अपना शहर चुनें

States

Republic Day Parade: 38 साल में कितनी बदल गई राजपथ पर रिपब्लिक डे परेड, बता रहे हैं रि. ऑनरेरी कैप्‍टन धर्मपाल

दिल्‍ली के राजपथ पर 26 जनवरी को रिपब्लिक डे परेड का आयोजन होता है.
दिल्‍ली के राजपथ पर 26 जनवरी को रिपब्लिक डे परेड का आयोजन होता है.

Republic Day Parade: हर साल दिल्‍ली के राजपथ पर 26 जनवरी को आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड पिछले 38 सालों में काफी बदल गई है. 1982 में आर्मर्ड कोर में रिसालदार मेजर के पद पर रहते हुए परेड में भाग लेने वाले रिटायर्ड ऑनरेरी कैप्‍टन धर्मपाल बता रहे हैं क्‍या-क्‍या हुए हैं बदलाव.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 24, 2021, 6:49 AM IST
  • Share this:
नई दिल्‍ली. साल 1982 में जनवरी के महीने में कड़ी मेहनत के साथ परेड की रिहर्सल होती थी. 26 जनवरी का दिन था. सुबह चार बजे ही गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने वाले सभी सैनिक और अधिकारी उठा दिए गए. तैयार होने के आदेश मिले. एक घंटे के अंदर सभी विजय चौक (Vijay Chowk) पहुंचे. उस वक्‍त मन में देशभक्ति के भाव उमड़ रहे थे. विजय चौक से अमर जवान ज्‍योति तक पहुंचने में जो भी वक्‍त लगा वह जीवन के सबसे अच्‍छे पलों में शुमार हो गया. यह कहना है साल 1982 में दिल्‍ली राजपथ पर भारत की गणतंत्र दिवस परेड (Republic Day Parade) में हिस्‍सा लेने वाले रिटायर्ड ऑनरेरी कैप्‍टन धर्मपाल का.

1965 और फिर 1971 में भारत-पाकिस्‍तान युद्ध (India-Pakistan War) के दौरान आर्मर्ड कोर में टैंक कमांडर रहे धर्मपाल ने पाकिस्‍तान (Pakistan) के खिलाफ अपने साहस का परिचय दिया था. जिसके लिए इन्‍हें सेना मैडल से सम्‍मानित किया गया. पांच साल रिसालदार मेजर के पद पर रहने के बाद ऑनरेरी कैप्‍टन के पद से 1987 में रिटायर होने वाले धर्मपाल कहते हैं कि उनकी उम्र अब 83 साल है लेकिन जब भी सेना, युद्ध और 26 जनवरी पर राजपथ की परेड की बातें करते हैं तो गौरव महसूस होता है और भावुक हो ही जाते हैं. अपने जीवन में एक बार रिपब्लिक डे परेड में शामिल होना सभी सैनिकों का सपना होता है. हालांकि उससे पहले 15 जनवरी को होने वाली आर्मी परेड (Army Parade) भी बहुत खास होती है.

1982 में रिपब्लिक डे परेड में हिस्‍सा लेने वाले रिटायर्ड ऑनरेरी कैप्‍टन धर्मपाल
1982 में रिपब्लिक डे परेड में हिस्‍सा लेने वाले रिटायर्ड ऑनरेरी कैप्‍टन धर्मपाल.




रिटायर्ड कैप्‍टन बताते हैं कि 27 साल तक सेना में नौकरी करने के बाद उन्‍हें राजपथ परेड (Rajpath Parade) में हिस्‍सा लेने का मौका मिला था. उस दौरान कंटिनजेंट कमांडर अनिल काक के नेतृत्‍व में आर्मर्ड कोर के तीन ट्रुप (प्‍लाटून) ने परेड में हिस्‍सा लिया था. उनमें से एक प्‍लाटून का लीडर मैं था. उस वक्त की परेड और आज की परेड में काफी अंतर आ गया है. पहले परेड न तो इतनी लंबी होती थी और न ही उसमें सेनाओं के शौर्य और पराक्रम का ऐसा प्रदर्शन होता था. इसके साथ ही आर्मी डे परेड भी आज की तरह नहीं होती थी.
पहले नहीं थे इतने हथियार, मिसाइलें और उपकरण

धर्मपाल कहते हैं कि अब होने वाली 26 जनवरी की परेड में सभी हथियारों को दिखाया जाता है. 1982 में जल-थल और वायु सेना (Indian Navy-Army-Air Force) के पास न तो इतने हथियार (Weapon) थे और जो थे भी तो उन सभी को रिपब्लिक डे परेड और आर्मी परेड के दौरान दिखाया नहीं जाता था. 38 साल पहले मांझे जैसे पहले तार से गाइड होने वाली मिसाइल होती थी और टैंक से फायर की जाती थी. यह मिसाइल भी एक ही रेजिमेंट के पास होती थी. यह उस दौरान परेड में दिखाई जाती थी. लेकिन अब तो सेना के पास नई टैक्‍नोलॉजी की मिसाइलें, तमाम तरह की तोप, युद्ध में इस्‍तेमाल होने वाले हैलीकॉप्‍टर, लड़ाकू विमान जैसे नए हथियार और उपकरण हैं, जिन्हें परेड के दिन पूरी दुनिया देखती है. परेड में मोटरबाइक पर करतब पहले भी दिखाए जाते थे लेकिन लड़कियां शक्ति प्रदर्शन नहीं करती थीं पर आजकल करती हैं.

अपनी पत्‍नी और पोते के साथ 83 साल के धर्मपाल.
अपनी पत्‍नी और पोते के साथ 83 साल के धर्मपाल.


इसके साथ ही अब 15 जनवरी को होने वाली आर्मी परेड पर युद्ध का पूरा दृश्‍य पैदा किया जाता है. इस दौरान एयरफोर्स के हेलीकॉप्‍टर उतरते हैं तो कैसे छुपे हुए दुश्‍मन को निशाना बनाना है, उसका पूरा प्रदर्शन करते हैं. यह आज से 38 साल पहले नहीं किया जाता था. यही वजह थी कि गणतंत्र दिवस परेड और आर्मी परेड पहले कम समय में पूरी हो जाती थी. हालांकि अब प्रदर्शन के लिए चीजें बढ़ने पर कुछ ज्‍यादा समय लगता है.

पहले से अब काफी मजबूत हुई है वायु सेना

रिटायर्ड कैप्‍टन धर्मपाल कहते हैं कि 38 साल पहले और अब हर साल दिखाए जाने वाले सेना के शक्ति प्रदर्शन से एक बात तय है कि भारत की वायु सेना पहले से काफी मजबूत हुई है. भारतीय थल सेना के पास हथियार बढ़े हैं लेकिन थल सेना का ज्‍यादा काम बंदूक से ही चलता है और वह मैदान पर लड़ाई लड़ती है. पहले लड़ाइयां भी आमने-सामने की थीं. जिसके लिए ताकतवर जवान की जरूरत होती थी. जो ज्‍यादा ताकतवर होता था वही लड़ाई जीतता था. इस हालात में आर्मी की मजबूती जरूरी थी लेकिन अब लड़ाई का स्‍वरूप भी बदल गया है. अब हवा और पानी में लड़ाई लड़ी जा रही है. सामने के बजाय पीछे से वार किया जा रहा है. पहले सिर्फ दिन की लड़ाई होती थी. रात में हार्बर लग जाता था. हालांकि धीरे-धीरे घुसपैठिए बढ़ते गए और रात की लड़ाई बढ़ती गई.

धर्मपाल आर्मी की आर्मर्ड कोर में तैनात थे जब इन्‍होंने 1965 और 1971 के युद्ध में हिस्‍सा लिया.
धर्मपाल आर्मी की आर्मर्ड कोर में तैनात थे जब इन्‍होंने 1965 और 1971 के युद्ध में हिस्‍सा लिया.


ऐसे में भारतीय सेना में एयर फोर्स पर ज्‍यादा ध्‍यान दिया गया है. उसे ज्‍यादा मजबूत किया गया है, यह इस समय के लिहाज से बेहतर किया गया है. आज आर्मी की लड़ाई कम एयरफोर्स और समुद्र से लड़ाई ज्‍यादा लड़ी जा रही है. ऐसे में भारतीय वायु सेना में जो मजबूती आई है वह बेहतर है. परेड देखने के बाद स्‍पष्‍ट होता है कि इसके बाद दूसरे नंबर पर नेवी को मजबूत किया गया है. जिस प्रकार समुद्री रास्‍तों से घुसपैठ और घेरने की साजिशें बढ़ रही हैं उस हिसाब से भारतीय सेनाओं को बेहतर बनाया जा रहा है.

धर्मपाल बताते हैं कि वे 2018 में भी आर्मी हैडक्‍वार्टर की ओर से दिल्‍ली बुलाए गए और अमर जवान ज्‍योति (Amar Jawan Jyoti) पर ले जाए गए. इसके बाद 2019 में उन्‍हें बांग्‍लादेश (Bangladesh) जाने के लिए भी बुलावा आया लेकिन वे उम्र और सेहत के साथ न देने के चलते वहां जा नहीं सके. हालांकि वे कहते हैं कि मन से एक सेना का जवान कभी बूढ़ा नहीं होता, उसके अंदर देशभक्ति का जुनून उसे हमेशा जवान रखता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज