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नदी, मैदान, जंगल, बस में लिफ्ट.. 14 घंटे की यात्रा कर यूं लखीमपुर खीरी पहुंचे RLD नेता जयंत चौधरी

नदी, मैदान, जंगल, बस में लिफ्ट.. 14 घंटे की यात्रा कर यूं लखीमपुर खीरी पहुंचे RLD नेता जयंत चौधरी

जयंत चौधरी (सफेद गमछे में) लखीमपुर के चौकड़ा गांव में मृतक किसान के परिजनों से मिले.

जयंत चौधरी (सफेद गमछे में) लखीमपुर के चौकड़ा गांव में मृतक किसान के परिजनों से मिले.

उत्‍तरप्रदेश के लखीमपुर (Lakhimpur) के एक गांव में पहुंचने वाले पहले राजनेता, राष्‍ट्रीय लोक दल (रालोद) के जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) ने 14 घंटे लगातार यात्रा की. उन्‍होंने नदियों और खेतों को पार किया तो घने जंगल भी उन्‍हें रोक नहीं पाए. वे आधा दर्जन अलग-अलग वाहनों, रोडवेज की बस और स्‍कूल बस में लिफ्ट लेकर 4 अक्‍टूबर को उस चौकड़ा गांव में पहुंचे और मारे गए किसान लवप्रीत सिंह के परिवार से मिले.

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नई दिल्‍ली. उत्‍तरप्रदेश के लखीमपुर (Lakhimpur) के एक गांव में पहुंचने वाले पहले राजनेता, राष्‍ट्रीय लोक दल (रालोद) के जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) ने 14 घंटे लगातार यात्रा की. उन्‍होंने नदियों और खेतों को पार किया तो घने जंगल भी उन्‍हें रोक नहीं पाए. वे आधा दर्जन अलग-अलग वाहनों, रोडवेज की बस और स्‍कूल बस में लिफ्ट लेकर 4 अक्‍टूबर को उस चौकड़ा गांव में पहुंचे और मारे गए किसान लवप्रीत सिंह के परिवार से मिले. इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा और समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव कह रहे थे कि उन्‍हें उत्‍तर प्रदेश पुलिस ने सोमवार से लखीमपुर जाने की अनुमति नहीं दी. हालांकि बुधवार को उन्‍हें यह अनुमति मिल गई.

रालोद के प्रवक्‍ता अनिल दुबे ने News18 को बताया कि जयंत चौधरी ने ‘गुरिल्‍ला यात्रा’ की, जिसमें 14 घंटे लगे. इसमें कई वाहनों को बदलना पड़ा क्‍योंकि पुलिस उनका पीछा कर रही थी. चौधरी ने पुलिस से आगे निकलने के लिए कई स्‍थानों पर अपना चेहरा साधारण गमछे से छिपाया. उन्‍होंने कहा कि अलग-अलग रास्‍तों से गुजरे और वाहन बदल लिए, नदियों के किनारे पर चले और आखिरकार वहां पहुंच गए, जहां वे जाना चाहते थे.

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रालोद नेता बीरपाल मलिक ने दिल्ली से लखीमपुर की यात्रा के बारे में अधिक जानकारी दी. मलिक बताते हैं कि सोमवार को जब जयंत चौधरी दिल्ली से रवाना हुए तो वे एनएच-24 के जरिए पिलखुवा के पास पुलिस की मौजूदगी तक हापुड़ बाईपास पार गए. ब्रजघाट टोल प्‍लाजा पर भारी पुलिस बल मौजूद होने के बावजूद अपनी यात्रा में सफल रहे. यहां आम जनता और पार्टी के कार्यकर्ता भी मौजूद थे. चौधरी के लखीमपुर जाने का आभास होने पर जनता ने यहां बैरिकेड्स को पीछे कर दिया था. इसके बाद चौधरी ने कहा कि पुलिस का सामना नहीं करना चाहिए और उन्‍होंने लखीमपुर जाने के लिए नई योजना बनाई.

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जयंत चौधरी ने सबसे पहले गजरौला के पास अपनी कार बदल ली, इस कार का नंबर ब्रजघाट पर पुलिस ने नोट कर लिया था. इसके बाद उन्‍होंने अमरोहा बाईपास की ओर अपना रास्‍ता बदलते हुए पकवाड़ा पहुंचे और काशीपुर जाने के लिए उत्‍तराखंड में गए.
यहां उन्होंने बाईपास से गदरपुर और फिर यूपी बॉर्डर के पास उत्तराखंड के रुद्रपुर पहुंचे. यहां लगा कि पुलिस उन्‍हें पहचान लेगी तो वे कार से उतर कर आम आदमी की तरह पैदल चलने लगे और तीन किमी तक चले. उन्‍होंने अपना चेहरा भी ढक लिया. इसके बाद एक अन्‍य कार से पीलीभीत जाने की कोशिश की, लेकिन फिर पुलिस द्वारा पीछा करने का विचार आया तो उन्‍होंने एक बार फिर अपना रास्‍ता बदला.

इसके बाद वे उत्‍तरप्रदेश में सितारगंज मार्ग की ओर बढ़ गए. यहां फिर उन्‍होंने अपना वाहन बदल लिया और वे शारदा बांध योजना (शारदा बांध) त‍क जा पहुंचे. यह 17 किमी लंबा है. बांध के किनारे 7-8 किमी जाने के बाद यहां पता चला कि दो बसें फंसी हुई हैं तो उन्‍होंने बांध और नदी के किनारे लगभग 12 किमी चले. इसके बाद चौधरी ने बीच जंगल में फिर अपना वाहन बदल लिया, इसके बाद वे रोडवेज की बस में सवार हो गए. कुछ दूरी तय करने के बाद उन्‍होंने छोटी स्‍कूल बस में लिफ्ट ली. इसके जरिए वे लखीमपुर जिले में प्रवेश कर सके. सोमवार देर रात चौधरी चौखड़ा गांव के किसान लवप्रीत सिंह के परिवार से जा मिले.

Tags: Jayant Chaudhary, Lakhimpur

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