'इस्तीफा देकर जाओ'- सिद्धारमैया के ये शब्द बने गवाह, कर्नाटक में सरकार बचाने के लिए कभी गंभीर नहीं थी कांग्रेस

कुमारस्वामी के विश्वासमत खोने के बाद कांग्रेस नेताओं के माथे पर जरा भी शिकन नहीं दिखी और कुछ नेता तो इस 'बेमेल शादी' के टूटने पर खुशी भी जाहिर कर रहे थे.

D P Satish | News18Hindi
Updated: July 24, 2019, 2:46 PM IST
'इस्तीफा देकर जाओ'- सिद्धारमैया के ये शब्द बने गवाह, कर्नाटक में सरकार बचाने के लिए कभी गंभीर नहीं थी कांग्रेस
कांग्रेस और जेडीएस के कुछ विधायक सिद्धारमैया की कुर्सी के पास खड़े होकर आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहे थे
D P Satish
D P Satish | News18Hindi
Updated: July 24, 2019, 2:46 PM IST
रात के करीब 10 बज रहे थे. विधानसभा में मौजूद कांग्रेस और जेडीएस के विधायक विश्वासमत के लिए एक और दिन की मोहलत मांग रहे थे, जबकि बीजेपी के विधायक उसी दिन शक्ति परीक्षण पर अड़े थे. मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर सदन में मौजूद भी नहीं थे. वहीं कांग्रेस और जेडीएस के कुछ विधायक कांग्रेस विधायक दल के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की कुर्सी के पास खड़े होकर आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहे थे. इस दौरान वहां लगे माइक्रोफोन से सिद्धारमैया बोलते हुए सुने गए, 'राजीनामे कोत्तु होगालू हेली..' (उन्हें इस्तीफा देकर जाने के लिए कहो)

कांग्रेस विधायकों के माथे पर नहीं दिखी शिकन
सिद्धारमैया के इन शब्दों से इस चर्चा को बल ही मिलता है, जिसमें कहा जा रहा था कि कांग्रेस यहां गठबंधन सरकार बचाने के लिए शुरू से ही दिलचस्पी नहीं ले रही थी. कुमारस्वामी के विश्वासमत खोने के बाद कांग्रेस नेताओं के माथे पर जरा भी शिकन नहीं दिखी और कुछ नेता तो इस 'बेमेल शादी' के टूटने पर खुशी भी जाहिर कर रहे थे.

खुद को आजाद महसूस कर रहे हैं कांग्रेस नेता

एक वरिष्ठ विधानपार्षद नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहते हैं, 'जेडीएस के साथ गठबंधन ने हमें बर्बाद कर दिया. पुराने मैसूर क्षेत्र में पार्टी का बुरा हाल हो गया है. हमारे कार्यकर्ताओं को लगता है कि इस गठबंधन से केवल गौड़ा और डीके शिवकुमार जैसे कुछ कांग्रेस नेताओं को फायदा हुआ है. हमारे ज्यादातर नेता लोकसभा चुनावों के बाद इस गठबंधन को तुरंत तोड़ना चाहते थे. यह एक न एक दिन तो होना ही था. अब हम खुद को मुक्त महसूस कर रहे हैं.'

शक्तिपरीक्षण में कुमारास्वामी को हराने के बाद अपने समर्थकों के साथ येदियुरप्पा
शक्तिपरीक्षण में कुमारस्वामी को हराने के बाद अपने समर्थकों के साथ येदियुरप्पा


बता दें कि पिछले साल मई में हुए विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश मिलने के बाद बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस आलाकमान के दबाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को मजबूरन जेडीएस नीत सरकार को समर्थन देना पड़ा था. वह आखिरकार तैयार तो हो गए, लेकिन अपने इतिहास के कारण गौड़ा पिता-पुत्र के साथ उनके समीकरण कभी ठीक नहीं हो सके.
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वहीं जेडीएस सुप्रीमो देवगौड़ा और कुमारस्वामी ने भी कई मौकों पर अपनी असंतुष्टि का इजहार किया था. कांग्रेस पर काम न करने देने का आरोप लगाते हुए कुमारस्वामी की आंखों से आंसू तक छलक आए थे.

सियासी भविष्य को लेकर चिंतित थे विधायक
कांग्रेस के कुछ विधायकों के मुताबिक, सिद्धारमैया ने उनसे वादा किया था कि लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद वह कुछ करेंगे, लेकिन नतीजे इतने निराशाजनक रहे कि दोनों पक्षों ने साझा हितों की रक्षा के लिए साथ रहने का फैसला किया. हालांकि कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों में अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर असंतोष बढ़ रहा था. यही वजह थी कि उन्होंने बिना समय गंवाए मुंबई की फ्लाइट पकड़ी और पार्टी से सारे संपर्क काट लिए.

मैदान में उतरे सिद्धारमैया पर खो चुके थे बाज़ी
जब यह साफ हो गया कि कुमारस्वामी सरकार सदन में बहुमत खो चुकी है, तो सिद्धारमैया मैदान में उतरे और बागी विधायकों को अपने पक्ष में करने की कोशिश करने लगे. लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. सिद्धारमैया के करीबी सहयोगियों के मुताबिक, उनके कुछ करीबी विधायकों तक ने उनसे बात करने से मना कर दिया, जिसके बाद वह काफी हताश हो गए.

इस दौरान केवल डीके शिवकुमार ही आखिरी मिनट तक सरकार बचाने की भरसक कोशिश करते दिखे. वह भी शायद इसलिए कि गौड़ा के साथ उनके संबंध अच्छे रहे हैं.

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे और उसके बाद आए शीर्ष नेतृत्व के खालीपन ने बीजेपी का काम काफी आसान कर दिया. अब कांग्रेस सदन में विपक्ष में बैठेगी और सिद्धारमैया वहां पार्टी का नेतृत्व करेंगे. हालांकि यहां बड़ा सवाल है कि कांग्रेस और जेडीएस के बीच बना यह गठबंधन कितने दिन और चलेगा.

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First published: July 24, 2019, 12:36 PM IST
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