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इस्तीफा और निष्कासन: विधानसभा चुनावों से पहले ममता बनर्जी की बड़ती जा रही मुसीबत

बंगाल में इसी साल चुनाव हैं. ऐसे में ममता बनर्जी के सामने बडी चुनौती है. (फ़ाइल फोटो)
बंगाल में इसी साल चुनाव हैं. ऐसे में ममता बनर्जी के सामने बडी चुनौती है. (फ़ाइल फोटो)

West bengal assembly elections 2021: पश्चिम बंगाल के वन मंत्री राजीब बनर्जी ने ममता मंत्रिमंडल छोड़ने के अपने फैसले की घोषणा की. इसके कुछ ही घंटे बाद तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विधायक वैशाली डालमिया को पार्टी लाइन के खिलाफ जाने के लिए निष्कासित कर दिया. ऐसी घटनाओं ने आने वाले विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी के लिए मुसीबतें बढ़ा दी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2021, 11:59 PM IST
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सुजीत नाथ
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार से वन मंत्री राजीव बनर्जी के इस्तीफा देने के कुछ घंटे बाद ही सत्‍ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शुक्रवार को अपनी पार्टी की विधायक वैशाली डालमिया को अनुशासन समिति की बैठक के बाद निष्कासित कर दिया. सूत्रों ने कहा कि वे पिछले कुछ महीनों से पार्टी की सार्वजनिक रूप से आलोचना कर रही थीं, इसलिए उनको निष्कासित करने का फैसला लिया गया है. राज्य मंत्री और पूर्व क्रिकेटर लक्ष्मी रतन शुक्ला के इस्तीफे के बाद कुछ टीएमसी नेताओं के कामकाज के खिलाफ डालमिया के आरोप तेज हो गए थे.

हाल ही में, वैशाली डालमिया ने दावा किया था कि पार्टी के कुछ लोग और 'बाहरी लोग (प्रशांत किशोर की ओर इशारा करते हुए)' टीएमसी को दीमक की तरह खा रहे थे '. उसने यह भी आरोप लगाया कि कुशल लोगों को राज्य में लोगों के अधिक हित के लिए स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति नहीं दी जा रही है.

चुनाव प्रचार के लिए बंगाल आने वाले बीजेपी नेताओं के लिए पिछले महीने वैशाली डालमिया ने टीएमसी के 'बाहरी' टैग के खिलाफ जाने के लिए सुर्खियां बटोरी थीं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'बाहरी' करार देने के लिए अपनी पार्टी नेताओं के खिलाफ आवाज उठाई थी.
वैशाली डालमिया, जो हावड़ा जिले में बल्ली संविधान सभा से पश्चिम बंगाल विधान सभा के सदस्य थी, वे पूर्व भारतीय क्रिकेट प्रशासक और व्यवसायी जगमोहन डालमिया की बेटी हैं. 20 सितंबर 2015 को पिता की मृत्यु के कुछ महीने बाद वह 2016 में टीएमसी में शामिल हुईं थीं.



इससे पहले आज शुक्रवार को, राजिब बनर्जी ने ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया, यह दावा करते हुए कि वे 2018 के बाद से ही पार्टी छोड़ने का मन बना चुके थे जब उन्हें राज्य सिंचाई विभाग से किसी भी परामर्श के बिना हटा दिया गया था. राजभवन के सामने मीडिया के सामने अपने फैसले की घोषणा करते हुए बनर्जी ने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मुझे यह फैसला लेना पड़ेगा. मैं बहुत आहत हुआ था जब ममता बनर्जी ने मुझे बिना किसी परामर्श के सिंचाई विभाग से हटा दिया था."

आंखों में आंसू भर कर बनर्जी ने कहा, 'मुख्यमंत्री को अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करने का पूरा अधिकार है लेकिन मैं उनसे बुनियादी शिष्टाचार की उम्मीद कर रहा था. निर्णय लेने से पहले उन्‍हें मुझे सूचित करना चाहिए था. मैं विभाग की सेवा करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहा था, इसके बावजूद फेरबदल के बारे में मुझे जानकारी नहीं दी गई.”

हाल ही में कई नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया है, वहीं ममता के नेतृत्‍व वाली टीएमसी को आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा से कड़ी टक्‍कर मिल रही है. कुछ अन्य लोग भगवा ब्रिगेड में शामिल होने के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं. पार्टी के दिग्‍गज नेता सुवेन्दु अधिकारी, शुक्ला के अलावा, टीएमसी सांसद सुनील मोंडल और अरिंदम भट्टाचार्य ने भी पश्चिम बंगाल सरकार से इस्तीफा दे दिया है.दूसरी ओर, ममता ने भाजपा पर आरोप लगाए और कहा कि टीएमसी, बंगाल में अब भी सरकार बनाएगी क्योंकि इस राज्य के लोग उनके साथ हैं.'
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