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लोगों को बरगला सकते हैं उमर अब्दुल्ला, 'कोटा रानी' जैसी हैं महबूबा- J&K पुलिस ने पीएसए लगाने की ये दी दलीलें

News18Hindi
Updated: February 10, 2020, 1:34 PM IST
लोगों को बरगला सकते हैं उमर अब्दुल्ला, 'कोटा रानी' जैसी हैं महबूबा- J&K पुलिस ने पीएसए लगाने की ये दी दलीलें
जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद-370 हटाए जाने के बाद पूर्व मुख्‍यमंत्री फारूक अब्‍दुल्‍ला, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्‍दुल्‍ला को एहतियातन हिरासत में रखा गया था. इसके बाद दिसंबर 2019 में फारूक अब्‍दुल्‍ला और 6 फरवरी 2020 को महबूबा-उमर पर पीएसए लगा दिया गया.

पूर्व मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) और उमर अब्‍दुल्‍ला (Omar Abdullah) 5 अगस्‍त 2019 से एहतियातन हिरासत में थे. इसके बाद 6 फरवरी को हिरासत (Detention) अवधि पूरी होने से कुछ घंटे पहले ही दोनों पर जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) लगा दिया गया.

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  • Last Updated: February 10, 2020, 1:34 PM IST
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नई दिल्‍ली. जम्‍मू-कश्‍मीर के पूर्व मुख्‍यमंत्री उमर अब्‍दुल्‍ला (Omar Abdullah) और महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) अनुच्‍छेद-370 हटाए जाने के बाद 5 अगस्‍त से एहतियातन हिरासत (Preventive Detention) में थे. एहतियातन हिरासत की अवधि खत्‍म होने से कुछ घंटे पहले ही 6 फरवरी को उन पर जन सुरक्षा कानून (PSA) लगा दिया गया. जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu-Kashmir) प्रशासन का कहना है कि नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्‍दुल्‍ला आतंकवाद (Terrorism) के चरम पर होने के दौर में अपने समर्थकों को बड़ी संख्‍या में मतदान के लिए प्रोत्‍साहित कर लेते थे. यही नहीं उनके कहने पर लोग चुनाव का बहिष्‍कार (Poll Boycotts) होने के बाद भी मतदान करने निकल पड़ते थे. इससे साफ है कि वह लोगों को बरगलाकर किसी भी कारण के लिए एकजुट कर सड़क पर उतार सकते हैं.

डोजियर में महबूबा को बताया 'डैडीज़ गर्ल' और 'कोटा रानी' 
पुलिस के डोजियर (Dossier) में पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती को 'डैडीज़ गर्ल' और 'कोटा रानी' बताया गया है. इसके साथ ही पूर्व मुख्‍यमंत्री पर देश-विरोधी बयानबाजी करने और प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्‍लामी (Jamaat-e-Islami) का समर्थन करने के आरोप लगाए गए हैं. जमात को गैरकानूनी गतिविधि निषेध अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया है. डोजियर में कहा गया कि वह गरम मिजाज़ महिला हैं, जो कोई भी खतरनाक साजिश बना सकती हैं. इंटेलिजेंस एजेंसियों (Intelligence Agencies) की रिपोर्ट के मुताबिक, वह अलगाववाद को बढ़ावा दे रही हैं.

महबूबा मुफ्ती की खतरनाक सोच और हर हाल में सत्‍ता पर काबिज रहने के लिए कुछ भी कर गुजरने की नीति के कारण आम कश्‍मीरी उन्‍हें 'डैडीज गर्ल' और 'कोटा रानी' कहते हैं.


इंटेलिजेंस ने महबूबा को खतरनाक सोच की नेता बताया
इंटेलिजेंस की रिपोर्ट (Intelligence Report) में कहा गया है कि महबूबा मुफ्ती की खतरनाक सोच और हर हाल में सत्‍ता पर काबिज रहने के लिए कुछ भी कर गुजरने की नीति के कारण आम कश्‍मीरी उन्‍हें 'डैडीज़ गर्ल' और 'कोटा रानी' (Kota Rani) कहते हैं. बता दें कि कोटा रानी कश्‍मीर (Kashmir) की आखिरी महारानी थीं, जिन्‍होंने सत्‍ता में बने रहने के लिए अपने पिता के हत्‍यारे रिंचिन से ही शादी कर ली थी. कहा जाता है कि वह अपने दुश्‍मनों को जहर देकर मरवा देती थीं. उन्‍होंने रिंचिन को युद्ध में हराने वाले उदयन देव से शादी कर ली. इसके बाद जब रानी के विश्‍वासपात्र शाहमीर ने उनके बाकी विश्‍वासपात्रों की हत्‍या कर दी और शादी की इच्‍छा जताई तो उन्‍होंने आत्‍महत्‍या कर ली.

'उमर अब्‍दुल्‍ला ने लोगों को उकसाने की कोशिश की थी'डोजियर में कहा गया है कि उमर अब्‍दुल्‍ला ने अनुच्‍छेद-370 और 35ए को हटाए जाने के खिलाफ आम लोगों को उकसाने की कोशिश की थी. इसलिए उनके खिलाफ पीएसए लगाया गया. साथ ही कहा गया है कि उन्‍होंने सोशल मीडिया (Social Media) के जरिये आम कश्‍मीरियों को भड़काने की कोशिश की. इससे राज्‍य की शांति भंग हो सकती थी. हालांकि, पुलिस ने उनके सोशल मीडिया पर दिए किसी बयान का जिक्र नहीं किया है. बता दें कि 5 अगस्‍त से ही पूरे राज्‍य में संचार के सभी माध्‍यमों पर पाबंदियां लगा दी गईं. काफी समय बाद अब धीरे-धीरे इंटरनेट, मोबाइल समेत सभी संचार माध्‍यमों से प्रतिबंध हटाए जा रहे हैं. हालांकि, अभी भी कुछ इलाकों में पाबंदियां लागू हैं.

उमर अब्‍दुल्‍ला ने अनुच्‍छेद-370 और 35ए को हटाए जाने के खिलाफ आम कश्‍मीरियों को उकसाने की कोशिश की थी.


महबूबा ने जम्‍मू-कश्‍मीर को भारत में विलय को दी थी चुनौती
महबूबा ने अनुच्छेद 370 को हटाए जाने की स्थिति में जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को चुनौती दी थी. उनकी इन्हीं टिप्पणियों के लिए उन पर पीएसए लगाया गया. उनके खिलाफ पीएसए के डोजियर में सुरक्षा बलों द्वारा आतंकवादियों को मार गिराए जाने पर की गई टिप्पणी का भी जिक्र किया गया है. नियमों के अनुसार एहतियातन हिरासत को छह महीने से आगे तभी बढ़ाया जा सकता है जब 180 दिन की अवधि पूरा होने से दो सप्ताह पहले गठित कोई सलाहकार बोर्ड इस बारे में सिफारिश करे. हालांकि, इस संबंध में ऐसे किसी बोर्ड का गठन नहीं हुआ और कश्मीर प्रशासन के पास दो ही विकल्प थे या तो उन्हें रिहा किया जाए या पीएसए लगाया जाए.

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First published: February 10, 2020, 12:43 PM IST
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