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एक प्रोटीन की वजह से कम रही भारत समेत एशियाई देशों में कोरोना संक्रमण की रफ्तार: रिपोर्ट

भारत समेत एशियाई देशों में कम रही कोरोना की रफ्तार. (Pic- AP)
भारत समेत एशियाई देशों में कम रही कोरोना की रफ्तार. (Pic- AP)

Coronavirus: पश्चिम बंगाल के कल्‍याणी में स्थित नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्‍स के वैज्ञानिकों ने एशियाई देशों में पश्चिमी देशों की तुलना में कोरोना वायरस की कम रफ्तार के पीछे जैव‍िकीय कारण पर अध्‍ययन किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 9, 2021, 11:37 AM IST
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नई दिल्‍ली. देश-दुनिया में अब भी जानलेवा कोरोना वायरस (Coronavirus) का खतरा छाया हुआ है. कई देश लगातार इससे जूझ रहे हैं. दुनिया में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण (Covid 19) से 23.36 लाख से अधिक मौतें हो चुकी हैं. इस दौरान एक दावा यह भी किया जा रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों की रफ्तार भारत समेत एशियाई देशों (Corona in Asia) की तुलना में पश्चिमी देशों में अधिक है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके पीछे मानव शरीर में पाया जाने वाला एक प्रोटीन जिम्‍मेदार है.

पश्चिम बंगाल के कल्‍याणी में स्थित नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्‍स के वैज्ञानिकों ने एशियाई देशों में पश्चिमी देशों की तुलना में कोरोना वायरस की कम रफ्तार के पीछे जैव‍िकीय कारण पर अध्‍ययन किया है. वैज्ञानिकों ने इस दौरान पाया कि मानव शरीर में न्‍यूट्रोफिल एलस्‍टेस नामक प्रोटीन की अधिक मात्रा कोरोना वायरस को शरीर की कोशिकाओं में घुसने, संख्‍या बढ़ाने और तेजी से फैलने में मदद करती है. यह शोध इंफेक्‍शन, जेनेटिक्‍स एंड इवोल्‍यूशन नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है.

वैज्ञानिकों के अनुसार यह प्रोटीन ए‍क अन्‍य प्रोटीन भी बनाता है. इसका नाम अल्‍फा-1 एंटीट्रिपसिन या AAT है. एएटी की कमी होने पर कोशिकाओं में न्‍यूट्रोफिल इलस्‍टेस का स्‍तर काफी अधिक हो जाता है और फिर यह कोरोना वायरस के प्रसार में मददगार बनता है. आमतौर पर एएटी की कमी एशियाई देशों के लोगों के मुकाबले यूरोपीय देश और अमेरिका में कहीं अधिक होती है. मतलब एशियाई देशों में इसीलिए कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से नहीं फैला.

यह शोध करने वाली वैज्ञानिकों की टीम का नेतृत्‍व निधान बिस्‍वास और पार्थ मजूमदार ने किया है. उनके अनुसार कई लोग ऐसा सोचते है कि अलग-अलग भौगोलिक स्थितियों के मुताबिक कोरोना वायरस के फैलने का तरीका भी अलग क्‍यों है. सबसे बड़ी बात यह मानी जा रही थी कि एशिया के अधिक तापमान ने कोरोना को अधिक नहीं फैलने दिया. वैज्ञानिकों के अनुसार उनका मानना है कि इसके पीछे सामाजिक और प्राकृतिक कारण नहीं बल्कि बायोलॉजिकल कारण है.
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