मोटे लोगों में कोरोना से मौत का खतरा ज्यादा, 30 फीसदी को पड़ी वेंटिलेटर की जरूरत

देश में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 80 लाख से ज्यादा केस आ चुके हैं.. (फाइल फोटो)
देश में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 80 लाख से ज्यादा केस आ चुके हैं.. (फाइल फोटो)

मोटे लोग ज्यादातर कई अन्य तरह की परेशानी से भी ग्रस्त होते हैं ऐसे में उन मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जाता है. ऐसे मरीज अन्य मरीजों की तुलना में बेहद गंभीर होते हैं और उनके ठीक होने में भी ज्यादा समय लगता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 29, 2020, 2:32 PM IST
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नई दिल्ली. देश में कोरोना (Corona) का असर भले ही थोड़ा कम दिखाई पड़ रहा हो लेकिन ठंड (cold) बढ़ने के साथ इसका खतरा और बढ़ सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक ठंड के मौसम (weather) में कोरोना का सबसे ज्यादा असर मोटे लोगों पर देखने को मिल सकता है. दिल्ली के कोविड अस्पतालों में अब तक हुई मौतों में ऐसे मरीजों का आंकड़ा काफी बड़ा है जो पहले से मोटापे से ग्रस्त थे. डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना के जितने मरीज संक्रमित हुए उनमें से जिन लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी, उनमें करीब 30 फीसदी लोग मोटापे से पीड़ित थे.

दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल के​ चिकित्सा अधीक्षक डॉ सुरेश कुमार ने कहा कि कोरोना के जिन मरीजों में मोटापे की शिकायत थी उनमें कोरोना का खतरनाक असर देखने को मिला है. कोरोना के मोटे मरीजों में से ज्यादातर में ये जानलेवा साबित हुआ. डॉ सुरेश के मुताबिक जो कोरोना मरीज मोटापे से ग्रस्त होते हैं ऐसे मरीजों के इलाज में भी काफी दिक्कत आती है और इस तरह के लोग पहले से कई तरह की बीमारी की चपेट में रहते हैं.

राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के कोविड नोडल अधिकारी डॉक्टर अजीत जैन के मुताबिक​ मोटापे से ग्रस्त मरीजों के इलाज में विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. मोटे लोग ज्यादातर कई अन्य तरह की परेशानी से भी ग्रस्त होते हैं ऐसे में उन मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जाता है. ऐसे मरीज अन्य मरीजों की तुलना में बेहद गंभीर होते हैं और उनके ठीक होने में भी ज्यादा समय लगता है. डॉ. जैन ने बताया कि शरीर में अधिक फैट जमा होने के कारण इन मरीजों को डायबिटीज, दिल की बीमारी भी हो जाती है.
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इसलिए ज्यादा खतरनाक साबित होता है मोटापा
अपोलो अस्पताल के डॉक्टर पीके सिंघल बताते हैं कि मोटे लोगों में पहले से कई तरह की बीमारी रहती है. ऐसे में अगर उन्हें कोरोना होता है तो उन्हें पहले से हुई बीमारी को देखते हुए दवा देनी होती है और इलाज करना होता है. ऐसे मरीजों में फैट अधिक मात्रा में रहता है, जिससे उनके बीमारी से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है. इस तरह के मरीजों में लीवर से संबंधित दिक्कत बढ़ जाती है, जिसके कारण ब्लड में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है. यही कारण है कि मोटे लोगों को कोरोना से काफी अधिक खतरा रहता है.
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