रिया के वकील का दावा- बिहार चुनाव के चलते जांच एजेंसियों पर बनाया जा रहा 'पहले से तय' परिणाम पर पहुंचने का दबाव

रिया चक्रवर्ती
रिया चक्रवर्ती

34 वर्षीय अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) का शव 14 जून को उपनगर बांद्रा में उनके अपार्टमेंट में लटका मिला था. इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है.

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  • Last Updated: September 26, 2020, 2:52 PM IST
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नई दिल्ली/ पटना.  अभिनेता रिया चक्रवर्ती (rhea chakraborty)  के वकील सतीश मानेशिंदे ( Satish Maneshinde) ने सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput)  के परिवार पर उनकी मौत की सीबीआई जांच (CBI) में हस्तक्षेप करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. इसके ठीक एक दिन पहले राजपूत के पिता  के वकील विकास सिंह (Advocate Vikas Singh) ने बताया था कि 'एम्स के एक डॉक्टर ने कहा है कि 34 वर्षीय अभिनेता की गला दबाकर हत्या की गई थी.' डॉक्टर एम्स टीम का हिस्सा थे जिसने मामले की फॉरेंसिंक जांच की थी.

बता दें राजपूत के परिवार के वकील विकास सिंह ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि राजपूत की मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच की गति अचानक धीमी हो गई है और पूरा ध्यान ड्रग संबंधी मुद्दों की ओर केंद्रित हो गया है. अब इस मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के वकील सतीश मानेशिंदे ने एम्स पर आरोप लगया है. रिया के वकील ने कहा है कि जिस तरह एम्स के डॉक्टरों ने फोटो के आधार पर जांच कर ली, यह खतरनाक ट्रेंड है. सीबीआई को चाहिए कि वह एक नया मेडिकल बोर्ड बनाए. उन्होंने कहा है कि बिहार चुनाव के मद्देनजर पूर्व निर्धारित परिणाम तक पहुंचने के लिए एजेंसियों पर दबाव डाला जा रहा है.

मानेशिंदे ने कहा कि 'सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में डॉ. गुप्ता की अगुवाई वाली टीम में एम्स के एक डॉक्टर द्वारा तस्वीरों के आधार पर  निष्कर्ष पर पहुंचना करना खतरनाक प्रवृत्ति है. निष्पक्ष जांच के लिए, CBI को नए मेडिकल बोर्ड का गठन करना चाहिए.'



रिया के वकील ने कहा कि  एजेंसियों पर दबाव डाला जा रहा है कि वह बिहार चुनाव के दौरान पहले से ही तय किए परिणाम तक पहुंच जाएं.  डीजीपी पांडे के वीआरएस को कुछ दिन पहले ही हमने देखा है. ऐसे कदम फिर से ना उठाए जाएं.
सुशांत के परिजनों के वकील का यह था दावा
इससे पहले सुशांत के परिवार के वकील ने ट्वीट कर दावा किया था कि 'एम्स टीम का हिस्सा रहे चिकित्सक ने मुझे बहुत पहले बताया था कि मैंने उन्हें जो तस्वीरें भेजी थीं, वे 200 प्रतिशत इस बात की ओर इशारा करती हैं कि यह गला दबाने से हुई मौत थी, आत्महत्या नहीं थी.' उन्होंने कहा था कि इस मामले में निर्णय लेने में सीबीआई की देरी से वह 'हताश' हो रहे हैं. सिंह ने ट्वीट किया था, 'आत्महत्या के लिए उकसाने को एसएसआर (सुशांत सिंह राजपूत) की हत्या के मामले में बदलने का फैसला करने में सीबीआई की देरी से हताश हो रहा हूं.'

गौरतलब है कि शुक्रवार को सिंह ने आरोप लगाया, 'आज हम असहाय हैं क्योंकि हमें नहीं पता कि मामला किस दिशा में जा रहा है. सामान्य तौर पर संवाददाता सम्मेलन सीबीआई द्वारा किया जाता है. लेकिन इस मामले में आज तक सीबीआई ने इस बारे में कोई भी प्रेस ब्रीफिंग नहीं की कि उन्हें क्या मिला है. यह बहुत गंभीर मुद्दा है.' उन्होंने यह भी दावा किया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) टीम का हिस्सा रहे एक चिकित्सक ने उन्हें 'बहुत पहले' बताया था कि राजपूत की तस्वीरें-जो स्वयं अधिवक्ता ने भेजी थीं- संकेत देती हैं कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि कथित तौर पर गला दबाकर की गई हत्या थी.

जहां तक मादक पदार्थ के कोण का सवाल है, अधिवक्ता ने दावा किया कि ऐसा मामला तभी बनाया जा सकता है जब कुछ मात्रा में मादक पदार्थ किसी से जब्त किया जाए. सिंह ने आरोप लगाया कि मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) मीडिया का ध्यान बंटाने के लिए बॉलीवुड के सितारों की एक 'फैशन परेड' करा रहा है.

उन्होंने कहा, 'कोई अपराध तब तक साबित नहीं किया जा सकता जब तक कुछ मात्रा में प्रतिबंधित मादक पदार्थ बरामद नहीं होता. मामला केवल अनियत ग्राहक का बनता है और किसी को दोषी साबित करना लगभग असंभव है.'
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