Rich Dad Poor Dad की वो पांच सीख, जानिए वो जरूरी बातें जो आपको सीखाती हैं अमीर कैसे बनें

दुनियाभर में मशहूर और बेस्टसेलर किताब Rich Dad poor Dad (रिच डैड पुअर डैड) की लोकप्रियता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि साल 1997 में लिखी गई ये किताब आज भी धुंआधार बिकती है. 100 से ज्यादा देशों में 50 से अधिक भाषाओं में ये किताब छप चुकी है. अब तक चार करोड़ ये ज्यादा इसकी प्रतियां बिक चुकी हैं.

दुनियाभर में मशहूर और बेस्टसेलर किताब Rich Dad poor Dad (रिच डैड पुअर डैड) की लोकप्रियता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि साल 1997 में लिखी गई ये किताब आज भी धुंआधार बिकती है. 100 से ज्यादा देशों में 50 से अधिक भाषाओं में ये किताब छप चुकी है. अब तक चार करोड़ ये ज्यादा इसकी प्रतियां बिक चुकी हैं.

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नई दिल्ली . दुनियाभर में मशहूर और बेस्टसेलर किताब Rich Dad poor Dad (रिच डैड पुअर डैड) के बारे में बहुत सारे लोगों ने सुन रखा होगा. इसके किताब के बारे में आमतौर पर कहा जाता है कि अगर आप अमीर बनना चाहते हैं तो सबसे पहले इस किताब को पढ़ना चाहिए. अमेरिकन बिजनेसमैन रॉबर्ट कियोसाकी (Robert t. Kiyosaki) ने इस किताब को 25 साल पहले लिखा था. लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है या और बढ़ गई है.



इस किताब की लोकप्रियता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि साल 1997 में लिखी गई ये किताब आज भी धुंआधार बिकती है. 100 से ज्यादा देशों में 50 से अधिक भाषाओं में ये किताब छप चुकी है. अब तक चार करोड़ ये ज्यादा इसकी प्रतियां बिक चुकी हैं.



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इस किताब में कियोसाकी ने दो पिताओं के बारे में बात की है. एक वो अपने खुद के पिता के बारे में और दूसरे एक अपने  बेस्ट फ्रेंड के पिता के बारे में. कियोसाकी बताते हैं उनके पिता जी पीएचडी थे, जो इस किताब में पुअर डैड हैं. दूसरे, उनके बेस्ट फ्रेंड के पिता जी एक बिजनेसमैं है जो इस किताब में रीच डैड हैं. इस कहानी के जरिए कियोसाकी अमीर बनने की सोच को आगे बढ़ाते हैं.

आईए जानते हैं इस किताब की पांच सीखने वाली बातें जिसने लाखों लोगों की जिंदगी बदली है...



1- चुनौतियों से दूर नहीं भागना चाहिए



कियोसाकी की जो पहली सीख है वो ये है कि चुनौतियों (challenge)  से दूर नहीं भागना चाहिए बल्कि उन्हें एक अवसर (opportunity)  के रूप में देखना और बदलना चाहिए. Medill Class Family  शुरू से ही अपने बच्चों को सिखाते है कि ये चीज हम अफोर्ड (Afford) नहीं कर सकते है, वो चीज हम अफोर्ड नहीं कर सकते है. लिहाजा बच्चों को बचपन से ही लगता है कि ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो उनकी पहुंच से दूर हैं. वहीं,  Rich Family में बच्चों को सिखाया जाता है कि अगर उनको महंगी चीज चाहिए तो वो उसे कैसे अफोर्ड कर सकते हैं.

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अगर आप खुद ही किसी चीज को बोलते हैं कि हम अफोर्ड नहीं कर सकते हैं तो आप उसकी संभावना खत्म कर देते हैं. और उसके बारे में सोचना भी छोड़ देते हैं. वहीं जब आप ऐसा सोचते हैं कि मैं इसे कैसे अफोर्ड करूं तो आपका दिमाग भी खुद को फोर्स करने लगता है. नए नए रास्ते खोजने लगता है. लिहाजा आप खुद के लिए वेल्थ भी क्रिएट कर पाते हैं.

2- कमाने से ज्यादा नेटवर्थ कितनी है, ये जरूरी



कियोसाकी बताते हैं उनके पिता भले ही पीएचडी थे लेकिन मंथ एंड (Month End)  में उनके पास ज्यादा पैसे नहीं बचते थे. वहीं, उनके दोस्त के पिता यानी रिच डैड हाईस्कूल तक पढ़े थे. लेकिन उनका सारा फोकस एसेट्स बनाने और एक्वायर करने पर होता था. उसकी वो सारी जानकारी रखते थे.
जैसे मान लीजिए आप एक लाख रुपए महीना कमाते है और 5 हजार रुपए बचाते हैं. वहीं, दूसरा 50 हजार कमाता है लेकिन आय का 20 से 30 फीसदी बचाता है और एसेट्स बनाता है. लॉन्ग टर्म में 50 हजार कमाने वाले के पास वेल्थ wealth ज्यादा होगा. मतलब कमाने इतना ही जरूरी है बचत और उस बचत से वेल्थ क्रिएट करना.

3- रिस्क लेना जरूरी है



तीसरी बात ये किताब सिखाती है रिस्क लेना जरूरी है. मीडिल क्लास फेमिली में बच्चों को रिस्क लेने से हमेशा हतोत्साहित ( Discourage) किया जाता है. अगर बात पैसे की है तब तो बोला जाता है बिलकुल रिस्क न ले. कियोसाकी कहते हैं अगर आपको अमीर बनना है तो रिस्क लेना सीख लेना चाहिए. अगर आप वेल्थ क्रिएट करना चाहते हैं तो कैलकुलेटेड रिस्क लेना चाहिए. धीरे धीरे आप रिस्क मैनेजमेंट सीख जाते हैं.
मीडिल क्लास नुकसान झेलने की क्षमता कम होती है, जबकि अमीर लोग घाटा भी झेल लेते हैं. अमीर लोग रिस्क लेकर गलतियां करते हैं और सीख लेते हैं. फिर उन गलतियों को दोहराते नहीं है.



4- पर्सनल फाइनेंस में खुद को एजुकेट करना चाहिए -



कियोसाकी लिखते हैं, हमें पर्सनल फाइनेंस के बारे में कम से कम चार बेसिक बातें पता होनी चाहिए -
1 - बेसिक अकाउंटिंग -  हम कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट को पढ़ सके, समझ सकें.
2 - इंवेस्टिंग -  इंवेस्टिंग से हम अपने पैसे को बढ़ा सकते हैं.
3- फाइनेंशियल मार्केट्स के बेसिक रूल्स पता होने चाहिए.
4- टैक्स -  टैक्स से संबंधित बाते हमें जानना चाहिए. ताकि हम जो पैसा कमा रहे हैं उसे बचा सकें.



कई बार ऐसा होता है कि कुछ लोग अमीर होते हैं लेकिन धीरे धीरे अपना पैसा गंवा देते हैं. इसकी बड़ी वजह होती है फाइनेंशियल एजुकेशन की कमी.



5- खुद के लिए काम करें - 



कियोसाकी कहते हैं कि आप पूरा जीवन दूसरे के लिए काम करके यानी नौकरी करके वेल्थ क्रिएट नहीं कर सकते. एक कर्मचारी अपनी एक महीने की मेहनत एक महीने की सैलरी के लिए खर्च करता है. वहीं, एम्प्लायर कर्मचारी को जितनी सैलरी देता है उससे कई गुना निकालने पर फोकस रखता है. लिहाजा नौकरी में आदमी जो कमाता है वो उसकी असल वैल्यू से हमेशा कम होती है.
जब आप अपना खुद का बिजनेस करते हैं या खुद के लिए काम करते हैं तो आप की आय में दूसरे किसी का हिस्सा नहीं होता है. आय पर कोई सीलिंग नहीं होती. आप जितना कमाएंगे उतना ज्यादा सेव कर पाएंगे , जितना सेव करेंगे उतना ज्यादा एसेट्स एक्वायर कर पाएंगे और उतना ही ज्यादा वेल्थ क्रिएट कर पाएंगे.

जरूरी नहीं है ये कि ऊपर लिखी सभी बातें आपके जीवन पर लागू ही होती हों. समय, परिस्थिति और माहौल के हिसाब से चीजें अलग -अलग होती हैं. बस हम इस किताब से कुछ प्रेरणा ले सकते हैं, जो हमें आगे बढ़ाने में मदद कर सके.

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