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J&K में बाहरी लोगों को वोटिंग के अधिकार का विरोध क्यों? धारा 370 हटने के बाद ये कानून देता है इसकी अनुमति 

जम्मू कश्मीर में बाहरी लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाने का विरोध (सांकेतिक तस्वीर)

जम्मू कश्मीर में बाहरी लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाने का विरोध (सांकेतिक तस्वीर)

Voting Rights in Jammu-Kashmir: जम्मू-कश्मीर में बाहरी लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाने को लेकर जारी विरोध के बीच सरकारी अधिकारी ने बताया कि, घाटी में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 लागू है. यह आम तौर पर बाहर से आए स्थानीय निवासियों को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की मतदाता सूची में पंजीकृत होने की अनुमति देता है, बशर्ते कि उसका नाम उसके मूल निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से हटा दिया जाए.

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हाइलाइट्स

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 लागू 
बाहर से आए स्थानीय निवासियों को जम्मू-कश्मीर की मतदाता सूची में पंजीकृत होने की अनुमति देता
नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने चुनाव आयोग के इस फैसले पर जताया कड़ा विरोध

श्रीनगर: जम्मू एवं कश्मीर में मतदाता सूची में बाहर के लोगों के नाम शामिल करने के मुद्दे पर सियासी दलों में खलबली मची हुई है. घाटी के दो प्रमुख राजनीतिक दल नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने चुनाव आयोग के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है. सरकार से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 लागू है. यह आम तौर पर बाहर से आए स्थानीय निवासियों को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की मतदाता सूची में पंजीकृत होने की अनुमति देता है, बशर्ते कि उसका नाम उसके मूल निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से हटा दिया जाए.

उन्होंने बताया कि, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से पहले भी आमतौर पर केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले लोग मतदाता सूची में पंजीकृत होने के पात्र थे. उन्हें गैर स्थायी निवासी (एनपीआर) मतदाताओं के रूप में वर्गीकृत किया गया था. पिछले संसदीय चुनावों के दौरान जम्मू-कश्मीर में लगभग 32,000 एनपीआर मतदाता थे.

हालांकि एनसी और पीडीपी इस फैसले के खिलाफ है. NC के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा, सीईओ द्वारा जम्मू एवं कश्मीर में क्षेत्र के बाहर के लोगों को मतदाता का दर्जा देने के संबंध में की गई घोषणा के मुद्दे पर डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने 22 अगस्त को अपने घर पर सर्वदलीय बैठक बुलाई है.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) ह्रदेश कुमार ने एक बड़े फैसले में घोषणा की थी कि गैर-स्थानीय लोग, जो आमतौर पर जम्मू-कश्मीर में रह रहे हैं, वे मतदाता सूची में अब अपना नाम दर्ज करा सकते हैं. उन्होंने कहा कि बाहरी लोगों को मतदाता के रूप में सूचीबद्ध करने के लिए डोमिसाइल की जरूरत नहीं है. उन्होंने यह भी कहा है कि अन्य राज्यों के सशस्त्र बल के जवान जो जम्मू-कश्मीर में शांति केंद्रों पर तैनात हैं, वे भी अपना नाम मतदाता सूची में जोड़ सकते हैं.

Tags: Article 370, Jammu kashmir, Jammu Kashmir Election

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