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टीआरपी घोटाले में रिपब्लिक टीवी के अधिकारी, एक अन्य आरोपी को मिली जमानत

सत्र अदालत ने हंसा रिसर्च एजेंसी के पूर्व कर्मचारी विशाल भंडारी को भी जमानत दे दी. (कॉन्सेप्ट इमेज.)
सत्र अदालत ने हंसा रिसर्च एजेंसी के पूर्व कर्मचारी विशाल भंडारी को भी जमानत दे दी. (कॉन्सेप्ट इमेज.)

TRP scam: ऐसा आरोप है कि जिन घरों में बैरोमीटर लगा था उनमें से कुछ परिवारों को खास चैनल देखने के लिये रकम दी गई, जिससे उन चैनलों की टीआरपी बढ़ाई जा सके.

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मुंबई. मुंबई की एक अदालत ने कथित टीआरपी (टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट्स) घोटाले के सिलसिले में पिछले महीने गिरफ्तार रिपब्लिक टीवी के पश्चिमी क्षेत्र के वितरण प्रमुख घनश्याम सिंह को शनिवार को जमानत दे दी. सिंह को 10 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था. वह रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क में सहायक उपाध्यक्ष भी हैं.

सत्र अदालत ने हंसा रिसर्च एजेंसी के पूर्व कर्मचारी विशाल भंडारी को भी जमानत दे दी, जिसे इस मामले में आठ अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था. न्यायाधीश डी एस देशमुख ने यह आदेश सुनाया. रेटिंग एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) द्वारा कुछ चैनलों द्वारा हंसा के जरिये टीआरपी में छेड़छाड़ को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी.

बीएआरसी ने नमूना घरों में दर्शकों के आंकड़े दर्ज करने के लिये बैरोमीटर्स लगाने और उनके रखरखाव का काम हंसा को सौंपा था. दर्शक संख्या के आधार पर ही टीआरपी तय की जाती है. टीआरपी की संख्या के आधार पर ही चैनलों का विज्ञापन राजस्व निर्भर करता है.



ऐसा आरोप है कि जिन घरों में बैरोमीटर लगा था उनमें से कुछ परिवारों को खास चैनल देखने के लिये रकम दी गई, जिससे उन चैनलों की टीआरपी बढ़ाई जा सके.
पिछले हफ्ते दायर आरोप-पत्र में पुलिस ने आरोप लगाया था कि हंसा में संपर्क प्रबंधक भंडारी ने कुछ नमूना घरों में लोगों को रकम दी और उनसे बॉक्स सिनेमा, फख्त मराठी, महामूवी और रिपब्लिक टीवी देखने को कहा. रिपब्लिक टीवी ने कुछ भी गलत करने से इनकार किया है. पुलिस इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है.
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