खालिस्तान लिंक वाली PR फर्म ने ट्वीट के बदले रिहाना को दिए 18 करोड़: रिपोर्ट

रिहाना ने किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट किया था. (फाइल फोटो)

रिहाना ने किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट किया था. (फाइल फोटो)

द प्रिंट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक रिहाना ने खालिस्तानी लिंक (Khalistan Link) वाली एक पीआर फर्म (PR Firm) से ये पैसे लिए थे. कनाडा के पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के संस्थापक एमओ धालीवाल (MO Dhaliwal) स्काईरॉकेट नाम की इस फर्म के डायरेक्टरों में से एक है.

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  • Last Updated: February 5, 2021, 10:00 PM IST
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नई दिल्ली. अमेरिकी पॉप स्टार रिहाना (Rihanna) ने किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट करने के लिए करीब ढाई मिलिनयन यूएस डॉलर यानी 18 करोड़ रुपए लिए थे. द प्रिंट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक रिहाना ने खालिस्तानी लिंक (Khalistan Link) वाली एक पीआर फर्म (PR Firm) से ये पैसे लिए थे. कनाडा के पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के संस्थापक एमओ धालीवाल (MO Dhaliwal) स्काईरॉकेट नाम की इस फर्म के डायरेक्टरों में से एक है.

ग्लोबल कैंपेन की शुरुआत करने के पीछे पीजेएफ का ही हाथ

प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक किसान आंदोलन के समर्थन में ग्लोबल कैंपेन की शुरुआत करने के पीछे पीजेएफ का ही हाथ है. इस संगठन के पीछे ताकतवर अलगाववादी लोगों का हाथ हो सकता है. पीजेएफ की वेबसाइट भी साफ कह रही है कि इस वक्त सबसे ज्यादा एक्टिव किसान आंदोलन को लेकर है.

पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग द्वारा शेयर की गई टूलकिट भी PJF ने की तैयार
खबर है कि स्वीडन की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग द्वारा शेयर की गई टूलकिट को कनाडा के पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन ने तैयार किया है. इसी बीच शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने संस्था को लेकर बड़ा दावा किया है. पुलिस का कहना है कि किसान आंदोलन की आड़ में संस्था का संस्थापक एमओ धालीवाल भारत में खालिस्तानी आंदोलन को बढ़ावा देना चाहता है.

वायरल वीडियो

एमओ धालीवाल का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा. यह वीडियो भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर शूट किया गया था. हालांकि, इस वीडियो की पुष्टि न्यूज18 नहीं करता है. इस वीडियो में धालीवाल कहता हुआ नजर आ रहा है, 'अगर कल कृषि कानून वापस ले लिए जाते हैं, तो यह जीत नहीं है. जंग कानून वापसी के साथ शुरू होगी, यह यहां खत्म नहीं होगी. किसी को आपको यह मत कहने दो कि जारी जंग कानून वापसी के साथ खत्म हो जाएगी. ऐसा इसलिए क्योंकि वे इस आंदोलन की ऊर्जा को खत्म करना चाहते हैं. वे आपसे यह कहना चाहते हैं कि आप पंजाब से अलग हैं और खालिस्तानी आंदोलन से अलग हैं. आप नहीं हैं.'
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