस का डेल्‍टा वेरिएंट (Coronavirus Delta Variant) का प्रकोप जारी था तब कोरोना वायरस के खिलाफ कोविशील्‍ड वैक्‍सीन (Covishield vaccine) प्रभावी रही. इसके अनुसार पूरी तरह से टीकाकरण वाले लोगों में टीके की 63 प्रतिशत की प्रभावकारिता थी, जबकि यह मध्यम से गंभीर बीमारी के खिलाफ 81 प्रतिशत प्रभावी थी. मध्यम-से-गंभीर COVID-19 के खिलाफ भी यह वैक्सीन प्रभावशाली रहा है. यहां तक ​​​​कि एक उछाल के दौरान भी यह प्रभावशाली बना रहा.

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    नई दिल्‍ली. दुनिया के सबसे पुराने और सबसे प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल में से एक द लैंसेट (the Lancet) ने कहा है कि जब भारत में कोरोना वायरस का डेल्‍टा वेरिएंट (Coronavirus Delta Variant) का प्रकोप जारी था तब कोरोना वायरस के खिलाफ कोविशील्‍ड वैक्‍सीन ( Covishield vaccine) प्रभावी रही. इसके अनुसार पूरी तरह से टीकाकरण वाले लोगों में टीके की 63 प्रतिशत की प्रभावकारिता थी, जबकि यह मध्यम से गंभीर बीमारी के खिलाफ 81 प्रतिशत प्रभावी थी. इस अध्ययन का नेतृत्व ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (THSTI) ने किया था. इसमें भारतीय रिसर्चर्स भी शामिल थे.

    यह अध्‍ययन अप्रैल और मई 2021 के बीच किया गया. यह अध्‍ययन SARS-CoV-2 संक्रमण वृद्धि के दौरान कोविशील्ड की वास्तविक प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए किया था. विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वायरस के वेरिएंट ने वैक्सीन प्रभावशीलता के बारे में चिंताओं को जन्म दिया है. भारत में डेल्टा (B.1.617.2) वेरिएंट का प्रमुख तनाव है. उन्‍होंने कहा कि मध्यम-से-गंभीर COVID-19 के खिलाफ भी यह वैक्सीन प्रभावशाली रहा है. यहां तक ​​​​कि एक उछाल के दौरान भी यह प्रभावशाली बना रहा.

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    शोधकर्ताओं ने सुरक्षा तंत्र को समझने के लिए कई प्रयोग किए. उन्‍होंने स्‍वस्‍थ टीकाकरण वाले व्‍यक्तियों में वेरिएंट के खिलाफ तटस्‍थ गतिविधि और सेलुलर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को परखा. शोधकर्ताओं ने पाया कि स्‍पाइक-विशिष्‍ट टी-सेल प्रतिक्रियाओं को डेल्‍टा और वाइल्‍ड प्रकार के SARS-CoV-2 दोनों के खिलाफ संरक्षित किया गया था. अध्ययन में पुष्टि किए गए SARS-CoV-2 संक्रमण के 2379 मामलों और 1981 कंट्रोल के बीच तुलना शामिल थी.

    द लैंसेट इंफेक्शियस डिजीज नामक पत्रिका में प्रकाशित, अध्ययन में पाया गया कि सेलुलर प्रतिरक्षा सुरक्षा वायरस के रूपों के खिलाफ कमजोर प्रतिरक्षा के लिए क्षतिपूर्ति कर सकती है और मध्यम से गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता को रोक सकती है. मंत्रालय ने कहा, ‘यह अध्ययन वास्तविक दुनिया के टीके की प्रभावशीलता और टीकाकरण के प्रति प्रतिरक्षात्मक प्रतिक्रिया पर व्यापक डेटा प्रदान करता है जिससे नीति को निर्देशित करने में मदद मिलनी चाहिए.’

    Tags: Corona Virus, Coronavirus Delta Variant, Covishield vaccine

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