असम में बाढ़ के कारण जंगलों से निकलकर लोगों के घरों में रह रहे गैंडे

असम में बाढ़ के कारण जंगलों से निकलकर लोगों के घरों में रह रहे गैंडे
असम में बाढ़ के कारण गैंडे जंगलों से बाहर निकल रहे हैं.

असम (Assam Floods) में बाढ़ की स्थिति भयावह बनी हुई है. राज्य के 33 जिलों में से 27 जिलों में 26.38 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं.

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गुवाहाटी. मॉनसून (Monsoon) के कारण पूर्वोत्‍तर में हो रही बारिश (Rain) से असम समेत कुछ राज्‍यों में पिछले कई दिनों से बाढ़ आई हुई है. इस बाढ़ में लोगों के साथ-साथ जानवर भी परेशान हो रहे हैं. असम (Assam Floods) के जंगलों और अभयारण्‍य में रहने वाले जानवर बाढ़ से खुद को बचाकर सुरक्षित स्‍थानों की ओर पलायन कर रहे हैं. इनमें वहां रहने वाले गैंडे (Assam Rhino) भी हैं. ये गैंडे अब जंगलों से निकलकर खुद को बचाने के लिए सूखे इलाकों में स्थित लोगों के घरों में शरण ले रहे हैं. ये गैंडे उनके साथ ही रह रहे हैं.

पोबीतोरा अभयारण्‍य के किनारे स्थित घरों का भी आजकल यही हाल है. वहां अधिकांश घरों के बगीचों या बरामदे में गैंडों ने शरण ली हुई है. इनमें से एक घर नृपेण नाथ का है. उनके घर के पिछले हिस्‍से में गैंडा आ गया है. वह उनके घर के बाथरूम से 30 फीट की दूरी पर एक तालाब में रह रहा है. वह कभी उनके बगीचे में सब्‍जी खाता है, कभी-कभी गैंडे उन्‍हें और उनकी दो बेटियों को भी घूरते हैं. इन सबके बावजूद नृपेण कहते हैं, 'मुझे डर नहीं लगता, मैं जानवरों से प्‍यार करता हूं.'

हालांकि जब हफ्ते भर पहले नृपेण के घर के पास में गैंडे आ गए थे तो उनके माता पिता को काफी चिंता हो गई थी. उन्‍होंने नृपेण से कहा था कि घर पर बच्‍चे हैं, इन गैंडों को घर से दूर भगाओ. नृपेण के अनुसार इन गैंडों ने उनके घर के पीछे घास खाने और एक बार वहां स्थित बैंबू शेड को नुकसान पहुंचाने के अलावा कभी उकसाने जैसा व्‍यवहार नहीं किया था.



असम के राजामायोंग गांव में सिर्फ नृपेण ही नहीं हैं, जिनके घर पर गैंडों का बसेरा है. उनके अलावा 70 साल की राधिका भी हैं, जिनके घर के आंगन में एक मादा गैंडा अपने बच्‍चे के साथ रह रही है. इसके कारण घर पर रहने वाले सभी लोगों को अधिकांश समय घर से बाहर रहना पड़ता है. उनका कहना है कि वे घर के बाहर स्थित बाथरूम भी कभी-कभी इस्‍तेमाल नहीं कर पाते हैं. पोबीतोरा अभयारण्‍य ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ ग्रस्‍त मैदानों में बसा है. यह 27 गांवों से घिरा हुआ है. अब बाढ़ के कारण यहां से गैंडे निकलकर कई घरों में पहुंच गए हैं.
असम में बाढ़ की स्थिति भयावह बनी हुई है जहां शनिवार को एक और व्यक्ति की मौत हो गई और राज्य के 33 जिलों में से 27 जिलों में 26.38 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं. यह जानकारी शनिवार को एक सरकारी रिपोर्ट में दी गई. मोरीगांव जिले में एक और व्यक्ति की मौत के साथ ही इस वर्ष बाढ़ और भूस्खलन से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 123 हो गई है.

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने कहा कि 97 लोगों की मौत जहां बाढ़ जनित घटनाओं के कारण हुई वहीं 26 लोगों की मौत भूस्खलन के कारण हुई है. एएसडीएमए ने कहा कि बाढ़ के कारण प्रभावित लोगों की संख्या शुक्रवार के बाद से 1.6 लाख से अधिक हुई है, जबकि एक और जिला इससे प्रभावित हुआ है.

ब्रह्मपुत्र नदी गुवाहाटी, तेजपुर, धुबरी और गवालपाड़ा शहरों में खतरे के निशान के ऊपर बह रही है. इसकी सहायक नदियां धनसिरी, जिया भराली, कोपिली, बेकी ओर संकोश भी विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. बिश्वनाथ, लखीमपुर, धुबरी, चिरांग, नौगांव, जोरहट, बारपेटा और मजूली जिलों में सड़क, पुल, पुलिया और कई अन्य संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं.
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