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अस्पतालों में तेजी से बीमार बच्चों की बढ़ रही संख्या, क्या यह तीसरी लहर की है शुरुआत? जानें विशेषज्ञ की राय

अभी तक, सभी मामलों में बच्चों के लिए कोविड परीक्षण अनिवार्य नहीं हैं.(फाइल फोटो)

अभी तक, सभी मामलों में बच्चों के लिए कोविड परीक्षण अनिवार्य नहीं हैं.(फाइल फोटो)

डॉ. जीवी बसवराज का कहना है कि अगर बच्चे बीमार पड़ते हैं तो सबसे पहले जरूरी है कि घबराना नहीं है. हमारे अस्पताल (Hospital) किसी भी हालात से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. अगर बच्चों के तापमान (Temperature) या फिर कोई दूसरे मामूली लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे नजरअंदाज न करें.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली: पिछले कुछ हफ्तों में देश के कई राज्यों के अस्पतालों में बीमार बच्चों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. इनमें से अधिकांश बच्चों में सर्दी, खांसी के साथ साथ कोविड (Covid-19) जैसे लक्षणों की शिकायत पाई गई है. कोरोना की संभावित तीसरी लहर (Coronavirus Third Wave) से पहले अस्पतालों में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ना काफी चिंतित करने वाली बात है. कोविड-19 की तीसरी लहर से पहले बच्चों के बीमार पड़ने से अब माता पिता भी इस बात से काफी घबराए हुए हैं.

    इंदिरा गांधी बाल स्वास्थ्य संस्थान में बाल रोग प्रोफेसर और कर्नाटक में तीसरी लहर से निपटने के लिए बनाई गई विशेष समिति की सदस्य डॉ. जीवी बसवराज ने बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में कई अहम सवालों के जवाब दिए. आइए जानते हैं कि आखिर इसके पीछे का असली कारण…

    इतनी बड़ी संख्या में बच्चे बीमार पड़ रहे हैं क्या यह सामान्य बात है?
    इस सवाल के जवाब में डॉ. जीवी बसवराज ने कहा कि हां, यह सामान्य है. उन्होंने कहा कि माता पिता को यह समझना चाहिए कि बच्चे 20 महीने से अधिक समय से घरों में बंद है और जब वह अचानक बाहर निकल रहे हैं तो ऐसे में बच्चे प्राकृतिक संक्रमण की चपे’ में आने लगते हैं. इसलिए मौजूदा समय में बच्चे ज्यादा तेजी से बीमार हो रहे हैं.

    क्या यह कोरोना की तीसरी लहर की शुरुआत है, क्योंकि इस लहर में संभावित लक्ष्य बच्चों को बताया गया था?
    कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे संक्रमित होंगे यह एक धारणा है. यह सिर्फ इसलिए है कि हम सचेत रहें. मौजूदा समय में बच्चों का बुखार से पीड़ित होना या फिर अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित होने को कोरोना की तीसरी लहर की शुरुआत नहीं मान सकते.

    बच्चों के बीमार होने पर क्या उपाय अपनाने चाहिए?
    डॉ. जीवी बसवराज का कहना है कि अगर बच्चे बीमार पड़ते हैं तो सबसे पहले जरूरी है कि घबराना नहीं है. हमारे अस्पताल किसी भी हालात से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. अगर बच्चों के तापमान या फिर कोई दूसरी के मामूली लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे नजरअंदाज न करें. एक और जरूरी बात है कि बुखार या फिर दूसरी बीमारी से निपटने के लिए खुद से दवाई न लें. माता-पिता बच्चे को जल्द से जल्द अपने नजदीकी बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाएं, इससे काफी हद तक अस्पताल में भर्ती होने से बचने में मदद मिलेगी.

    अधिक बच्चों में कोविड जैसे लक्षण क्यों हैं?
    हम सब को यह समझना जरूरी है कि कोविड-19 भी एक तरह का फ्लू है. तो अब हम बच्चों में जो लक्षण देख रहे हैं, उनमें बहुत समान पैटर्न हैं. बच्चों में सर्दी, खांसी, शरीर में दर्द, बुखार ये सब अधिकांश वायरल संक्रमण के सामान्य लक्षण हैं. कोविड में भी कुछ हद तक ऐसे लक्षण होते हैं लेकिन हम वायरल संक्रमण को कोविड से नहीं जोड़ कर देख सकते.

    बच्चे को अस्पताल कब ले जाना चाहिए?
    जब किसी बच्चे का बुखार 2 दिन तक दवा लेने के बाद भी कम न हो या बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने लगे तो बच्चे को तुरंत अस्पताल ले आएं. बच्चे को देखने के बाद डॉक्टर तय करेगा कि उसे अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता है या नहीं. अगर सामान्य बात है तो बच्चे का उपचार बाह्य रोगी विभाग में किया जा सकता है.

    क्या बच्चों के लिए कोविड टेस्ट अनिवार्य है? यदि हां, तो इसे कैसे करवाएं?
    अभी तक, सभी मामलों में बच्चों के लिए कोविड परीक्षण अनिवार्य नहीं हैं. बीबीएमपी ने उन बच्चों के लिए आरटी-पीसीआर का आदेश दिया है जिनके लक्षण 2 दिन के इलाज के बाद भी नहीं सुधरते हैं. यदि इलाज करने वाले चिकित्सक को आवश्यकता महसूस होती है, तो वह आरटी-पीसीआर का सुझाव देगा, जो अब विभिन्न केंद्रों पर उपलब्ध है.

    वास्तव में यह किस तरह का बुखार है जो इतनी तेजी से बच्चों को बीमार कर रहा है?
    ये विभिन्न प्रकार के वायरल संक्रमण हैं इसमें इन्फ्लूएंजा से लेकर डेंगू और कई अन्य शामिल हैं, जो आमतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों को प्रभावित कर रहे है. चूंकि लंबे समय से आबादी द्वारा मास्क पहनने, शारीरिक दूरी और स्वच्छता के कोविड नियमों का पालन किया गया इसलिए ये संक्रमण कम हो गया था लेकिन अब जब फिर से सब कुछ खुल रहा है और बाजारों में भीड़ बढ़ रही है तो वायरल संक्रमण वापस आ गया. लेकिन यह याद रखना चाहिए कि ये सभी संक्रमण पूरी तरह से इलाज योग्य हैं. वैसे भी ज्यादातर बच्चे ठीक हो रहे हैं. माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए और अस्पताल में भर्ती होने से बचने के लिए बच्चों की बीमारी के शुरुआती चरणों में बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए.

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